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नोटबंदी से दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलना हुआ बंद, पलायन की तैयारी में

Tue, 15 Nov 2016 04:17 AM IST
राजीव कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 15 Nov 2016 04:17 AM IST
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daily wage workers get off work
सरकार की तरफ से 1000-500 रुपये के नोटों का चलन बंद करने के बाद दिल्ली व एनसीआर के दिहाड़ी (दैनिक)  मजदूर पलायन की तैयारी में हैं। इन कामगारों की मजबूरी यह है कि अब इन्हें काम मिलना बंद हो गया है और उनके पास 1,000-500 रुपये के रूप में जो पूंजी जमा है, उसे ये कामगार बैंक से भी नहीं बदल पा रहे हैं। एटीएम इनके पास नहीं होता है। थोक बाजार व रियल एस्टेट क्षेत्र में काम बिल्कुल बंद हो गया है, जहां ये कामगार रोजाना के हिसाब से काम करते थे।
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कामगारों को काम मिलना बंद हो गया है
नया बाजार के कारोबारी टिल्लू गुप्ता ने बताया कि सदर बाजार इलाके में स्थित विभिन्न बाजारों के साथ करोल बाग, कश्मीरी गेट जैसे बड़े बाजारों में सैकड़ों की संख्या में दिहाड़ी मजदूर काम करते हैं, जो स्थायी रूप से किसी दुकान में काम नहीं करते हैं, लेकिन उन्हें रोज कोई-न-कोई काम मिल जाता है। गत मंगलवार को नोटबंदी के एलान के बाद सभी बाजारों के कारोबार में नाममात्र का काम रह गया है। पिछले कई दिनों से ये दिहाड़ी मजदूर बाजार तो आ रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई काम नहीं मिल रहा है।
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पहचान पत्र गांव में है

daily wage workers get off work
कुबेर प्रोपर्टी सॉल्यूशनडाटकॉम के प्रोप्राइटर सुनील गुप्ता ने बताया कि पिछले बुधवार से छोटी-बड़ी सभी प्रोपर्टी की साइट पर काम बंद हैं। निर्माण कराने वाले सभी प्रोपर्टी डीलर वेट एंड वाच की स्थिति में है और यह संदेह किया जा रहा है कि अगले छह महीनों तक कोई नया निर्माण नहीं होने जा रहा हैं। उन्होंने बताया कि डीलरों ने निर्माण साइट पर काम करने वाले सभी दिहाड़ी मजदूरों से आगामी मार्च के बाद आने के लिए कह दिया है। 

रोहिणी सेक्टर-24 में मकान निर्माण का काम करने वाले मजदूर रामलोचन ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ निर्माण वाली जगह पर रह रहे थे, लेकिन डीलर ने काम बंद कर दिया है और उन्हें जाने के लिए कह दिया है। अब उनके पास वापस अपने गांव जाने के अलावा कोई चारा नहीं है।

पहचान पत्र गांव में है
खारी बावली में सामान उठाने का काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर सोमबरसा ने बताया कि उनके पास किसी प्रकार का कोई पहचान पत्र नहीं है और अगर है भी तो वह पहचान पत्र उनके गांव में हैं। ऐसे में उनके पास 1,000-500 रुपये के रूप में जो जमा पूंजी है, उसे वह गांव में ही बैंक से बदल सकते हैं। इसलिए वह जल्द ही बिहार के सासाराम स्थित अपने गांव जा रहे हैं।
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