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MEA: 'बेहद जटिल स्थिति से निपट रहे, ऊर्जा सुरक्षा प्राथमिकता', प. एशिया संकट पर विदेश मंत्रालय के अहम अपडेट
Sat, 14 Mar 2026 05:36 PM IST
Nirmal Kant
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 14 Mar 2026 05:36 PM IST
सार
पश्चिम एशिया संकट पर एक अंतर मंत्रालयी बैठक के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की प्राथमिकता ऊर्जा की आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय ने क्या-क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच शनिवार को भारत ने सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति और सामान के निर्बाध आवागमन की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा है कि स्थिति बेहद जटिल है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
इस संकट पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत लगातार संवाद और तनाव कम करने की अपील करता रहा है। उन्होंने भारत की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए कहा कि सामान और ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाध जारी रहनी चाहिए और नागरिक ढांचे, खासकर ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं पर हमले से बचना चाहिए।
'माल और ऊर्जा का निर्बाध पारगमन सुनिश्चित करना प्राथमिकता'
प्रवक्ता ने कहा, भारत ने लगातार जोर दिया है कि माल और ऊर्जा के निर्बाध पारगमन को सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकताओं में से एक रहा है। हमने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से बचने का भी आह्वान किया है। हमारा मानना है कि वैश्विक समुदाय के एक बड़े हिस्से की भी यही प्राथमिकताएं हैं। जायसवाल ने कहा, संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। हमने खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्यों, ईरान, अमेरिका और इस्राइल सहित सभी पक्षों से वार्ताकारों के जरिये विभिन्न राजनीतिक और राजनयिक स्तरों पर संपर्क बनाए रखा है, ताकि उनके बातचीत की जा सके और अपनी प्राथमिकताओं पर जोर दिया जा सके, खासकर ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी प्राथमिकता।
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ये भी पढ़ें: आईआरआईएस लावन: भारत ने ईरानी युद्धपोत के 100 से अधिक नाविकों को वापस भेजा, अमेरिका से युद्ध के बीच दी थी पनाह
जायसवाल ने कहा, प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में अपने समकक्षों से बात की है। पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री और हमारे दूतावास भी अपने वार्ताकारों के साथ लगातार संपर्क में रहे हैं। इस प्रक्रिया में जहाजरानी (शिपिंग) कंपनियों जैसे अन्य प्रमुख हितधारकों की चिंताओं को भी संबोधित करना पड़ा है।
फारस की खाड़ी में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने एक ब्रीफिंग के दौरान बताया कि इन टैंकरों के भारत पहुंचने के लिए क्रमशः मुंद्रा और कांडला बंदरगाह निर्धारित किए गए हैं। उनके मुताबिक, शिवालिक के 16 मार्च और नंदा देवी के 17 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, भारत आने वाले कुछ जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहे हैं। दो भारतीय जहाज शिवालिक और नंदा देवी होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं और अब भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। प्रत्येक जहाज में 46 हजार मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भरी हुई है, कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी है। हमारे कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में अपनी जगह पर खड़े हैं। उन्होंने कहा, हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास में सभी संबंधित देशों के साथ संपर्क और तालमेल बनाए रखा है, ताकि उनके लिए सुरक्षित और निर्बाध पारगमन सुनिश्चित किया जा सके।
'आईआरआईएस के कई नाविकों को वापस भेजा'
अधिकारियों ने फंसे हुए ईरानी नागरिकों को वापस भेजने के लिए एक चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की, जिनमें वे ईरानी भी शामिल थे, जो पर्यटक के रूप में भारत आए थे या यहां राजनयिक के रूप में तैनात थे। यह उड़ान कल रात कोच्चि से रवाना हुई। यात्रियों में आईआरआईआईएस लावन के चालक दल के गैर-जरूरी सदस्य भी शामिल थे। यह ईरानी युद्धपोत अभी कोच्चि बंदरगाह पर ठहरा हुआ है।
'ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच नहीं बन रही साझा राय'
प्रवक्ता ने कहा, ब्रिक्स के सदस्य देश पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में सीधे तौर पर शामिल हैं। इससे जारी संघर्ष पर साझा रुख पर आम सहमति बनाने में बाधा आ रही है। ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में हम, शेरपा चैनल के माध्यम से ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच चर्चा को सुगम बना रहे हैं। ब्रिक्स के शेरपाओं की पिछली बैठक 12 मार्च को ऑनलाइन हुई थी। हम एक राय बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अलग-अलग विचारों के कारण यह मुश्किल हो रहा है। जायसवाल ने कहा, हमारा नेतृत्व भी बातचीत में लगा हुआ है। वह ब्रिक्स के सदस्य देशों का साथ जुड़ा हुआ है और हम भी ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ बातचीत जारी रखेंगे, ताकि हम इस संघर्ष पर राय बना सकें।
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विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
इस संकट पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत लगातार संवाद और तनाव कम करने की अपील करता रहा है। उन्होंने भारत की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए कहा कि सामान और ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाध जारी रहनी चाहिए और नागरिक ढांचे, खासकर ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं पर हमले से बचना चाहिए।
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'माल और ऊर्जा का निर्बाध पारगमन सुनिश्चित करना प्राथमिकता'
प्रवक्ता ने कहा, भारत ने लगातार जोर दिया है कि माल और ऊर्जा के निर्बाध पारगमन को सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकताओं में से एक रहा है। हमने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा सहित नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से बचने का भी आह्वान किया है। हमारा मानना है कि वैश्विक समुदाय के एक बड़े हिस्से की भी यही प्राथमिकताएं हैं। जायसवाल ने कहा, संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। हमने खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्यों, ईरान, अमेरिका और इस्राइल सहित सभी पक्षों से वार्ताकारों के जरिये विभिन्न राजनीतिक और राजनयिक स्तरों पर संपर्क बनाए रखा है, ताकि उनके बातचीत की जा सके और अपनी प्राथमिकताओं पर जोर दिया जा सके, खासकर ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी प्राथमिकता।
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ये भी पढ़ें: आईआरआईएस लावन: भारत ने ईरानी युद्धपोत के 100 से अधिक नाविकों को वापस भेजा, अमेरिका से युद्ध के बीच दी थी पनाह
जायसवाल ने कहा, प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में अपने समकक्षों से बात की है। पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री और हमारे दूतावास भी अपने वार्ताकारों के साथ लगातार संपर्क में रहे हैं। इस प्रक्रिया में जहाजरानी (शिपिंग) कंपनियों जैसे अन्य प्रमुख हितधारकों की चिंताओं को भी संबोधित करना पड़ा है।
फारस की खाड़ी में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने एक ब्रीफिंग के दौरान बताया कि इन टैंकरों के भारत पहुंचने के लिए क्रमशः मुंद्रा और कांडला बंदरगाह निर्धारित किए गए हैं। उनके मुताबिक, शिवालिक के 16 मार्च और नंदा देवी के 17 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि इन दोनों जहाजों के सुरक्षित पार होने के बाद अब फारस की खाड़ी में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिनमें कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं। सिन्हा ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि पहले इस क्षेत्र में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में मौजूद थे, जिनमें से दो जहाज सुरक्षित रूप से आगे बढ़ चुके हैं। ये दोनों एलपीजी टैंकर सरकारी कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के स्वामित्व में हैं।
'दो भारतीय टैंकरों ने पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य'विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, भारत आने वाले कुछ जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहे हैं। दो भारतीय जहाज शिवालिक और नंदा देवी होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं और अब भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। प्रत्येक जहाज में 46 हजार मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भरी हुई है, कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी है। हमारे कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में अपनी जगह पर खड़े हैं। उन्होंने कहा, हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास में सभी संबंधित देशों के साथ संपर्क और तालमेल बनाए रखा है, ताकि उनके लिए सुरक्षित और निर्बाध पारगमन सुनिश्चित किया जा सके।
'आईआरआईएस के कई नाविकों को वापस भेजा'
अधिकारियों ने फंसे हुए ईरानी नागरिकों को वापस भेजने के लिए एक चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की, जिनमें वे ईरानी भी शामिल थे, जो पर्यटक के रूप में भारत आए थे या यहां राजनयिक के रूप में तैनात थे। यह उड़ान कल रात कोच्चि से रवाना हुई। यात्रियों में आईआरआईआईएस लावन के चालक दल के गैर-जरूरी सदस्य भी शामिल थे। यह ईरानी युद्धपोत अभी कोच्चि बंदरगाह पर ठहरा हुआ है।
'ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच नहीं बन रही साझा राय'
प्रवक्ता ने कहा, ब्रिक्स के सदस्य देश पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में सीधे तौर पर शामिल हैं। इससे जारी संघर्ष पर साझा रुख पर आम सहमति बनाने में बाधा आ रही है। ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में हम, शेरपा चैनल के माध्यम से ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच चर्चा को सुगम बना रहे हैं। ब्रिक्स के शेरपाओं की पिछली बैठक 12 मार्च को ऑनलाइन हुई थी। हम एक राय बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अलग-अलग विचारों के कारण यह मुश्किल हो रहा है। जायसवाल ने कहा, हमारा नेतृत्व भी बातचीत में लगा हुआ है। वह ब्रिक्स के सदस्य देशों का साथ जुड़ा हुआ है और हम भी ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ बातचीत जारी रखेंगे, ताकि हम इस संघर्ष पर राय बना सकें।