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CRPF DAY 2024: जब सीआरपीएफ जांबाजों ने चीन-पाकिस्तान को दिया था करारा जवाब, नापाक मंसूबों को किया धराशायी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 19 Mar 2024 01:43 PM IST
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सार
मंगलवार को देश के विभिन्न हिस्सों में 'सीआरपीएफ डे' आयोजित किया गया। इस बल के जांबाजों ने 21 अक्तूबर, 1959 को हॉट स्प्रिंग (लद्दाख) में हुए चीनी हमले का जवाब दिया, तो दूसरी तरफ वर्ष 1965 में कच्छ के रण में सरहद पर पाकिस्तान के नापाक मनसूबों को धराशाही कर दिया था। सीआरपीएफ की चार कंपनियों ने पाकिस्तान की 51वीं इंफ्रेंटी ब्रिगेड को पीछे धकेल दिया था...
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CRPF DAY 2024: When CRPF jawans gave a strong reply to China-Pakistan on eastern and northern border
CRPF DAY 2024 - फोटो : Amar Ujala/ Rahul Bisht

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के जांबाजों की वीरता की गाथा न केवल भारत में, बल्कि दो मुल्कों की सेना में भी बताई जाती है। सीआरपीएफ की स्थापना के दिन से ही इसका इतिहास वीरता भरे कारनामों और शौर्य गाथाओं से भरा हुआ है। बल के पूर्व अफसरों का कहना है कि इस केंद्रीय अर्धसैनिक बल ने केवल देश की आंतरिक सुरक्षा को ही मजबूत नहीं किया है, बल्कि दो पड़ोसी राष्ट्रों की सेना को भी मुंहतोड़ जवाब दिया है। पाकिस्तान और चीन को दो अलग-अलग मोर्चों पर टक्कर देकर इस बल ने अपनी बहादुरी का परचम लहराया है।

पाकिस्तान के डेजर्ट हॉक ऑपरेशन को किया फेल

मंगलवार को देश के विभिन्न हिस्सों में 'सीआरपीएफ डे' आयोजित किया गया। इस बल के जांबाजों ने 21 अक्तूबर, 1959 को हॉट स्प्रिंग (लद्दाख) में हुए चीनी हमले का जवाब दिया, तो दूसरी तरफ वर्ष 1965 में कच्छ के रण में सरहद पर पाकिस्तान के नापाक मनसूबों को धराशाही कर दिया था। सीआरपीएफ की चार कंपनियों ने पाकिस्तान की 51वीं इंफ्रेंटी ब्रिगेड को पीछे धकेल दिया था। उस वक्त पाकिस्तान ने डेजर्ट हॉक ऑपरेशन के जरिए भारतीय भू-भाग पर कब्जा करने की बड़ी योजना बनाई थी। देश की आजादी से पहले 1939 में इस बल की स्थापना से लेकर अब तक अनेक बड़े अभियानों, जिनमें नक्सल और आतंकी ऑपरेशन शामिल हैं, में भाग लेकर अत्यंत सराहनीय कार्य किया है।

बल को जोखिम भरे कार्य सौंपे जाते रहे हैं

सीआरपीएफ के पूर्व आईजी वीपीएस पवार के मुताबिक, इस बल ने सदैव दो कदम आगे बढ़ कर अपनी ड्यूटी को अंजाम दिया है। प्रारंभ से ही इस बल को जोखिम भरे कार्य सौंपे जाते रहे हैं। भारत-तिब्बत सीमा पर अक्साई चिन के निकट सीआरपीएफ को तैनात किया गया। 1953 के बाद लेह (लद्दाख) और इसकी सीमांत चेक पोस्टों पर भी इस बल के जवान लगाए गए। अक्साई चिन क्षेत्र के दुर्गम इलाकों, सुनसान बंजर पहाड़ियों, शरीर को चोट पहुंचाने वाली बर्फीली हवाएं आदि, सीआरपीएफ जवानों को मातृभूमि की रक्षा करने की राह से अलग नहीं कर पाईं। 21 अक्तूबर, 1959 को हॉट स्प्रिंग (लद्दाख) में चीनी हमला हुआ था। इस बल के छोटे से गश्ती दल को वहां पहले से भारी संख्या में मौजूद चीनी फौज ने घेर लिया। हालांकि धोखे से भरे इस हमले में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हो गए थे, लेकिन उन्होंने चीनी फौज का जिस बहादुरी से मुकाबला किया, वह इतिहास में दर्ज हो गया। उन जवानों की शहादत को देश में प्रत्येक वर्ष 21 अक्तूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

दर्जनभर जवानों को चीनी फौज ने पकड़ लिया

सितंबर 1959 में हॉट स्प्रिंग (लेह में चीनी सैनिकों के कब्जे से मुक्त कराई गई भारतीय चौकी) के आसपास भारी संख्या में चीनी सैनिक जमा थे। इस सूचना के बाद सीआरपीएफ जवानों को आदेश मिला कि किसी भी तरह से भारतीय चौकी को चीन के कब्जे से मुक्त कराया जाए। इसके लिए 70 जवानों की दो टुकड़ियां बनाई गई। एक का नेतृत्व आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह और दूसरी टुकड़ी की जिम्मेदारी एसपी त्यागी को दी गई थी। बहादुर सैनिकों ने चौकी को चीनी कब्जे से मुक्त करा लिया, लेकिन उसके बाद दर्जनभर जवानों को चीनी फौज ने पकड़ लिया। बाद में उन्हें चुशुल एयरपोर्ट के निकट छोड़ दिया गया। बेस कैंप पर पहुंचने के बाद मालूम हुआ कि आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह की टुकड़ी के सात जवान जवान गायब हो गए हैं। उन्हें तलाश करने के लिए जवान निकल पड़े। इस बीच चीनी सैनिकों ने उन्हें बीच रास्ते में घेर लिया। उस लड़ाई में बल के दस जवान शहीद हो गए थे। बर्फ में सीआरपीएफ जवानों के हथियार जाम हो गए थे, इसके बावजूद उन्होंने चीनी फौज का डट कर मुकाबला किया।

पाकिस्तान की चार कंपनियों ने दिया था करारा जवाब

1965 में इस बल की छोटी सी टुकड़ी ने पाकिस्तान की एक पूरी इन्फेंट्री को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। पाकिस्तान ने जमीन कब्जाने के लिए गुजरात स्थित कच्छ के रण में 'टाक' और 'सरदार पोस्ट' पर हमला किया था। सीआरपीएफ की दो बटालियन की चार कंपनियों को वहां भेजा गया। एक तरफ सीआरपीएफ की चार कंपनियां और दूसरी तरफ तोपखाने एवं बड़े हथियारों के साथ पाकिस्तानी सेना की 51वीं ब्रिगेड खड़ी थी। इसमें करीब 3500 सैनिक थे। पाकिस्तान ने 14 घंटे में तीन बार हमले का प्रयास किया था। हर बार सीआरपीएफ के बहादुरों ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। इस लड़ाई में पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए, जिनमें दो अफसर भी शामिल थे। चार सैनिकों को जिंदा पकड़ लिया गया।

जब शांत हो गई थी भावना राम की एमएमजी

पाकिस्तानी सेना की 51वीं ब्रिगेड को सबक सिखाते हुए सीआरपीएफ के छह जवानों ने अपनी शहादत दी थी। बल के अदम्य शौर्य और रण कौशल के चलते हर साल 9 अप्रैल को देश में शौर्य दिवस मनाया जाता है। सरदार पोस्ट के पूर्वी छोर पर हवलदार भावना राम की एमएमजी शांत हो गई थी। दुश्मन सामने था और उसे रोकना जरूरी था। उन्होंने आसपास पड़े ग्रेनेड इकट्ठे कर लिए। जैसे ही पाकिस्तानी फौज आगे बढ़ने लगी, उस पर हैंड ग्रेनेड की बरसात कर दी गई। हवलदार का बहादुरी भरा ये कारनामा घुसपैठियों के मनोबल को हतोत्साहित करने के लिए काफी था। जब तक पीछे से उनके साथी वहां पहुंचते, उसने पाकिस्तानी सेना को अपनी पोस्ट के निकट नहीं आने दिया।

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