CRPF कर्मी अब डीजी से कर सकेंगे 'मन की बात', सप्ताह में पांच दिन मुख्यालय में होगी मुलाकात
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अभी तक जो व्यवस्था चल रही थी, उसके तहत बटालियन में तैनात किसी जवान को डीजी या उसके समकक्ष अधिकारी से मिलना होता है, तो उसे तीन-चार माह तक इंतजार करना पड़ता है।
बता दें कि के. विजय कुमार जब सीआरपीएफ के डीजी थे, तो उन्होंने ऐसी ही एक व्यवस्था शुरू की थी। वे सीआरपीएफ के दिल्ली मुख्यालय में प्रत्येक गुरुवार को खुद जवानों और अफसरों से मुलाकात करते थे। इसके लिए बल मुख्यालय परिसर में विशेष इंतजाम किया जाता था।
जब किसी कारणवश के. विजय कुमार मुख्यालय में नहीं रहते, तो उनकी जगह दूसरे अफसर जवानों की बात सुनते थे। उनके रिटायर होते ही यह परंपरा खत्म हो गई। अब जवानों और अफसरों को मुख्यालय तक आने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। जैसे बटालियन में तैनात किसी सिपाही को सेक्टर आईजी या मुख्यालय में डीजी एवं उसके समकक्ष किसी अधिकारी से मिलना होता, तो उसे सबसे पहले अपने हवलदार की राय लेनी होती है। इसके बाद उसका आवेदन आगे बढ़ना शुरू होता था।
अपना आवेदन लेकर वह जवान सूबेदार मेजर या इंस्पेक्टर के पास पहुंचता। वहां से मंजूरी मिलने के बाद सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, कमांडेंट और डीआईजी से मंजूरी लेनी पड़ती थी। इन तमाम पड़ाव को पार करने के बाद ही वह अपने आईजी से मुलाकात कर सकता है। यदि उसे डीजी से मिलना होता, तो सेक्टर आईजी की अनुशंसा के साथ-साथ एडीजी की इजाजत भी लेनी होती है।
व्यवहार में देखने को मिलता है कि इन तमाम बाधाओं के चलते अधिकांश जवान अपने आला अधिकारी तक नहीं पहुंच पाते। कुछ केस ऐसे भी रहे हैं, जिनमें जवान अपने अधिकारी से मिलकर कोई बात करना चाहता है, लेकिन वह नहीं मिल पाता।
नतीजतन, यह औपचारिकता उसे गुस्से की ओर ले जाती है। वह जिस जगह पर तैनात है, वहां से कोई अप्रिय समाचार आ जाता है। जैसे, फलां जवान और अफसर के बीच कहासुनी हो गई। किसी ने अपने साथियों पर गोली चला दी।
इस तरह कर सकेंगे मुलाकात
सीआरपीएफ मुख्यालय ने अपने आदेश में कहा है कि अब सप्ताह में सोमवार से लेकर शुक्रवार तक कोई भी जवान और अफसर डीजी या आईजी से मिल सकता है। इसके लिए उसे अपने कमांडेंट या प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन देना होगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद वह बल मुख्यालय आ सकता है। यहां उसे पर्स विभाग में आवेदन जमा कराना होगा। यह काम दोपहर एक बजे से पहले हो जाना चाहिए।
वहीं अगर कोई कर्मी एक बजे के बाद वहां पहुंचता है तो उस दिन उसकी मुलाकात संभव नहीं होगी। इसके लिए उसे अगले दिन इंतजार करना होगा। प्रतिदिन मुलाकात का समय दोपहर साढ़े 12 बजे से लेकर डेढ़ बजे तक रखा गया है। बता दें कि कई वर्ष पहले डॉ. एके महेश्वरी जब सीआरपीएफ में आईजी थे, तो उन्होंने इसी तरह की कई योजनाएं बनाई थी।
वहीं अब वे डीजी बन चुके हैं तो उनके लिए अपने जवानों और अफसरों के कल्याणार्थ योजनाओं को लागू करना आसान हो गया है। पिछले दिनों एक प्रेसवार्ता में डीजी ने कहा था कि सीआरपीएफ एक बड़ा परिवार है। यहां सबको मिलकर रहना है। कोई भी जवान अपनी बात सीनियर के समक्ष रख सकता है। हमारा प्रयास रहेगा कि जवानों और अफसरों को कोई दिक्कत न हो। जब वे खुश रहेंगे, तभी यह बल अपनी ड्यूटी को अच्छे से पूरा कर सकता है।