सीएसआईआर प्रयोगशाला ने विकसित की 'फेलुदा' नामक पेपर-आधारित परीक्षण किट
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वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की दिल्ली स्थित प्रयोगशाला 'सीआरआईएसपीआर-कैस इम्युनिटी' के अध्यन पर काम कर रही है। उनके पास इस विशेष फील्ड में काम करने का कोरोना से पहले से ही अनुभव है। सीएसआईआर के महानिदेशक (डीजी) डॉ शेखर मांडे ने इसकी जानकारी दी।
मांडे ने कहा, सीएसआईआर प्रयोगशाला ने फेलुदा नामक एक पेपर-आधारित परीक्षण किट विकसित की है और इसे 'ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया' (डीसीजीए) से औपचारिक स्वीकृति मिली है। उन्होंने बताया कि यह एक अलग तरह की मशीन है।
It's different as RTPCR detects RNA & amplifies it using a polymerase chain reaction that is costly. This paper-based test also detects RNA but by a CRISPR guided system. The paper lights up if there is any virus RNA to show a sample is positive, in 45 minutes: S Mande, DG, CSIR. https://t.co/GhCkTxS5SN
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) September 20, 2020
उन्होंने कहा कि आरटीपीसीआर आरएनए का पता लगाएगा और ये पोलीमरेज चेन रिएक्शन का प्रयोग करते हुए बढ़ता है, जो कि महंगा भी है। यह पेपर-आधारित परीक्षण आरएनए का भी पता लगाता है लेकिन एक सीआरआईएसपीआर निर्देशित प्रणाली द्वारा। अगर कोई वायरस आरएनए का नमूना दिखाने के लिए 45 मिनट में पॉजिटिव है तो पेपर लाइट करता है।