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चिंताजनक: इन्सानों तक पहुंच सकता है डेयरी मवेशी का बैक्टीरिया, बीमारियों का जोखिम

Wed, 15 Jan 2025 06:15 AM IST
दीपक कुमार शर्मा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 15 Jan 2025 06:15 AM IST
सार

देश के चर्चित राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने बोवाइन मास्टिटिस बीमारी पर एक रिपोर्ट तैयार की है। यह बीमारी भारत सहित पूरी दुनिया के डेयरी क्षेत्र को हर साल काफी नुकसान पहुंचा रही है। गाय या भैंस में होने वाला यह स्तनदाह रोग डेयरी मवेशियों में सबसे आम बीमारी है जो स्तन ग्रंथि और थन के ऊतकों में सूजन पैदा करती है।

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Dairy Animal bacteria infection and disease threat among human beings know details in hindi
गाय (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

केंद्र सरकार को सौंपी एक रिपोर्ट में भारतीय वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि डेयरी मवेशी में मिलने वाला बैक्टीरिया इन्सानों को भी घातक बीमारी दे सकता है। वैज्ञानिकों ने इस बैक्टीरिया के जीनोम अनुक्रमण में करीब 41 भारतीय वेरिएंट की पहचान की है जिसमें से कुछ ऐसे भी हैं जो जानवरों से इन्सानों में प्रसारित होने की क्षमता रखते हैं।

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देश के चर्चित राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने बोवाइन मास्टिटिस बीमारी पर एक रिपोर्ट तैयार की है। यह बीमारी भारत सहित पूरी दुनिया के डेयरी क्षेत्र को हर साल काफी नुकसान पहुंचा रही है। गाय या भैंस में होने वाला यह स्तनदाह रोग डेयरी मवेशियों में सबसे आम बीमारी है जो स्तन ग्रंथि और थन के ऊतकों में सूजन पैदा करती है। इसकी वजह से दूध की कमी या फिर उसकी गुणवत्ता खराब होने लगती है। पेनिसिलिन इंजेक्शन और सल्फर युक्त दवाओं के जरिये इसका इलाज किया जाता है, लेकिन इस संक्रामक रोग में इन्सानों को भी प्रभावित करने की क्षमता है।
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मवेशियों में बैक्टीरिया के 41 स्ट्रेन मिले
वैज्ञानिकों ने बीमारी के रोगजनक स्टैफिलोकोकस ऑरियस (एस. ऑरियस) नामक बैक्टीरिया की जीनोम विज्ञान के जरिए जांच शुरू की। इस बीच अलग अलग राज्यों में संक्रमित मवेशियों से बैक्टीरिया के कुल 41 भारतीय स्ट्रेन एकत्रित किए गए। एस ऑरियस में पांच क्लोनल कॉम्प्लेक्स के 15 सीक्वेंस का पता चला है जिनमें सीसी 8 और सीसी 97 सबसे ज्यादा प्रचलित हैं और यह दोनों संभावित जूनोटिक ट्रांसमिशन से जुड़े होने के सबूत मिले है। रिपोर्ट में डेयरी मवेशियों और उनके संपर्क में रहने वाले इंसानों की निगरानी बढ़ाने की सिफारिश की है जिसके लिए अगले कुछ सप्ताह में संबंधित राज्यों के साथ एक बैठक होगी।
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बैक्टीरिया एक, 17 सुपरबग साथ में
रिपोर्ट के मुताबिक मवेशियों को संक्रमित करने वाले एस ऑरियस बैक्टीरिया के साथ 17 जोखिम भरे सुपरबग भी प्रसारित हो रहे हैं जो इंसानों के लिए सबसे बड़ा जोखिम हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया में कुल 17 रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) जीन की उपस्थिति खोजी है, जिसमें कई विषाणु कारक संक्रमण पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन जटिलताओं का पता चलने के बाद यह कहना गलत नहीं कि एस ऑरियस के प्रसार की निगरानी बहुत जरूरी है।

प्रति मवेशी 13 हजार तक सालाना नुकसान
एनिमल बायो साइंस में प्रकाशित अध्ययन में अनुमान लगाया है कि बोवाइन मास्टिटिस बीमारी से सालाना प्रति मवेशी करीब 12 से 13 हजार तक का नुकसान होता है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका दूध उत्पादन में हानि है। बीमारी की वजह से स्तन ऊतक क्षति के कारण दूध उत्पादन में करीब 70 फीसदी तक की कमी भी दर्ज की गई है।


इंसानों को क्या जोखिम?
रिपोर्ट के मुताबिक, एस ऑरियस विभिन्न प्रकार के संक्रमण पैदा कर सकता है। यदि यह रक्त प्रवाह या आंतरिक ऊतकों में प्रवेश करे तो गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है। सेप्सिस और निमोनिया जैसे संक्रमण पैदा कर सकता है। यह एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो सकता है, जिससे इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं, इसमें कई ऐसे स्ट्रेन हैं, जिससे बैक्टीरिया का संचरण तेजी से हो सकता है।

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