सीएपीएफ: सीआरपीएफ डीआईजी पात्रा हुए बहाल, जांच रहेगी जारी; गृह मंत्रालय ने लगाई निलंबन वापसी पर मुहर
‘सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल-2026’ को लेकर सोशल मीडिया में विरोध जताने वाले देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के डीआईजी बीसी पात्रा का निलंबन रद्द कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्णय के बाद मंगलवार को सीआरपीएफ मुख्यालय ने डीआईजी पात्रा की बहाली का आदेश जारी कर दिया। हालांकि मामले की जांच जारी रहेगी। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की ‘कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी’ यानी गृह मंत्रालय ने 28 अगस्त को डीआईजी पात्रा का निलंबन वापस लेने का आदेश जारी किया था, लेकिन सीआरपीएफ ने उसे लागू करने में 15 दिन लगा दिए। डीआईजी पात्रा की बहाली से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के हजारों सेवारत और रिटायर्ड कैडर अफसरों ने राहत की सांस ली है।
कैडर अफसरों को जानबूझकर प्रताड़ित
बता दें कि डीआईजी बीसी पात्रा, जिन्हें एनएसजी से वापस आने के बाद त्रिपुरा में तैनात किया गया था, उन्हें जून महीने में सस्पेंड कर दिया गया। सीआरपीएफ द्वारा उनके खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई। तब कई दूसरे कैडर अफसरों का भी तबादला किया गया। अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने आरोप लगाया था कि पात्रा एवं दूसरे कैडर अफसरों को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। वजह, उन्होंने भेदभाव वाले सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026 के खिलाफ आवाज उठाई थी। कल्याण एवं हितों से जुड़े कई केसों में तो कैडर अफसर याचिकाकर्ता भी रहे हैं। हालांकि उस वक्त महानिदेशालय ने उक्त कार्रवाई एवं तबादलों को नियमानुसार बताया था। उसी के आधार पर डीआईजी पात्रा के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की गई। बाकी अफसरों के तबादलों के पीछे प्रशासनिक या परिचालनिक कारण बताया गया।
एसोसिशन ने इन तबादलों पर भी उठाए सवाल
एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने एक प्रेस वार्ता में कहा था कि पात्रा को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। जिन अफसरों ने सीएपीएफ बिल के खिलाफ आवाज उठाई या वे अपने हकों के लिए अदालतों में लड़ाई लड़ रहे हैं, उन्हें प्रताड़ित किया गया है। सीआरपीएफ मुख्यालय का यह कदम असंवैधानिक है। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा था, इससे पहले भी कई सीओ, टूआईसी, डीसी और एसी को कथित प्रशासनिक या परिचालनिक कारणों का हवाला देकर दूरवर्ती क्षेत्रों में भेज दिया गया। डीआईजी पात्रा ने अपने सर्वोच्च कर्तव्यों का निर्वहन किया है। एसोसिएशन ने सीआरपीएफ डीजी से डीआईजी पात्रा का निलंबन रद्द करने का आग्रह किया था।
डीआईजी पात्रा को मिले पदक:
50वीं वर्षगांठ पदक (1997)-प्रशासन
पुलिस स्पेशल ड्यूटी पदक (जम्मू-कश्मीर, 1999)-ऑपरेशन
डीजीपी, जेएंडके पुलिस प्रशंसा पदक (2008)-ऑपरेशन
आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक (त्रिपुरा, 2010) ऑपरेशन
सीआरपीएफ 75वीं वर्षगांठ पदक (2014)-प्रशासन
75 वर्ष स्वतंत्रता पदक (2022)-प्रशासन
केंद्रीय गृह मंत्री का असाधारण आसूचना कुशलता पदक-खुफिया
प्रशंसा डिस्क:
विशेष प्रशंसा डिस्क (रजत)-डीजी सीआरपीएफ (2014)
प्रशंसा डिस्क (कांस्य)-डीजी सीआरपीएफ (2018)
प्रशंसा डिस्क (रजत)-डीजी सीआरपीएफ (2019)
प्रशंसा डिस्क (स्वर्ण)-डीजी सीआरपीएफ (2020)
विशेष प्रशंसा डिस्क (स्वर्ण)-डीजी सीआरपीएफ (2020)
प्रशंसा डिस्क-डीजी, एनएसजी (2024)
प्रशंसा प्रमाण पत्र:
डीजी, सीआरपीएफ-1 (2011)-सर्वश्रेष्ठ बटालियन ट्रॉफी (एलडब्लूई)
आईजी, सीआरपीएफ-1 (2018)
डीजी, एनएसजी-1 (2024)
प्रशंसा पत्र:
डीजी, सीआरपीएफ-4
एडीजी, त्रिपुरा पुलिस-1
आईजी, सीआरपीएफ-15
आईजी, एनएसजी-2 (हिंदी को बढ़ावा देने के लिए)
विशेष परिचालन उपलब्धियां:
131वीं बटालियन के कमांडेंट के रूप में
एलडब्लूई क्षेत्रों की सर्वश्रेष्ठ परिचालन बटालियन ट्रॉफी (2010-11)
बिहार सेक्टर की सर्वश्रेष्ठ परिचालन बटालियन ट्रॉफी (2010-11)