राजस्थान के मदरसे में मुस्लिमों ने लगाए 'बापू' के नारे, पूरा पोखरण हुआ हैरान, ये थी वजह
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मदरसे में नारे लग रहे थे...जब तक सूरज चांद रहेगा, 'बापू' तेरा नाम रहेगा। 'बापू' अमर रहे। हमारे देश के भाईचारे को कोई ताकत नहीं तोड़ सकती। हम पाकिस्तान को बताना चाहते हैं कि वह भारत की तरफ बुरी नजर से न देखे। दरअसल इस मदरसे में गत सप्ताह बीएसएफ की साईकिल रैली पहुंची थी। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर देश के सभी अर्धसैनिक बल अहिंसा, स्वच्छता एवं नशा मुक्ति का संदेश देने के लिए साईकिल रैली निकाल रहे हैं। बीएसएफ की यह रैली सात सितंबर को गुजरात से रवाना हो कर दो अक्तूबर को दिल्ली पहुंचेगी।
बीच में जब यह रैली पोखरण के मदरसा इस्लामिया दारुल उलूम में पहुंची, तो सारा शहर नारों से गूंज उठा। बता दें कि मदरसा इस्लामिया दारुल उलूम की स्थापना सन् 1917 में की गई थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य मुस्लिम समाज के बच्चों को शिक्षित करना था। गोमट निवासी ने अपनी निजी संपत्ति बेच कर इस मदरसे का निर्माण कराया था। मदरसे में मुस्लिम समुदाय ने गर्मजोशी के साथ साईकिल रैली का स्वागत किया। वहां शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे, अध्यापक और प्रबंधन के लोगों ने बापू के समर्थन में नारे लगाने शुरु कर दिए। जैसे ही बीएसएफ का साईकिल दस्ता मदरसे के बाहर पहुंचा, तो वहां हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय उपस्थित था। उन्होंने बीएसएफ के हर जवान और अधिकारी का स्वागत किया।
इसके बाद जब सब लोग मदरसे में प्रवेश करने लगे तो मुस्लिम समुदाय ने जोर-जोर से नारे लगाने शुरु कर दिए। मोहम्मद उमर बाड़मेर, कारी अब्दुल करीम, मोहम्मद गुल्लामुला, मोहम्मद अयूब अजमेर, मुफ्ती जमालुद्दीन, दीन मोहम्मद पोकरण, इस्माइल दीन और मोहम्मद असद पोकरण ने कहा, बापू मानवता के प्रतीक थे। उनके कार्यों को किसी एक देश की सीमा में नहीं रोका जा सकता। महात्मा गांधी ने समस्त मानव जाति के उत्थान का कार्य किया था और वे आजीवन सभी समुदायों की भलाई के लिए काम करते रहे। इनका कहना था कि पाकिस्तान जिनता भी जोर लगा ले, लेकिन वह भारत की एकता और अखंडता को नहीं तोड़ सकता।