केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता चार फीसदी बढ़ा, यस बैंक संकट से निपटने का फॉर्मूला भी तय
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कोरोना वायरस से देश में पैदा हुए हालात के बीच मोदी कैबिनेट ने केंद्रीय कर्मचारियों को खुशखबरी दी है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में चार फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है।
Union Cabinet Sources: Union Cabinet approves 4% increase in Dearness Allowance (DA) for Central Government employees.
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— ANI (@ANI) March 13, 2020
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कैबिनेट बैठक में लिए फैसलों की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 जनवरी, 2020 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की वृद्धि को मंजूरी दी है। यह मूल वेतन/पेंशन का 17 फीसदी अधिक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यस बैंक के पुनर्गठन से जुड़ी योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसबीआई ने यस बैंक 49 फीसदी तक निवेश किया है। इसके साथ ही अन्य निवेशकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। एसबीआई के करीब 26 फीसदी निवेश की लॉक-इन अवधि तीन साल होगी। जबकि दूसरे निवेशकों के 75 फीसदी निवेश राशि की लॉक-इन अवधि तीन वर्ष होगी।
Finance Minister Nirmala Sitharaman on Yes Bank reconstruction: The moratorium will be lifted within 3 days of notifying the scheme. A new board, having at least 2 directors of SBI, will take over within 7 days of the issuance of notification. https://t.co/24yXhLfYZs pic.twitter.com/JA2NjMn9JJ
— ANI (@ANI) March 13, 2020
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि पूंजीगत आवश्यकताओं को तत्काल और बाद में बढ़ाने के लिए अधिकृत पूंजी को 1100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6200 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यस बैंक के पुनर्गठन की योजना को अधिसूचित करने के 3 दिनों के भीतर मौजूदा पाबंदियां हटा दी जाएगी। एक नया बोर्ड बनेगा जिसमें एसबीआई (SBI) के कम से कम 2 निदेशक होंगे, जो अधिसूचना जारी होने के 7 दिनों के भीतर कार्यभार संभाल लेंगे।
निर्यातकों के लिए कर वापसी योजना को मंजूर
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में शुक्रवार को सरकार ने निर्यातकों के लिए कर और शुल्क वापसी की योजना को भी मंजूरी दी है। निर्यात में आ रही गिरावट को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने ट्विटर के माध्यम से बताया कि बिजली दरों पर शुल्क, परिवहन क्षेत्र, कृषि क्षेत्र, निजी उपयोग के लिये बिजली उत्पादन में ईंधन पर मूल्य वर्धित कर (वैट), मंडी कर, स्टांप शुल्क और परिवहन में उपयोग होने वाले ईंधन पर भुगतान किए गए केंद्रीय उत्पाद शुल्क की भरपाई से घरेलू उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
साथ ही यह भी कहा गया कि ये उपाय विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) नियमों के अनुरूप हैं। मंत्रालय ने कहा कि निर्यात उत्पादों पर कर और शुल्कों से राहत (आरओडीटीईपी) को चरणबद्ध तरीके से अधिसूचित किया जाएगा और उन क्षेत्रों एवं उत्पादों में एमईआईएस (भारत की वस्तु निर्यात योजना) के तहत मिल रहे लाभ को वापस लिया जाएगा। बता दें कि वित्त मंत्री ने एक फरवरी को पेश बजट में आरओडीटीईपी योजना की घोषणा की थी।
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विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार बिजली, तेल, पानी पर कर और शिक्षा उपकर जैसे शुल्कों को वापस करने की अनुमति है। विश्व व्यापार संगठन की विवाद समाधान समिति ने एमईआईएस योजना को वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं बताया था।
देश का निर्यात जनवरी में 1.66 प्रतिशत घटकर 25.97 अरब डॉलर रहा। यह लगातर छठा महीना है जब निर्यात कम हुआ है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान निर्यात 1.93 प्रतिशत घटकर 265.26 अरब डॉलर रहा जबकि आयात 8.12 प्रतिशत घटकर 398.53 अरब डॉलर रहा। इससे व्यापार घाटा 133.27 अरब डॉलर रहा।
आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, कोटक और एक्सिस लगाएंगे 3,100 करोड़
संकट में फंसे यस बैंक में आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, कोटक और एक्सिस बैंक कुल 3,100 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। चारों निजी बैंकों ने शुक्रवार को यह एलान करते हुए कहा कि यस बैंक की हिस्सेदारी खरीदकर यह निवेश किया जाएगा।
आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि उसके बोर्ड ने यस बैंक में 1,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दे दी है। यह निवेश 10 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से किया जाएगा। इस प्रकार आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक 100 करोड़ शेयर खरीदेगी। बैंक ने एक नियामकीय फाइलिंग में कहा, ‘इस निवेश के क्रम में यस बैंक में आईसीआईसीआई बैंक हिस्सेदारी 5 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी।’
उधर, गिरवी ऋणदाता कंपनी एचडीएफसी भी पुनर्गठन योजना के तहत यस बैंक में 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक ने 500 करोड़ रुपये और एक्सिस बैंक ने 600 करोड़ रुपये के निवेश का एलान किया है। सभी निजी बैंकों के निवेश पर तीन सील की लॉक-इन अवधि लागू होगी।