Dandi March : 91 वर्ष पूरे होने पर जानिए नमक सत्याग्रह का पूरा इतिहास
- 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से हुई थी नमक सत्याग्रह की शुरुआत
- नमक कानून को तोड़ने पर 70 हजार से ज्यादा लोगों की हुई थी गिरफ्तारी
- 5 मार्च 1931 को गांधी और इरविन के बीच समझौते के बाद खत्म हुआ था आंदोलन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के अहमदाबाद में स्थित साबरमती आश्रम से अमृत महोत्सव की शुरुआत की। यह महोत्सव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह के 91 वर्ष और अगले साल आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मनाया जा रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को दांडी मार्च की शुरुआत की गई थी। यह यात्रा अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से समुद्र तटीय गांव दांडी तक निकाली गई थी। शुरुआती समय में तकरीबन 78 व्यक्तियों ने इस यात्रा में भाग लिया था।
नमक कानून के खिलाफ शुरू हुआ था दांडी सत्याग्रह
इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू नमक कानून के विरुद्ध सविनय कानून को भंग करना था। दरअसल अंग्रेजी शासन में भारतीयों को नमक बनाने का अधिकार नहीं था। उन्हें इंग्लैंड से आने वाला नमक का ही इस्तेमाल करना पड़ता था। इतना ही नहीं, अंग्रेजों ने इस नमक पर कई गुना कर भी लगा दिया था। लेकिन नमक जीवन के लिए आवश्यक वस्तु है इसलिए इस कर को हटाने के लिए गांधी ने यह सत्याग्रह चलाया था।
एक साल तक चला था सत्याग्रह, 80 हजार लोगों को हुई थी जेल
लगभग 25 दिन बाद 6 अप्रैल 1930 को 241 मील की दूरी तय कर यह यात्रा दांडी पहुंची थी। तत्पश्चात गांधी ने कच्छ भूमि में समुद्र तल से एक मुट्ठी नमक उठाकर अंग्रेजी हुकूमत को सशक्त संदेश दिया और नमक कानून को तोड़ा। यह आंदोलन तकरीबन एक साल तक चला। जिसमें 70,000 से भी ज्यादा भारतीयों को गिरफ्तार किया गया था। 1931 में गांधी और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुए समझौते के साथ इस सत्याग्रह को खत्म किया गया। किंतु तब तक चिंगारी भड़क चुकी थी और इसी आंदोलन से ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ की शुरुआत हुई। जिसने संपूर्ण देश में अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में व्यापक जन संघर्ष को जन्म दिया।