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लाल बहादुर शास्त्री की मौत से जुड़ी जानकारी होगी सार्वजनिक, पीएम करेंगे फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Sep 2018 09:37 AM IST
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लाल बहादुर शास्त्री
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केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत से संबंधित सभी गोपनीय दस्तावेज को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सामने रखने का आदेश दिया है। ताकि दोनों इस बात पर फैसला कर सकें कि उनकी मौत से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं। सीआईसी ने इस बारे में प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री के कार्यालय को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश सूचना के अधिकार कार्यकर्ता की याचिका पर दिए गए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता नवदीप गुप्ता ने यह जानने के लिए आरटीआई डाली है कि क्या उस समय प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी, 1966 में ताशकंद में हुई मौत के बाद ऑटोप्सी की गई थी या नहीं। इस मामले में सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने कहा, इस तरह के संदेहों, गंभीर सवालों, मौत और रिकॉर्ड के गायब हो जाने पर आयोग ने सभी तथाकथित गोपनीय दस्तावेजों को पीएम और गृहमंत्री के सामने रखने का फैसला किया है। जो लोगों की जान और मांग के साथ ही लाल बहादुर शास्त्री के पारिवारिक सदस्यों के मौलिक अधिकार पर विचार करने की सिफारिश कर सकते हैं। यदि वह कह दें कि शास्त्री की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई तो इससे लोगों के संदेह का निवारण हो जाएगा।
सूचना अधिकारी आचार्युलू ने इस बात को लेकर हैरानी जताई कि राज्यसभा की जिस राज नारायण समिति को शास्त्री की मौत की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। जबकि संसद बहुत सावधानी से दस्तावेजों को सहेजने के लिए जानी जाती है। संसद में कहा गया हर शब्द रिकॉर्ड और सार्वजनिक दायरे में रखा जाता है, एक ऐसा भारी-भरकम काम है जिसे कार्यालय बिल्कुल सही तरह से कर रहा है। ऐसे में इतना महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कैसे गायब हो गया।
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आरटीआई कार्यकर्ता नवदीप गुप्ता ने यह जानने के लिए आरटीआई डाली है कि क्या उस समय प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी, 1966 में ताशकंद में हुई मौत के बाद ऑटोप्सी की गई थी या नहीं। इस मामले में सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने कहा, इस तरह के संदेहों, गंभीर सवालों, मौत और रिकॉर्ड के गायब हो जाने पर आयोग ने सभी तथाकथित गोपनीय दस्तावेजों को पीएम और गृहमंत्री के सामने रखने का फैसला किया है। जो लोगों की जान और मांग के साथ ही लाल बहादुर शास्त्री के पारिवारिक सदस्यों के मौलिक अधिकार पर विचार करने की सिफारिश कर सकते हैं। यदि वह कह दें कि शास्त्री की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई तो इससे लोगों के संदेह का निवारण हो जाएगा।
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सूचना अधिकारी आचार्युलू ने इस बात को लेकर हैरानी जताई कि राज्यसभा की जिस राज नारायण समिति को शास्त्री की मौत की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। जबकि संसद बहुत सावधानी से दस्तावेजों को सहेजने के लिए जानी जाती है। संसद में कहा गया हर शब्द रिकॉर्ड और सार्वजनिक दायरे में रखा जाता है, एक ऐसा भारी-भरकम काम है जिसे कार्यालय बिल्कुल सही तरह से कर रहा है। ऐसे में इतना महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कैसे गायब हो गया।
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