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सरकार और किसानों के बीच बातचीत में किस तरह चले सवाल-जवाबों के तीर, यहां पढ़ें
Sat, 09 Jan 2021 04:43 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 09 Jan 2021 04:43 AM IST
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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर।
- फोटो : ANI
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केंद्र सरकार और किसानों के बीच शुक्रवार की बैठक में शुरुआत से ही तल्खी थी। इससे पहले हुई बैठकों में सरकार का रुख आमतौर पर नरम रहता था, जबकि किसान संगठनों का रुख गरम।
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हालांकि, बैठक में दोनों पक्षों ने गरम तेवर अपनाए। किसान नेताओं बलवीर सिंह राजेवाल, हन्नान मोल्ला और केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बीच गरमागरम बहस का दौर चला, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला।
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राजेवाल- हम प्रावधानों पर चर्चा करने नहीं आए हैं। शुरू से कह रहे हैं कि बात सिर्फ कानून वापसी पर होगी। आप बताएं कि सरकार कानून वापसी के लिए राजी है या नहीं?
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तोमर- कानून वापसी की मांग ठीक नहीं हैं। आप प्रावधानों पर आपत्तियां बताएं। हम एक एक आपत्तियों पर विचार के लिए तैयार हैं।
राजेवाल- इससे पहले भी हुई सात बैठकों में हमारा रुख स्पष्ट रहा है। हम कानूनों की वापसी चाहते हैं, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी चाहते हैं। इस पर बातचीत हो। हम कानून के प्रावधानों पर बातचीत करने नहीं आए हैं।
तोमर- यह रवैया ठीक नहीं है। आपको समझना होगा कि कानून सिर्फ एक दो राज्य के लिए नहीं हैं। दो-तीन राज्यों से जुड़े यहां बैठे किसान संगठन कानूनों के खिलाफ हैं, मगर देश के अन्य राज्य और अन्य राज्यों के संगठन इन कानूनों के पक्ष में हैं। ऐसे में सिर्फ आपकी बात ही कैसे सुनी जा सकती है?
राजेवाल- आप शुरू से मामले को लटकाते रहे हैं। कभी संयुक्त सचिव को आगे करते हैं तो कभी सचिव को। यह ठीक है कि आप सरकार हैं और आपको लोगों की बातों में महत्व नहीं दिखता। आपके पास ताकत है और आपका मन हमारी मांग मानने का नहीं है। आप हल नहीं निकालना चाहते। आपको पता है कि हमारी मांगें क्या हैं। इस पर हम बहस नहीं करना चाहते।
तोमर- देश लोकतांत्रिक व्यवस्था से चलेगा। जिस कानून की वापसी की मांग आप कर रहे हैं, उसे संसद ने बनाया है। इसकी समीक्षा का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को है। फिर सुप्रीम कोर्ट को ही तय करने दीजिए। वैसे भी ऐसे मामलों में बातचीत कानून के प्रावधानों पर होती है। आप प्रावधान पर चर्चा करना नहीं चाहते तो फिर विकल्प क्या है? सरकार शुरू से कह रही है कि कानून से इतर हम सभी आपत्तियों पर बातचीत और उसके निदान के लिए तैयार हैं।
हन्नान मोल्ला- कानून बनाते समय हमसे बातचीत नहीं हुई। सरकार को पहले सभी पक्षों से गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए थी।
तोमर- अध्यादेश जारी करने और कानून बनाने से पहले सभी पक्षों से बातचीत हुई। देश में दो दशकों से इस मामले में बातचीत हो रही थी। ऐसे में यह कहना ठीक नहीं है कि सरकार ने बातचीत नहीं की। हमने सुलह के लिए दस कदम आगे बढ़ाया है, मगर आप लोग एक कदम भी आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं हैं।