{"_id":"57b8bb664f1c1b8f636ec27d","slug":"dahi-handi-festival-now-shivsena-said-will-not-tolreate-any-hurdle-in-the-hindu-festival","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दही हांडी उत्सव: अब उद्धव ने दी चुनौती कहा- हिंदू त्योहार में बाधा स्वीकार नहीं","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
दही हांडी उत्सव: अब उद्धव ने दी चुनौती कहा- हिंदू त्योहार में बाधा स्वीकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Updated Sun, 21 Aug 2016 01:49 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : PTI
महाराष्ट्र में दही-हांडी उत्सव पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से कुछ प्रतिबंध लगाए जाने के खिलाफ मनसे के सक्रिय होने के बाद शिवसेना ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। शिवसेना ने शनिवार को कहा कि लोग हिंदू उत्सवों के संबंध में इस प्रकार की बाधाएं लगाने के प्रयासों को विफल कर देंगे। शिवसेना हिंदू त्यौहार पर किसी प्रकार का प्रतिबंध स्वीकार नहीं करेगी।
शिवसेना ने मुखपत्र की संपादकीय में कहा है कि गणेशोत्सव, दही-हांडी और नवरात्रि त्योहार सभी हमारी आस्था का विषय हैं। न्यायालयों को कम से कम इस मुद्दे पर लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी चाहिए। जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनी है। यह काम सरकार को करने दीजिए। सरकार यह जानती है कि क्या सही है और क्या गलत है। यदि सरकार को नकारने और लोकतंत्र की हत्या का प्रयास किया जाएगा, तो सभी मोर्चो पर राष्ट्रीय व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। शिवसेना ने कहा कि हिंदुओं के त्योहार और रीति रिवाज परम्परानुसार जारी रहेंगे। लोग इनमें बाधा डालने के प्रयासों को विफल कर देंगे और शिवसेना इसकी अगुवाई करेगी।
शिवसेना ने कहा कि जब अदालतें सरकार का काम करने लगेंगी, तो उन्हें बदनामी सहने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। जिस काम की उम्मीद सरकार से की जाती है अदालतें ऐसे फैसले करने की कोशिश कर रही हैं। शिवसेना ने कहा कि उत्सवों के बारे में अदालतों के इस तरह के फतवों निर्देशों से जनता में गुस्सा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिवसेना ने मुखपत्र की संपादकीय में कहा है कि गणेशोत्सव, दही-हांडी और नवरात्रि त्योहार सभी हमारी आस्था का विषय हैं। न्यायालयों को कम से कम इस मुद्दे पर लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी चाहिए। जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनी है। यह काम सरकार को करने दीजिए। सरकार यह जानती है कि क्या सही है और क्या गलत है। यदि सरकार को नकारने और लोकतंत्र की हत्या का प्रयास किया जाएगा, तो सभी मोर्चो पर राष्ट्रीय व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। शिवसेना ने कहा कि हिंदुओं के त्योहार और रीति रिवाज परम्परानुसार जारी रहेंगे। लोग इनमें बाधा डालने के प्रयासों को विफल कर देंगे और शिवसेना इसकी अगुवाई करेगी।
विज्ञापन
शिवसेना ने कहा कि जब अदालतें सरकार का काम करने लगेंगी, तो उन्हें बदनामी सहने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। जिस काम की उम्मीद सरकार से की जाती है अदालतें ऐसे फैसले करने की कोशिश कर रही हैं। शिवसेना ने कहा कि उत्सवों के बारे में अदालतों के इस तरह के फतवों निर्देशों से जनता में गुस्सा है।
विज्ञापन
शिवसेना की यह टिप्पणी राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के बाद आई हैं
शिवसेना की यह टिप्पणी राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के बाद आई हैं। फडणवीस ने दही हांडी उत्सव मंडल समिति से मुलाकात में शुक्रवार को कहा था कि सभी कोर्ट के आदेश का पालन करें। फडणवीस ने यह भी कहा है कि महाराष्ट्र के महाधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर होने वाली अगली सुनवाई में दही-हांड़ी उत्सव को लेकर सरकार की ओर से पूरी पैरवी की जाएगी।
गौरतलब है कि बीते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दही-हांडी की ऊंचाई 20 फुट से ज्यादा नहीं और मानव पिरामिड बनाने वाले प्रतिभागियों की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से दही-हांडी उत्सव मंडलों में नाराजगी है। उनका मानना है कि परंपरागत त्योहार दही-हांडी के लिए ऊंचाई की सीमा तय करने से इस खेल में रोमांच और साहस समाप्त हो जाएगा।
शिवसेना से पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने इस तर्क को अदालत में जोरदार तरीके से नहीं रखने पर सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि अदालत को केवल हिंदुओं का त्योहार नजर आते है। अदालतों को परंपरा और संस्कृति के मामलों में ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए।
गौरतलब है कि बीते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि दही-हांडी की ऊंचाई 20 फुट से ज्यादा नहीं और मानव पिरामिड बनाने वाले प्रतिभागियों की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से दही-हांडी उत्सव मंडलों में नाराजगी है। उनका मानना है कि परंपरागत त्योहार दही-हांडी के लिए ऊंचाई की सीमा तय करने से इस खेल में रोमांच और साहस समाप्त हो जाएगा।
शिवसेना से पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने इस तर्क को अदालत में जोरदार तरीके से नहीं रखने पर सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि अदालत को केवल हिंदुओं का त्योहार नजर आते है। अदालतों को परंपरा और संस्कृति के मामलों में ज्यादा दखल नहीं देना चाहिए।