CRPF: सीआरपीएफ ने फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस पर तैयार किया मैनुअल अलार्मिंग सिस्टम, कटीली तारों पर टांगीं खाली बोतले
फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' (एफओबी) को सुरक्षित बनाने के लिए कई परतों वाला सिक्योरिटी सिस्टम तैयार किया गया है। कंटीली तार और गहरी खाई सहित तीन लेयर वाली सुरक्षा रहती है। देखने में तो यह सामान्य सा लगता है कि एफओबी की बाहरी लेयर वाली फेंसिंग पर शराब और बीयर की बोतलें टंगी रहती हैं।
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अमर उजाला डॉट कॉम ने इस सप्ताह छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी, जहां से नक्सलियों को खदेड़ने के लिए सबसे बड़ा अभियान 'ब्लैक फोरेस्ट' शुरु किया गया था, के निकट स्थित एफओबी 'गलगम' का जायजा लिया। 'कर्रेगुट्टा' के आसपास सीआरपीएफ ने कई एफओबी स्थापित की हैं। यहीं से सभी तरह के सर्च एवं दूसरे ऑपरेशन लांच होते हैं। एफओबी को देखने पर मालूम चलता है कि सीआरपीएफ कितनी मुश्किलों का सामना करते हुए एफओबी स्थापित करती है। ये एफओबी जंगल और पहाड़ से घिरी है। इस क्षेत्र में जंगली जानवरों का भी आतंक रहता है। रेंगने वाले जीव, मसलन कोबरा प्रजाति के सांप भी पाए जाते हैं।
बेहद ही मददगार है ये सिस्टम
एफओबी को सुरक्षित बनाने के लिए कई परतों वाला सिक्योरिटी सिस्टम तैयार किया गया है। कंटीली तार और गहरी खाई सहित तीन लेयर वाली सुरक्षा रहती है। देखने में तो यह सामान्य सा लगता है कि एफओबी की बाहरी लेयर वाली फेंसिंग पर शराब और बीयर की बोतलें टंगी रहती हैं। इन्हें कुछ दूरी पर लटकाया जाता है। खास बात है कि दो से तीन बोतलों को एक साथ बांधा जाता है। इसके बाद कोई भी जानवर या व्यक्ति फेंसिंग पार करने का प्रयास करता है तो सभी बोतलें तेज आवाज में टकरा जाती हैं। इस आवाज को सुनकर सुरक्षा कर्मी सतर्क हो जाते हैं। वे फेंसिंग के उस हिस्से की तरफ मूव करते हैं, जहां से वह आवाज आई है।
सीआरपीएफ ने इसे 'मैनुअल अलार्मिंग सिस्टम' का नाम दिया है। इस सिस्टम को तैयार करने में खर्च कुछ नहीं होता, जबकि इससे मदद बहुत मिल जाती है। कई बार यह सिस्टम टेस्ट भी हो चुका है। कुछ स्थानों पर लाइट की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण ये सिस्टम बहुत मददगार साबित होता है। इसके अलावा सर्दियों में कोहरे या धुंध के दौरान फेंसिंग के आसपास क्लीयर दिखाई नहीं देता। वहां पर भी यह बोतलों की तकनीक काफी कारगर साबित हुई है। सीआरपीएफ के दूसरे कैंपों पर भी इसी सिस्टम को लगाया गया है। देश के दूसरे केंद्रीय बल जैसे बीएसएफ और एसएसबी में भी यह 'मैनुअल अलार्मिंग सिस्टम' इस्तेमाल किया जाता है।