आज CRPF का 82वां स्थापना दिवस, जानें इस पुलिस बल का इतिहास और उपलब्धियां

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 27 Jul 2020 08:17 AM IST
CRPF
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आज केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानि कि सीआरपीएफ का 82वां स्थापना दिवस है। यह पुलिस बल भारत संघ का केंद्रीय पुलिस बल है। आज इसके 82वें स्थापना दिवस समारोह पर गृहमंत्री अमित शाह भी शिरकत करेंगे और देश में तैनात सीआरपीएफ जवानों को वीडियो कॉलिंग के जरिए संबोधित भी करेंगे।

यह समारोह लोधी रोड पर स्थित सीआरपीएफ के मुख्यालय में होगा, यहां से नीमच में शहीदों को पुष्पांजलि भी दी जाएगी। ब्रिटिश राज में नीमच में ही 27 जुलाई 1939 को बल की पहली बटालियन की स्थापना की गई थी। उस समय इसे क्राउन रिप्रजेंटेटिव्ज पुलिस (सीआरपी) कहा जाता था।

हालांकि देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय संघ के तहत 1949 में इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कर दिया था। आइए सीआरपीएफ से जुड़ी कुछ खास बातें और इसका इतिहास यहां जानते हैं...
सीआरपीएफ
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आंतरिक सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) भारत संघ का प्रमुख केंद्रीय पुलिस बल है। यह सबसे पुराना केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बल (अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के रूप में जानते हैं) में से एक है जिसे 1939 में क्राउन रिप्रजेंटेटिव पुलिस के रूप में गठित किया गया था।

क्राउन रिप्रजेंटेटिव पुलिस भारत की तत्कालीन रियासतों में आंदोलनों, राजनीतिक अशांति, साम्राज्यिक नीति के रूप में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर स्थापित की गई थी। 1936 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के मद्रास संकल्प को ध्यान में रखकर सीआरपीएफ की स्थापना की गई।

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रियासतों को एक करने में केंद्र की मदद

CRPF Commondos
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1950 से पहले भुज तत्कालीन पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ (पीईपीएसयू) और चंबल के बीहड़ों के सभी इलाकों में अपने काम के लिए सीआरपीएफ के प्रदर्शन की सराहना की गई। भारत संघ में रियासतों के एकीकरण के दौरान बल ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जूनागढ़ की विद्रोही रियासत और गुजरात में कठियावाड़ की छोटी रियासत जिसने भारतीय संघ में शामिल होने के लिए मना कर दिया था, इन दोनों को अनुशासित करने में इस बल ने केंद्र सरकार की काफी मदद की थी।

जवानों की शहादत की याद में पुलिस स्मृति दिवस

CRPF Jawan
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आजादी के तुरंत बाद कच्छ, राजस्थान और सिंध सीमाओं में घुसपैठ और सीमा पार अपराधों की जांच के लिए सीआरपीएफ की टुकड़ियों को भेजा गया। पाकिस्तानी घुसपैठियों की ओर से शुरू किए गए हमलों के बाद सीआरपीएफ के जवानों को जम्मू-कश्मीर की पाकिस्तानी सीमा पर तैनात किया गया।

भारत के हॉट स्प्रिंग (लदाख) पर पहली बार 21 अक्तूबर 1959 को चीनी हमले को सीआरपीएफ के जवानों ने नाकाम किया। पुलिस बल के एक छोटे से गश्ती दल पर चीन ने हमला किया जिसमें बल के दस जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत की याद में देश भर में हर साल 21 अक्तूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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आतंकवादियों से लड़ने श्रीलंका पहुंचे सीआरपीएफ के जवान

सीआपीएफ के जवान
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भारत में अर्द्ध सैनिक बलों के इतिहास में पहली बार महिलाओं की एक टुकड़ी के साथ सीआरपीएफ की 13 कंपनियों को आतंकवादियों से लड़ने के लिए भारतीय शांति सेना के साथ श्रीलंका भेजा गया। संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के एक अंग के रूप में सीआरपीएफ के कर्मियों को हैती, नामीबीया, सोमालिया और मालद्वीप के लिए वहां की कानून और व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए भेजा गया।
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