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खबर का असर: वीवीआईपी के घर पर मौखिक आदेश से ड्यूटी नहीं करेंगे सीआरपीएफ जवान, होगी वापसी
सार
मुख्यालय में एक अहम बैठक हुई थी। उसमें यह निर्णय लिया गया है कि मौखिक आदेशों पर कार्यरत सीआरपीएफ जवानों को वापस बुलाया जाएगा। संबंधित 'सीओ' इस कार्यवाही को आगे बढ़ाएंगे।
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- फोटो : facebook
विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के सैंकड़ों जवान, जो महज एक मौखिक आदेश से केंद्रीय मंत्री, दर्जनों पूर्व डीजी/एडीजी के घरों पर वर्षों से कार्यरत हैं, अब उनकी वापसी होगी। अमर उजाला डॉट कॉम ने दो फरवरी को 'जवानों की कमी: सुरक्षा नहीं बल्कि घरेलू कामों के लिए कई वीवीआईपी घरों में मौखिक आदेश पर तैनात हैं सैंकड़ों सीआरपीएफ कर्मी' शीर्षक से खबर छापी थी।
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सूत्रों का कहना है कि इसके बाद बल मुख्यालय में एक अहम बैठक हुई थी। उसमें यह निर्णय लिया गया है कि मौखिक आदेशों पर कार्यरत सीआरपीएफ जवानों को वापस बुलाया जाएगा। संबंधित 'सीओ' इस कार्यवाही को आगे बढ़ाएंगे। वे सुनिश्चित करेंगे कि इस तरह से कार्यरत बल के सभी जवान अपनी मूल बटालियन में लौट आएं। जिन वीवीआईपी के घर पर जवान कार्यरत हैं, उन्हें समझाया जाएगा।
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वीवीआईपी लोगों में पूर्व डिप्टी पीएम का नाम भी शामिल
पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी के घर पर 12 मार्च 2015 को तीन सीआरपीएफ जवान भेजे गए थे। इसके लिए बल मुख्यालय की एस्टेब्लिसमेंट ब्रांच के डीआईजी द्वारा सिग्नल जारी किया गया था। तीन जवानों में सामान्य ड्यूटी वाले सिपाही प्रदीप कुमार, नरेंद्र कुमार और जीडी पंजा शामिल हैं। एक मौजूदा सांसद, जो मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं, उनके घर पर भी तीन जवान लंबे समय से कार्यरत हैं।
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खास बात है कि ये तीनों जवान बिना किसी लिखित आदेश के भेजे गए हैं। इन जवानों के रवानगी आदेश में 'मौखिक' आदेश लिखा है। इन कर्मियों में बी. बालकृष्णनैया, अशोक कुमार और एनएस बेहरा शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अमिताभ राय को आईजीपी एनएस के सिग्नल पर 2015 से एक कर्मी मुहैया कराया गया है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी मौखिक आदेशों से ही एक कर्मी प्रदान किया गया है।
मौखिक आदेशों वाली सूची में डीजी/एसडीजी/एडीजी भी
सीआरपीएफ के पूर्व डीजी आरआर भटनागर को जवान मुहैया कराने के लिए 24 जुलाई 2019 को प्रशासनिक शाखा से आदेश जारी हुआ था। जेएस (डीएम), नॉर्थ ब्लॉक को एक कर्मी, संयुक्त सचिव, पुलिस 'एमएचए' को एक कर्मी और जेएस (पीपी) डिविजन एमएचए को भी एक कर्मी प्रदान किया गया है। इनके लिए एमएचए की तरफ से आदेश जारी हुए थे।
केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को भी एक सीआरपीएफ कर्मी (एमएचए के द्वारा) प्रदान किया गया है। दिवंगत एडीजी जावेद अख्तर के घर पर मौखिक आदेशों से चार कर्मी भेजे गए हैं। ये आदेश 2017, 2018, 2021 व 2017 में दिए गए थे। आरके मिश्रा, पूर्व आईजी के पास एक कर्मी मौखिक आदेश से भेजा गया है। विजय कुमार, आईपीएस आईजी जेकेपी के पास भी मौखिक आदेश से एक कर्मी तैनात किया गया है। प्रकाश मिश्रा, पूर्व डीजी सीआरपीएफ को 2020 से एक कर्मी मौखिक आदेश से प्रदान किया गया है। राजेश प्रताप सिंह, पूर्व एसडीजी सीआरपीएफ को 2020 से एक कर्मी मौखिक आदेश पर मिला है।
नियमों का उल्लंघन करने में बल के पूर्व डीजी भी पीछे नहीं
विक्रम श्रीवास्तव, पूर्व डीजी सीआरपीएफ 2021 से मौखिक आदेश पर सीआरपीएफ जवान को अपने घर पर रखे हैं। एसआईएस अहमद, पूर्व डीजी सीआरपीएफ को 2021 से मौखिक आदेश पर यह सुविधा मिली है। किशोर झा, आईपीएस एडीजीपी रिटायर्ड, को एक कर्मी नई दिल्ली रेंज के सिग्नल द्वारा प्रदान किया गया है।
शशिकांत उपाध्याय डीआईजीपी बीपीआरएंडडी को मौखिक आदेश पर एक कर्मी, प्रवीर रंजन, डीजीपी चंडीगढ़ को मौखिक आदेश पर एक कर्मी, विजय कुमार आईपीएस आईजी जेकेपी को एक कर्मी मौखिक आदेश पर, आरपी सिंह, पूर्व एडीजी को डीआईजी सिग्नल पर एक कर्मी, आरके पचनंदा पूर्व एडीजी को मौखिक आदेश से दो कर्मी, आरपी सिंह, पूर्व एडीजी को मौखिक आदेश से एक कर्मी, ओपी मलिक पूर्व एडीजी को एक कर्मी, अतुल करवाल, पूर्व एडीजी को एक कर्मी मौखिक आदेश से, एमवी कौशल पूर्व डीजी सीआरपीएफ को एक कर्मी मौखिक आदेश से और पंकज कुमार पूर्व एडीजी को एक कर्मी मौखिक आदेश से प्रदान किया गया है।
आदेश मौखिक थे, मगर जानकारी तो सभी को थी
खास बात ये है कि मौखिक आदेश से सीआरपीएफ जवानों को वीवीआईपी घरों में भेजने की जानकारी तो सभी को थी। बल के एक अधिकारी का कहना है कि गत वर्षों में कई ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिनकी पोस्टिंग दूसरे स्टेशन पर होती है, मगर वे 'सियाज' और 'इनोवा' जैसी सरकारी गाड़ियों व ड्राइवर को रिलीव नहीं होने देते।
साल 2020 में सीआरपीएफ में ही ऐसे कई आईपीएस देखने को मिले थे, जिन्होंने अपने परिजनों के लिए सरकारी गाड़ी और ड्राइवर ले रखा था। बल को हर माह लाखों रुपये की चपत लग रही थी। बाद में जब यह मामला उछला तो अधिकारियों के घरों से अतिरिक्त वाहन और कर्मी वापस बुलाए गए थे। कुछ समय बाद दोबारा से वैसा ही देखने को मिला। इस मामले में आईजी 'प्रशासन' अंशुमन यादव का कहना था, ऐसी तैनाती नियमों के अनुसार होती है। बल द्वारा किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया जाता।
आरपीएफ डीजी और ओएसडी के पास भी सीआरपीएफ जवान
- अफसरों की सूची में जेके सिन्हा, पूर्व डीजी को एक कर्मी मौखिक आदेश से प्रदान किया गया है। संजय चंद्रा, आईपीएस डीजी आरपीएफ को एक कर्मी आईजी एनएस सिग्नल से, राजीव कुमार, ओएसडी 'एमओएस' को डीआईजी के सिग्नल पर एक कर्मी, एके सिंह, पूर्व एडीजी रिटायर्ड को मौखिक आदेश से दो कर्मी प्रदान किए गए हैं। सीआरपीएफ के एक अन्य पूर्व डीजी और पूर्व एडीजी को भी मौखिक आदेश से स्टाफ मुहैया कराया गया है।
- इसके अलावा 51 सीआरपीएफ कर्मी ऐसे हैं, जो अपनी पोस्टिंग वाली जगह से किसी दूसरी यूनिट या इकाई में भेजे गए हैं। इन्हें इस तरह की अटैचमेंट ड्यूटी पर गए लंबा समय हो गया है। इनमें से कुछ जवान खेलों के चलते दूसरी जगह अटैच किए गए हैं। कई जवान विभिन्न ब्रांचों या अफसरों के पास हैं। पांचवीं बटालियन में 11 कर्मी अटैच किए गए हैं। 21 पर्सोनल, 55 बटालियन, 70 बटालियन, 122 बटालियन व 194 आरएएफ में भी जवानों की तैनाती हुई है।