Amarnath Yatra: यात्रा के रूट पर CRPF की अचूक किलेबंदी, कैसे आतंकियों का काल बनी '950 मीटर' की थ्योरी
Amarnath Yatra: सीआरपीएफ ने अमरनाथ यात्रा के रूट को सुरक्षित बनाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। यात्रा का पहला जत्था जम्मू से रवाना हो चुका है। बल ने लगभग एक किलोमीटर के अंतराल पर रूट को सैनिटाइज किया है। यानी इतनी दूरी पर सीआरपीएफ का एक मोर्चा रहेगा...
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अमरनाथ यात्रा के रूट पर श्रद्धालुओं को अचूक सुरक्षा प्रदान करने के लिए देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ ने कमर कस ली है। जिन मार्गों से अमरनाथ यात्रा गुजरेगी, वहां की अचूक किलेबंदी कर दी गई है। सीआरपीएफ की 950 मीटर की थ्योरी, आतंकियों को यात्रा रूट के निकट नहीं फटकने देगी। भले ही सरकारी कर्मियों के लिए रोजाना आठ घंटे की ड्यूटी तय होती है, लेकिन सीआरपीएफ के जवान, अमरनाथ यात्रा के दौरान 14 से 16 घंटे तक तैनात रहते हैं। बल के एक अधिकारी ने बताया, यात्रा रूट पर श्रद्धालुओं के काफिले पूरी तरह महफूज रहेंगे। इन्हें बल के वाहन एस्कॉर्ट करेंगे। रास्ते में कोई खतरा न हो, इसके लिए सीआरपीएफ की 'रोड ओपनिंग पार्टी' 24 घंटे गश्त पर रहेगी।
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इतनी दूरी पर रहेगा सीआरपीएफ का एक मोर्चा
सीआरपीएफ ने अमरनाथ यात्रा के रूट को सुरक्षित बनाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। यात्रा का पहला जत्था जम्मू से रवाना हो चुका है। बल ने लगभग एक किलोमीटर के अंतराल पर रूट को सैनिटाइज किया है। यानी इतनी दूरी पर सीआरपीएफ का एक मोर्चा रहेगा। मोर्चों की इतनी कम दूरी इसलिए रखी गई है कि किसी दूसरे मोर्चे पर कोई घटना हो, तो पहले मोर्चे से बिना कोई देरी किए जवान, वहां पहुंच सकते हैं। खास बात है कि जवानों ने खुद ही अपने मोर्चे तैयार किए हैं। यात्रा रूट पर पर्याप्त संख्या में 'आरओपी' तैनात हो चुकी हैं। यात्रियों को फुलप्रूफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए रूट के कुछ हिस्सों पर ड्रोन से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा सीसीटीवी भी लगाए गए हैं।
एक जवान की 14 घंटे तक तैनाती
साल 2017 के दौरान अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं पर हुए आतंकवादी हमले के बाद यात्रा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी गई थी। श्रद्धालुओं के काफिलों को जम्मू बेस कैंप से बालटाल/पहलगाम तक के लगभग 300 किलोमीटर लंबे सफर में सीआरपीएफ एस्कार्ट में लाया जाता है। सुबह से शाम तक इस यात्रा रुट को सुरक्षित बनाए रखने के लिए जवानों को तैनात किया जाता है। ये जवान अल सुबह ही अपने हथियार एवं गोला बारूद व दूसरे उपकरणों को लेकर कैंप से निकलते हैं। 14 घंटे से अधिक समय तक जवानों को अपने साजो-सामान के वजन के साथ खड़े रहना पड़ता है।