जजों का महंगाई भत्ता बढ़ा, वेतन वृद्धि पर मंत्रिमंडल करेगा विचार
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सर्वोच्च न्यायालय समेत देश के 24 उच्च न्यायालयों के जजों का महंगाई भत्ता बढ़ा दिया गया है। कानून मंत्रालय के एक पत्र से यह जानकारी सामने आई है। पत्र के मुताबिक, इन अदालतों के न्यायाधीशों की तनख्वाह बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष लंबित है।
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कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के महासचिवों और उच्च न्यायालयों के महा पंजीयकों को इस फैसले के बारे में एक पत्र लिखा है। पिछले महीने लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि जजों का महंगाई भत्ता एक जुलाई से 139 फीसदी बढ़ा दिया गया है।
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न्यायाधीशों के महंगाई भत्ते में की गई यह बढ़ोतरी छठे वेतन आयोग के सुझावों के आधार पर की गई है। हालांकि सातवें वेतन आयोग का लाभ देने संबंधी दो विधेयक केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने लंबित है। आने वाले दिनों में केंद्रीय मंत्रिमंडल इन विधेयकों पर विचार कर सकता है।
विधेयकों को आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना
विधेयकों को आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को कटौती के बाद हर महीने 1.5 लाख रुपये तनख्वाह मिलती है। भारत के मुख्य न्यायाधीश को इससे ज्यादा वेतन मिलता है जबकि हाईकोर्ट के जजों को कम वेतन मिलता है।
इस राशि में जजों को दिया जाने वाला आवास किराया शामिल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में जजों की मान्य संख्या 31 जबकि देश के 24 उच्च न्यायालयों में इनकी स्वीकृत संख्या 1,079 है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि वेतन में उतनी वृद्धि नहीं की जाएगी जितनी न्यायाधीशों की समिति ने सिफारिश की है।
यदि वेतन वृद्धि हुई तो यह एक जनवरी 2016 से लागू होगी। बता दें कि न्यायाधीशों की समिति ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए 2.8 लाख रुपये वेतन बढ़ोत्तरी जबकि हाईकोर्ट के जजों के लिए ढाई लाख रुपये की वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की है।