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सीवीसी ने भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई की दी थी सलाह, 54 मामले में नहीं हुआ अमल

Tue, 29 Sep 2020 09:37 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 29 Sep 2020 09:37 PM IST
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CVC advised action on corrupt government officials, 54 cases not implemented
केंद्रीय सतर्कता आयोग - फोटो : फाइल फोटो

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी विभागों ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में उसकी सलाह पर अमल नहीं किया।

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केंद्रीय सतर्कता आयोग ने पाया है कि 54 मामलों में सरकारी विभागों ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में उसकी सलाह पर अमल नहीं किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संबंध में भारतीय रेलवे से जुड़े सर्वाधिक 20 मामले हैं।
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इसके अलावा, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (ओबीआईसी), तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) लिमिटेड के तीन-तीन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), आयुष मंत्रालय (केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद या सीआरएएस), भारतीय स्टेट बैंक और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के दो-दो मामले हैं।
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हाल में संपन्न संसद सत्र में पेश और सीवीसी की वेबसाइट पर रविवार को अपलोड वार्षिक रिपोर्ट 2019 में कहा गया है कि ‘आयोग ने पाया है कि वर्ष 2019 के दौरान आयोग की सलाह पर अमल नहीं होने के कुछ मामले आए हैं।'

इनके अलावा नागर विमानन मंत्रालय, विजया बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, सिंडिकेट बैंक, एक्जिस बैंक, स्कूटर इंडिया लिमिटेड, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (इलेक्ट्रिकल मशीन्स लिमिटेड), कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, फर्टिलाइजर्स एण्ड केमिकल्स त्रावनकोर लिमिटेड (एफएसीटी इंजीनियरिंग एंड डिजाइन आर्गेनाइजेशन) और स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से जुड़े एक-एक मामले हैं, जिनमें कार्रवाई की सलाह पर अमल नहीं हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और दिल्ली नगर निगम के भी एक-एक मामले हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘आयोग की सलाह को नहीं स्वीकार करना या आयोग के साथ विचार-विमर्श नहीं करना सतर्कता प्रक्रिया के लिए नुकसानदेह है और सतर्कता प्रशासन की निष्पक्षता को कमजोर करता है।’ सीवीसी ने संबंधित सरकारी विभागों द्वारा भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ उसकी सलाह पर अमल नहीं किए जाने या उल्लंघन के मामलों का ब्योरा दिया है ।

रेलवे के एक मामले में सीवीसी ने कहा है कि 2010 और 2011 के दौरान रेलवे के सार्वजनिक उपक्रम की एक महाप्रबंधक और अंशकालिक मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) ने बढ़ा-चढाकर मेडिकल बिल दिए और अधिकारियों पर उनका भुगतान करने के लिए दबाव बनाया। नवंबर 2016 में आयोग ने तत्कालीन महाप्रबंधक के खिलाफ जुर्माना की कार्रवाई शुरू करने की सलाह दी थी।

भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े एक मामले का विवरण देते हुए सीवीसी ने कहा कि छह सरकारी बैंकों के एक समूह ने तीन कंपनियों के एक समूह को 871.76 करोड़ रुपये की विस्तारित कर्ज की सुविधा प्रदान की। रिपोर्ट में कहा गया कि समूह ने कंपनी द्वारा कोष के स्थानांतरण, मंजूरी की शर्तों का पालन नहीं होने के संबंध में 12 अधिकारियों के बारे में आयोग की सलाह मांगी थी।


आयोग ने दो अधिकारियों के खिलाफ भारी जुर्माना और चार अधिकारियों पर मामूली जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू करने को कहा था और छह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को कहा था।

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