Dabholkar Murder Case: एक दशक पहले हुई थी दाभोलकर की हत्या, कल आ सकता है मामले में फैसला
हत्या के मामले की जांच पुणे पुलिस ने शुरू की थी। लेकिन 2014 में इस मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में पुणे की एक विशेष अदालत 10 मई यानी कल अपना फैसला सुना सकती है। करीब 11 साल बाद दाभोलकर के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।
2013 में हुई थी हत्या
दरअसल, 68 साल के दाभोलकर 20 अगस्त 2013 की सुबह सैर पर गए थे। वह पुणे के ओंकारेश्वर पुल पर सुबह की सैर पर निकले थे। तभी मोटरसाइकिल सवार दो लोग आकर रुके और उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी।
भाग गए थे औरंगाबाद
माना जाता है कि दोनों बदमाशों ने पिस्तौल निकाली और उनके सिर पर एक और तीन करीब से गोली मारी। इससे डॉक्टर की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुल पर मौजूद नगर निगम के दो सफाईकर्मियों ने गोलीबारी के बाद दो लोगों को मोटरसाइकिल से भागते हुए देखा था। जांचकर्ताओं का कहना है कि हमलावरों ने मोटरसाइकिल एक तीसरे व्यक्ति को सौंप दी थी, जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। इसके बाद इन लोगों ने एक बस पकड़ी और औरंगाबाद भाग गए, जिसका नाम अब छत्रपति संभाजी नगर हो गया है।
पिछले महीने विशेष लोक अभियोजक सूर्यवंशी ने कहा था, 'आज की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त विशेष सत्र न्यायाधीश ए ए जाधव ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 10 मई की तारीख तय की है।' नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। कल इस मामले में फैसला आने की उम्मीद है। पुणे की एक अदालत इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है।
इन पर आरोप
हत्या के मामले की जांच पुणे पुलिस ने शुरू की थी। लेकिन 2014 में इस मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने इस मामले में वीरेंद्र सिंह तावड़े, सचिन आंदुरे और शरद कालस्कर को गिरफ्तार किया था। तावड़े कथित तौर पर सनातन संस्था से जुड़ा था। जबकि आंदुरे और कालस्कर कथित तौर पर शूटर थे। सीबीआई इन तीनों के अलावा वकील संजीव पुनालेकर और उनके सहायक विक्रम भावे के खिलाफ 2019 में आरोप पत्र दायर किया था।
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी आरोप लगाए थे। तावड़े, आंदुरे और कालस्कर जेल में हैं। जबकि पुनालेकर और भावे जमानत पर बाहर हैं।
कौन थे नरेंद्र दाभोलकर