CSS: पदोन्नति में पिछड़े केंद्रीय सचिवालय सेवा के 2014 बैच के अधिकारी, 1000 दिन से ठंडे बस्ते में कैडर रिपोर्ट
केंद्रीय सचिवालय सेवा के 2014 बैच के एएसओ पदोन्नति की राह देख रहे हैं। दस साल की सेवा के बाद भी इन्हें 'एसओ' के पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। नियमानुसार, इन 'एएसओ' को आठ साल में पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। दूसरा बड़ा मुद्दा सीएसएस 'कैडर पुनर्गठन समिति' की रिपोर्ट का है।
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केंद्र सरकार की रीढ़ कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के अधिकारी, पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ते जा रहे हैं। पहले 2013 बैच के सहायक सेक्शन अफसरों (एएसओ) को लंबे संघर्ष के बाद पदोन्नति मिली थी। केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन 'सीएसएस' फोरम' ने अपनी मांगों के लिए कई बार हल्लाबोल किया था। अब केंद्रीय सचिवालय सेवा के 2014 बैच के एएसओ पदोन्नति की राह देख रहे हैं। दस साल की सेवा के बाद भी इन्हें 'एसओ' के पद पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। नियमानुसार, इन 'एएसओ' को आठ साल में पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। दूसरा बड़ा मुद्दा सीएसएस 'कैडर पुनर्गठन समिति' की रिपोर्ट का है।
'सीएसएस' फोरम' के मुताबिक, कैडर रिपोर्ट 1000 दिन से ठंडे बस्ते में पड़ी है। अगर इस रिपोर्ट को डीओपीटी/पीएमओ से हरी झंडी मिल जाए तो सीएसएस कैडर में पदोन्नति की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। तुरंत प्रभाव से सेक्शन अफसर 'एसओ' के लगभग आठ सौ पद सृजित हो सकते हैं। दूसरे पदों पर भी पदोन्नति की राह खुल जाएगी।
'सीएसएस' फोरम' के पदाधिकारियों का कहना है कि 2013 बैच के एएसओ को आसानी से पदोन्नति नहीं मिली। इसके लिए नॉर्थ ब्लॉक, विजय चौक और विभिन्न मंत्रालयों में विरोध प्रदर्शन किया गया था। तब जाकर पदोन्नति दी गई। अब 2014 बैच के एएसओ को परमोशन देने का मामला अटक गया है। इन अधिकारियों की एएसओ के पद पर सेवा के 10 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अभी तक पदोन्नति आदेश जारी नहीं हुआ। ये अधिकारी 'एएसओ', पदोन्नति की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। नियम यह कहता है कि इन्हें आठ साल के सेवाकाल के बाद ही पदोन्नति मिलनी चाहिए थी। लगभग सात-आठ सौ एएसओ, दो वर्ष पहले पदोन्नति के हकदार थे। अब 2015 बैच के 'एएसओ' भी 'एसओ' बनने के लिए पदोन्नति की कतार में हैं। 2014 बैच के कुछ एएसओ को पदोन्नति मिली है, लेकिन वह यूपीएससी के माध्यम से विभागीय परीक्षा पास करने के बाद। पांच साल के बाद इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलता है। अधिकांश एएसओ, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की लाइन में हैं। अभी इन एएसओ की एमएसीपी भी नहीं लगी है। इसके अक्तूबर तक लगने के आसार हैं। इसमें एक वेतन वृद्धि मिलती है।
फोरम के सदस्यों का कहना है कि कैडर रिव्यू रिपोर्ट तीन साल पहले तैयार की गई थी। अब वह फाइल डीओपीटी/पीएमओ के पास है। अगर यह रिपोर्ट लागू हो जाए तो करीब 800 पद, एसओ के मिल जाएंगे। इससे सभी स्तरों पर पदोन्नति का रास्ता खुल जाएगा। सीएसएस कैडर में कुल 13500 अधिकारी कार्यरत हैं। सीएसएस फोरम की मांग है कि सीआरसी की रिपोर्ट को जल्द से जल्द लागू किया जाए। सीआरसी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और उसके कार्यान्वयन में हो रही देरी से सीएसएस अधिकारी, पदोन्नति की राह पर पिछड़ गए हैं। सीएसएस कैडर, अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें समय पर पदोन्नति नहीं दी जा रही।
केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में करीब 2600 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता है। इस बाबत सभी विभागों ने डीओपीटी को यह सूची मुहैया कराई थी। इसमें एएसओ, एसओ, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के पद शामिल हैं। एक तरफ सीएसएस अधिकारियों को तय समय पर पदोन्नति नहीं मिल पा रही है तो दूसरी ओर रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा। सीएसएस फोरम, 'कैडर पुनर्गठन समिति' (सीआरसी) की रिपोर्ट को अविलंब लागू करने की मांग कर रही है।
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में जनशक्ति की आवश्यकता का आकलन करने के लिए अक्टूबर, 2022 में एक कैडर पुनर्गठन समिति बनाई गई थी। गहन विचार-विमर्श के बाद सभी विभागों ने तीन वर्ष पहले ही अपनी आवश्यकताएं समिति को भेज दी थीं। आरटीआई से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीन साल पहले केवल बीस विभागों के लिए ही 2500 से अधिक जनशक्ति की आवश्यकता थी।
यदि सभी विभागों के आंकड़ों पर विचार किया जाए तो यह संख्या बहुत बड़ी होगी। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने सीएसएस कैडर के तहत अतिरिक्त पदों की जरुरत बताई है। ऐसे पदों की संख्या 2600 से अधिक है। इनमें सहायक सेक्शन अफसर, सेक्शन अफसर, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं। जनशक्ति की कमी से विभागों में दक्षता प्रभावित हो रही है। सीएसएस फोरम का कहना है कि दक्षता में कमी, पीएम मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा है।
अंडर सेक्रेटरी को डिप्टी सेक्रेटरी के पद तक पहुंचने में 13 साल लग रहे हैं। मौजूदा समय में लगभग 1000 अंडर सेक्रेटरी ऐसे हैं, जो डिप्टी सेक्रेटरी बनने की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। लंबे समय से इन्हें पदोन्नति का इंतजार है। लगभग 100 डिप्टी सेक्रेटरी ऐसे हैं, जिन्होंने डायरेक्टर बनने के सभी पड़ाव पार कर लिए हैं, मगर ये सभी अधिकारी एक ही पद पर काम करने को मजबूर हैं। डेढ़ वर्ष से कैडर समीक्षा रिपोर्ट लंबित है। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों ने केंद्रीय सचिवालय सेवा के तहत अतिरिक्त पदों की आवश्यकता बताई है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, दो तीन वर्ष पहले तक व्यय विभाग में 18 पदों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। स्किल डेवेलपमेंट मंत्रालय में 172, केंद्रीय गृह मंत्रालय में 460, सांख्यिकी मंत्रालय में 91, जल शक्ति मंत्रालय में 76, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में 95, उच्च शिक्षा विभाग में 125, साइंस एवं टेक्नोलॉजी विभाग में 11, स्वास्थ्य मंत्रालय में 384, खाद्य आपूर्ति मंत्रालय में 41, विधायी विभाग में 5, टेलीकॉम में 230, युवा मामलों के मंत्रालय में 100, नागरिक उड्डयन मंत्रालय में 34, कृषि मंत्रालय में 147, इंटरस्टेट काउंसिल में 5, सामाजिक न्याय विभाग में 81, राजस्व विभाग में 57, जनजातीय मामलों के मंत्रालय में 32, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में 197 पदों की आवश्यकता बताई गई थी। कानूनी मामले विभाग में 107 पदों की जरुरत बताई गई।
रक्षा मंत्रालय में 116 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय में केंद्रीय सचिवालय सेवा के जिन पदों की आवश्यकता बताई गई, उनमें डिप्टी सेक्रेटरी के 20 पद, अंडर सेक्रेटरी के 50, सेक्शन अफसर के 90 और एएसओ के 300 पद शामिल हैं। इसी तरह उच्च शिक्षा विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी के 5 पद, अंडर सेक्रेटरी के 10, सेक्शन अफसर के 20 और एएसओ के 90 पदों की आवश्यकता बताई गई। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के 17, अंडर सेक्रेटरी के 18, एसओ के 12 और एएसओ के 48 पद शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के 24, अंडर सेक्रेटरी के 50, सेक्शन अफसर के 100 और एएसओ के 210 पद शामिल हैं। टेलीकॉम विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी के 4, अंडर सेक्रेटरी के 26, एसओ के 50, एएसओ के 61, एसएसए के 69 और जेएसए के 20 पदों की जरुरत बताई गई।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी से ज्वाइंट सेक्रेटरी के 4, अंडर सेक्रेटरी 7, एसओ के 9, एएसओ के 35 और स्टेनो के 142 पदों की जरुरत है। रक्षा मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के 8, अंडर सेक्रेटरी के 23, एसओ के 32, एएसओ के 38, एसएसए के 5 और जेएसए के 9 अतिरिक्त पदों की आवश्यकता है। सामाजिक न्याय विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी/डायरेक्टर के 7 पद, अंडर सेक्रेटरी के 13, एसओ के 13 और एएसओ के 48 पदों की आवश्यकता थी।
कानूनी मामले विभाग में एएसओ के 75, एसओ के 22, अंडर सेक्रेटरी के 8 और डिप्टी सेक्रेटरी/डायरेक्टर के 2 पद शामिल रहे। जल शक्ति मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के 5, अंडर सेक्रेटरी के 3, एसओ के 18 और एएसओ के 50 अतिरिक्त पदों की डिमांड बताई गई। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के 17, अंडर सेक्रेटरी के 18, एसओ के 12 और एएसओ के 48 पद शामिल हैं। स्किल डेवेलमेंट मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के 9 पद, अंडर सेक्रेटरी के 25, एसओ के 45 और एएसओ के 93 पदों की आवश्यकता बताई गई।