फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CRPF officers and jawans don't want to become the part of the Cobra commando unit

कोबरा कमांडो यूनिट का हिस्सा बनने से क्यों कतरा रहे जवान, युवा अफसर नहीं मिले तो 48 साल तक बढ़ाई आयु सीमा

Tue, 06 Apr 2021 06:42 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 06 Apr 2021 06:42 PM IST
सार

सीआरपीएफ ने यह बात मानी है कि कोबरा बटालियन के वांछित आयु वर्ग में अफसरों की कमी हो गई है। कोबरा फोर्स ज्वाइन करने की निर्धारित आयु को बढ़ाना पड़ रहा है। पहले कोबरा में आने की तय आयु 30-35 साल होती थी, अब उसे 48 वर्ष तक बढ़ा दिया है...

विज्ञापन
CRPF officers and jawans don't want to become the part of the Cobra commando unit
सीआरपीएफ - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

जंगल युद्ध कला में महारत रखने वाले सीआरपीएफ के 'कोबरा' कमांडो कई तरह के मुकाबले में अमेरिकी मैरीन कमांडोज को भी पीछे छोड़ चुके हैं। जैसे जंगल में 45 किलोमीटर की दूरी तय करने में मरीन कमांडो 18.9 घंटे का समय लेते हैं, जबकि कोबरा कमांडो वह दूरी 15 घंटे में पूरी कर रहे हैं। पहले सीआरपीएफ अफसरों और जवानों में 'कोबरा' इकाई का हिस्सा बनने के लिए होड़ लगी रहती थी। अब उनमें वैसा जोश नहीं है। नए अफसर और जवान, कोबरा में आने से कतराने लगे हैं।

विज्ञापन


कोबरा फोर्स ज्वाइन करने की निर्धारित आयु को बढ़ाना पड़ रहा है। पहले कोबरा में आने की तय आयु 30-35 साल होती थी, अब उसे 48 वर्ष तक बढ़ा दिया है। इससे फोर्स का 'यंग प्रोफाइल' ढांचा बिगड़ रहा है। सीआरपीएफ ने यह बात मानी है कि कोबरा बटालियन के वांछित आयु वर्ग में अफसरों की कमी हो गई है। फोर्स की ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई पदों के लिए यह आयु सीमा बढ़ा दी गई है।

विज्ञापन

कमांडेंट 48 साल तक और टूआईसी 43 साल तक आ सकते हैं

इस इकाई में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पहले 30-35 साल की आयु वाले अधिकारी व जवान कोबरा में आते थे। दो साल पहले डिप्टी कमांडेंट के लिए यह आयु सीमा 35 से बढ़ाकर 38 साल कर दी गई है। सहायक कमांडेंट के लिए आयु सीमा 30 साल से बढ़ाकर 35 वर्ष कर दिया गया। साल 2020 में दोबारा से उक्त निर्णय की समीक्षा करने के बाद सरकार ने रिटायरमेंट की अवधि 57 से बढ़ाकर 60 साल कर दी है, इसलिए सहायक कमांडेंट और डिप्टी कमांडेंट के वांछित आयु वर्ग में अफसर नहीं मिल पा रहे हैं।

इसके बाद भी समस्या का हल नहीं हुआ। नतीजा, कोबरा के लिए सहायक कमांडेंट की आयु सीमा 35 से 40 साल कर दी गई और डिप्टी कमांडेंट की आयु सीमा 38 से 43 साल हो गई। ये भी कहा गया कि यह व्यवस्था तभी तक है, जब तक कोबरा में निर्धारित आयु वर्ग वाले अफसरों का कोरम पूरा न हो जाए। इस साल 12 जनवरी को एक नया आदेश निकला। उसमें कहा गया कि कोबरा में कमांडेंट के पद पर 48 साल से कम आयु वाले अधिकारी की नियुक्ति हो सकती है। पहले यह आयु सीमा 45 साल थी। इसी तरह से कोबरा ज्वाइन करने वाले सेकेंड इन कमांड यानी 'टूआईसी' की आयु सीमा को 40 से 43 वर्ष कर दिया गया।

इस वजह से हुआ कोबरा के प्रति मोह भंग

बता दें कि 2017 के बाद से कोबरा कमांडो इकाई के प्रति अफसरों और जवानों का मोह भंग होने लगा है। पहले कोबरा में जाने के लिए आईजी तक से सिफारिशें आती थीं। तब वहां एक अलग पहचान थी, रिस्क अलाउंस भी ठीक था। चार साल पहले आर1एच1 के तहत यह प्रावधान लागू हुआ कि एक ही इलाके में यदि कोबरा और सामान्य ड्यूटी वाले जवान तैनात हैं तो उन्हें बराबर अलाउंस मिलेगा। उस वक्त कोबरा जवानों को अलग से 'कोबरा अलाउंस' मिलता था। यह सामान्य ड्यूटी देने वाले जवान या अधिकारी के लिए नहीं था। बाद में यह प्रावधान लागू कर दिया गया कि जोखिम वाले इलाके जैसे नक्सल प्रभावित जिले, वहां पर कोबरा और सीआरपीएफ की सामान्य ड्यूटी देने वालों को एक जैसा भत्ता मिलेगा। अफसरों को लगभग 25 हजार तो जवानों को 17 हजार रुपये मिलने लगे। कोबरा जवानों का तर्क है, हमें तो पहले से ही यह भत्ता मिलता रहा है, लेकिन अब वह बंद है।

विज्ञापन

'मार्कोस' अलाउंस की तर्ज पर लागू हो 'कोबरा' अलाउंस

सूत्रों के अनुसार, अधिकारी और जवानों को इसी भत्ते से कोबरा में आने के लिए प्रोत्साहन मिलता था। उन्हें लगता था कि वे एक विशिष्ट फोर्स का हिस्सा हैं। नेवी के मार्कोस कमांडो को जोखिम भत्ते के अलावा मार्कोस भत्ता अलग से मिलता है। सीआरपीएफ में अब कोबरा अलाउंस बंद कर दिया गया है। अब वहां तैनात सभी जवानों और अधिकारियों को रिस्क अलाउंस दिया जाता है। मतलब, कोबरा और सामान्य ड्यूटी वालों में कोई भेद नहीं रहा।

सूत्रों का कहना है कि कोबरा अलाउंस दोबारा से शुरू हो, ताकि अधिकारी और जवान कोबरा में आएं। कोबरा हेडक्वार्टर पर तैनात मिनिस्ट्रियल स्टॉफ को भी फुल अलाउंस मिल रहा है, जबकि उनका ऑपरेशनल ड्यूटी से कोई लेना-देना नहीं होता। वे दूसरे जोखिम वाले इलाकों में भी वह अलाउंस ले रहे हैं, जहां आर1एच1 या आर1एच2 ब्रेकेट्स लागू हैं। अगर कैडर अधिकारियों को संगठित सेवा का लाभ देकर उन्हें खाली रैंक ही दे दें तो वे कम से कम कोबरा जैसे बल में ऑपरेशन को लीड कर सकते हैं। वहां वांछित आयु के अभाव में पद खाली तो नहीं रहेंगे।

केरल के डीजीपी एवं कोबरा के आईजी रह चुके पूर्व आईपीएस डॉ. एनसी अस्थाना कहते हैं, मॉडर्न कॉम्बैट में कई जगह आयु मायने नहीं रखती है। यूएस आर्मी में पचास साल से अधिक आयु के जवान हैं। जब तक शारीरिक क्षमता ठीक है, तो मौका मिलना चाहिए। कोबरा, दुनिया की बेहतरीन फोर्स है। कोई अधिकारी या जवान पैदल चलकर देख ले कि वह उसके काबिल है या नहीं।

यंग प्रोफाइल नहीं है तो मनोबल पर पड़ता है असर

एग्जीक्यूटिव कैडर को अगर यंग प्रोफाइल में नहीं रखेंगे तो उसका असर बल के मनोबल पर पड़ेगा। सीआरपीएफ में डॉक्टरों को चार साल की सेवा पूरी होते ही नई रैंक मिल जाती है। सहायक कमांडेंट को 10-12 साल बाद भी पदोन्नति नहीं मिल रही। मौजूदा समय में सहायक कमांडेंट के पद पर भर्ती हुए अधिकारी मुश्किल से कमांडेंट तक पहुंच पाएंगे। डीआईजी, आईजी या एडीजी के पद पर काम करना तो एक सपना ही रह जाएगा।

वीरता पदक वालों को भी नहीं मिला प्रमोशन

जिन अफसरों की छाती पर बहादुरी के पदकों की भरमार है, उन्हें भी प्रमोशन नहीं मिलता। कई साल पहले सीआरपीएफ की ओर से खुद के मूल्यांकन वाली एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसमें 55 साल की सेवा के बाद कर्मियों को रिटायरमेंट देने की बात कही गई थी। ताकि रिटायरमेंट से बहुत पद खाली होते और वहां नई भर्ती की जा सकती थी। साथ ही जवानों को समय रहते पदोन्नति भी मिल जाती। साथ ही भर्ती की आयु सीमा भी कम की जाए। सामान्य वर्ग के लिए 22 साल और आरक्षित वर्गों के लिए यह आयु सीमा 25 साल कर दी जाए। ताकि वह किसी भी बड़े ऑपरेशनल में जाने के लिए तैयार रहे। वहीं 30 साल उम्र होने से उन पर शादी और परिवार की जिम्मेदारी बढ़ेगी, जिससे वह जोखिम से दूर होने लगता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed