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Dabholkar Murder Case: एक दशक पहले हुई थी दाभोलकर की हत्या, कल आ सकता है मामले में फैसला

Thu, 09 May 2024 10:44 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 09 May 2024 10:44 AM IST
सार

हत्या के मामले की जांच पुणे पुलिस ने शुरू की थी। लेकिन 2014 में इस मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था। 
 

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Dabholkar Murder Case special court to pronounce judgement on may 10, update news
अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई (सांकेतिक) - फोटो : ANI

विस्तार

सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में पुणे की एक विशेष अदालत 10 मई यानी कल अपना फैसला सुना सकती है। करीब 11 साल बाद दाभोलकर के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।  

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2013 में हुई थी हत्या
दरअसल, 68 साल के दाभोलकर 20 अगस्त 2013 की सुबह सैर पर गए थे। वह पुणे के ओंकारेश्वर पुल पर सुबह की सैर पर निकले थे। तभी मोटरसाइकिल सवार दो लोग आकर रुके और उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। 
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भाग गए थे औरंगाबाद
माना जाता है कि दोनों बदमाशों ने पिस्तौल निकाली और उनके सिर पर एक और तीन करीब से गोली मारी। इससे डॉक्टर की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुल पर मौजूद नगर निगम के दो सफाईकर्मियों ने गोलीबारी के बाद दो लोगों को मोटरसाइकिल से भागते हुए देखा था। जांचकर्ताओं का कहना है कि हमलावरों ने मोटरसाइकिल एक तीसरे व्यक्ति को सौंप दी थी, जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। इसके बाद  इन लोगों ने एक बस पकड़ी और औरंगाबाद भाग गए, जिसका नाम अब छत्रपति संभाजी नगर हो गया है।
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पिछले महीने विशेष लोक अभियोजक सूर्यवंशी ने कहा था, 'आज की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त विशेष सत्र न्यायाधीश ए ए जाधव ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 10 मई की तारीख तय की है।' नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। कल इस मामले में फैसला आने की उम्मीद है। पुणे की एक अदालत इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है।

इन पर आरोप
हत्या के मामले की जांच पुणे पुलिस ने शुरू की थी। लेकिन 2014 में इस मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने इस मामले में वीरेंद्र सिंह तावड़े, सचिन आंदुरे और शरद कालस्कर को गिरफ्तार किया था। तावड़े कथित तौर पर सनातन संस्था से जुड़ा था। जबकि आंदुरे और कालस्कर कथित तौर पर शूटर थे। सीबीआई इन तीनों के अलावा वकील संजीव पुनालेकर और उनके सहायक विक्रम भावे के खिलाफ 2019 में आरोप पत्र दायर किया था। 
 

सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत भी आरोप लगाए थे। तावड़े, आंदुरे और कालस्कर जेल में हैं। जबकि पुनालेकर और भावे जमानत पर बाहर हैं।



कौन थे नरेंद्र दाभोलकर
डॉक्टर नरेन्द्र अच्युत दाभोलकर का जन्म एक नवंबर 1945 में महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में हुआ था। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर बनने की बजाए उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यों में लगाया। साल 1982 से वो अंधविश्वास निर्मूलन आंदोलन में पूरी तरह से जुट गए थे। साल 1989 में उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की। यह संस्था किसी भी तरह के सरकारी अथवा विदेशी सहायता के बिना काम करती है। हालांकि कई कट्टर दक्षिणपंथी संगठन उन्हें हिंदूविरोधी मानते थे। उनकी हत्या के बाद गोविंद पानसरे और कर्नाटक में प्रोफेसर एमएम कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्याएं हुईं थीं।


 

 

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