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Manipur: नहीं थम रही मणिपुर में हिंसा की आग; कुकी उग्रवादियों के हमले में सीआरपीएफ के दो जवानों की जान गई

Sat, 27 Apr 2024 07:19 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नारानसेना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नारानसेना Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 27 Apr 2024 07:19 AM IST
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CRPF soldiers attacked by Kuki militants in Manipur
मणिपुर हिंसा को नियंत्रित करते सुरक्षा बल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई (फाइल)

मणिपुर में जारी हिंसा अभी थमती नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव के एक दिन बाद ही यहां कुकी उग्रवादियों ने नारानसेना इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों पर हमला किया है। इस हमले में दो जवानों की मौत की भी खबर है। मणिपुर पुलिस ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कुकी उग्रवादियों ने आधी रात 12.30 बजे सीआरपीएफ के कैंप पर हमला किया और यह 2.15 बजे तक जारी रहा। हमले में मारे गए जवान राज्य के बिष्णुपुर जिले के नारानसेना इलाके में तैनात सीआरपीएफ की 128वीं बटालियन के हैं। 

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मणिपुर पुलिस के मुताबिक, इस घटना में दो और लोग घायल भी हुए हैं। बताया गया है कि उग्रवादियों ने मोइरांग पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नरनसेना में इंडियन रिजर्व बटालियन के कैंप को निशाना बनाया। इस दौरान उग्रवादियों ने पहाड़ की चोटियों से अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस दौरान हमलावरों ने कैंप पर कई बम भी फेंके, जिनमें से एक सीआरपीएफ के आउटपोस्ट के बाहर ही फट गया। 
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हमले में मारे गए मृतकों की पहचान कर ली गई है। इनमें एक सीआरपीएफ के सब-इंस्पेक्टर एन. सरकार हैं। इसके अलावा कॉन्स्टेबल अरूप सैनी की भी जान गई है। वहीं, घायलों में इंस्पेक्टर जादव दास और कांस्टेबल अफताब दास शामिल हैं। उन्हें गोलियों के छर्रे लगे हैं। इस घटना के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की खोज शुरू कर दी है। 
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मणिपुर में लगातार जारी है हिंसा का दौर
पिछले साल तीन मई को मणिपुर में हिंसा का दौर शुरू हुआ था। अभी तक वहां पर 200 से ज्यादा लोगों की जान गई है। सुरक्षाबलों से जुड़े लोगों को भी वहां की हिंसा का शिकार होना पड़ा है। भारी संख्या में लूटे गए हथियारों की पूर्ण वापसी अभी तक नहीं हो सकी है। ज्यादातर लोगों को मणिपुर पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो वहीं असम राइफल को लेकर भी समुदाय विशेष के लोगों में रोष देखा गया है। उपद्रवियों द्वारा आईईडी का डर दिखाकर सुरक्षा बलों के वाहनों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता था। स्थानीय पुलिस पर पक्षपात करने जैसे आरोप लग चुके हैं।

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