Cyclone Shakhti: अरब सागर में उठे तूफान का नाम 'शक्ति' क्यों, अभी कैसे हालात, IMD ने क्या कहा? जानें सबकुछ
Cyclone Shakhti: अरब सागर में पोस्ट-मॉनसून सत्र का पहला चक्रवाती तूफान 'शक्ति' गुजरात तट की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों में और तेज होने का अनुमान है।
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अरब सागर में उठे चक्रवात 'शक्ति' ने गुजरात तट के पास अपने पैरों पसार लिए हैं और यह लगातार आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस तूफान को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि चक्रवात 'शक्ति' अगले 24 घंटों में और अधिक प्रचंड रूप ले सकता है और इसे गंभीर साइक्लोनिक तूफान में बदलने की आशंका है।
आईएमडी ने बताया कि शुक्रवार सुबह तक साइक्लोन शक्ति गुजरात के नलिया से लगभग 270 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम, पोरबंदर से 300 किलोमीटर पश्चिम और पाकिस्तान के कराची से 360 किलोमीटर दक्षिण में केंद्रित था। तूफान करीब 8 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। आईएमडी का अनुमान है कि 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है और बहुत तेज बारिश होने की आशंका। शनिवार को इसके चक्रवाती तूफान में बदलने और 5 अक्टूबर तक पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा में मध्य अरब सागर की ओर बढ़ने का अनुमान है।
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चक्रवाती तूफान का नाम कैसे पड़ा 'शक्ति', क्या है नामकरण की प्रक्रिया?
इस चक्रवात का नाम 'शक्ति' रखा गया है। यह नाम श्रीलंका ने दिया है। दरअसल, इस बार साइक्लोन के नामकरण की जिम्मेदारी श्रीलंका की थी। यह प्रक्रिया विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) और एशिया-प्रशांत के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) द्वारा तय की गई प्रणाली के तहत होती है। इस प्रणाली में भारत, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे आठ देश शामिल हैं। वर्ष 2020 में इन देशों ने 169 नामों की एक सूची बनाई थी। इन्हें वर्णमाला के क्रम से दिया जाता है और जब कोई तूफान 65 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक की गति पकड़ लेता है, तभी उसे यह नाम मिलता है। 'शक्ति' इस सूची का पहला नाम है।
मछुआरों के लिए अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के कई जिलों के लिए चक्रवात ‘शक्ति’ को लेकर अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी 7 अक्तूबर तक लागू रहेगी। मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में तेज हवाएं चलने और भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। समुद्र में लहरें बहुत ऊंची उठने की आशंका है, इसलिए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
आईएमडी ने बताया कि विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि उत्तर कोंकण के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को आपदा प्रबंधन प्रणाली सक्रिय करने, तटीय और निचले इलाकों के लोगों के लिए निकासी योजना तैयार रखने, समुद्र यात्रा से बचने की अपील करने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
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हाल के वर्षों में बढ़ा अरब सागर में खतरा
अरब सागर में चक्रवात अपेक्षाकृत कम आते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां तूफानों की रफ्तार बढ़ी है। पिछले कुछ वर्षों में अरब सागर में ताउते (2021) और बिपरजॉय (2023) जैसे तूफान बने थे, लेकिन बंगाल की खाड़ी की तुलना में अरब सागर में कम चक्रवात आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह तूफान तटीय इलाकों तक नहीं पहुंच रहा है, लेकिन इसके लगातार प्रचंड रूप लेने की संभावना को देखते हुए सतर्क रहना आवश्यक है।