CRPF: आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसे कमांडेंट का जलवा, 4 जूनियर अफसरों की एपीएआर में की थी प्रतिकूल टिप्पणी
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विस्तार
लखनऊ स्थित सीआरपीएफ की 93वीं बटालियन के कमांडेंट नीरज पांडे पर सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। अब कमांडेंट से जुड़े अनेक तथ्य सामने आ रहे हैं। उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर कई जगह चल अचल संपत्तियां मिली हैं। कमांडेंट के सीनियर रहे एक अधिकारी ने बताया, नीरज पांडे के खिलाफ पहले भी शिकायतें मिलती रही हैं। हालांकि उनके खिलाफ अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी थी। ऐसा नहीं है कि सीआरपीएफ मुख्यालय में मौजूद शीर्ष नेतृत्व इससे अनभिज्ञ था। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो तत्कालीन आईजी 'पर्स' एवं विजिलेंस वितुल कुमार की ओर से सीबीआई को शिकायत दी गई। दर्जनों आरोपों के बीच कमांडेंट नीरज पांडे ने 2021-2022 के दौरान एक डिप्टी कमांडेंट और तीन सहायक कमांडेंट की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) पर प्रतिकूल टिप्पणियां कर दी थी। उनका करियर खराब करने का प्रयास हुआ।
कई शहरों में हैं कमांडेंट की संपत्तियां
सीबीआई ने सीआरपीएफ कमांडेंट नीरज पांडे के खिलाफ 16 मार्च को आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। एफआईआर में कमांडेंट की जो संपत्ति दिखाई गई है, वह उनके लीगल संसाधनों से होने वाली आय के मुकाबले लगभग सौ फीसदी ज्यादा है। सीबीआई ने इस मामले में लखनऊ के अलावा दूसरी जगह पर भी रेड की थी। लखनऊ, नोएडा और वाराणसी के अलावा कई दूसरे शहरों में भी संपत्तियां होने की बात कही गई है। सीआरपीएफ आईजी की शिकायत में बताया गया है कि यह मामला 2014 से 2022 के बीच अर्जित संपत्तियों को लेकर है। उनके परिवार के अलग-अलग बैंक खातों में भी बड़ी रकम जमा है। आरोपी अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित कंपनियों के खातों में भी लेन-देन का पता चला है। गाजियाबाद के शक्ति खंड एवं ज्ञान खंड, इंदिरापुरम के अलावा वाराणसी, मीरापुर और नोएडा में चल अचल संपत्तियां बताई गई हैं।
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बल से तीन जवानों की ड्यूटी नोएडा में थी!
नोएडा की जो संपत्ति है, वह चार मंजिला एक व्यावसायिक प्रॉपर्टी है। हालांकि सीधे तौर पर किसी दस्तावेज में इसका जिक्र नहीं है। इसकी कीमत करोड़ों रुपये बताई गई है। आरोप है कि कमांडेंट ने बल के तीन जवानों को बहुमंजिला इमारतों के निर्माण कार्य पर तैनात कर रखा था। इस कथित तैनाती पर विजय दहिया, प्रेम चंद्र गौतम और प्रदीप कुमार भट्ट का नाम सामने आया है। फाइलों में भले ही इन जवानों की तैनाती लखनऊ मुख्यालय पर थी, लेकिन हकीकत में ये जवान अधिकांश समय नोएडा में रहते थे। बल के शीर्ष नेतृत्व के पास इस तरह की शिकायतें पहुंचती रही हैं। कल्पतरू एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी सामने आया है। इसके शेयर होल्डर और निदेशकों में कमांडेंट के परिवार के सदस्यों के नाम शामिल हैं। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत बेटी दिव्या पांडे और पत्नी सुमन पांडे को कंपनी का निदेशक बताया गया है। दिव्या पांडे भी कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के तहत पंजीकृत हैं।
इन चार अफसरों के करियर पर लगाया सवालिया निशान
कमांडेंट ने 93वीं बटालियन के डीसी अरुण कुमार सिंह, सहायक कमांडेंट अजय कुमार, अशोक कुमार सिंह और उपेंद्र कुमार सिंह की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) को खराब करने का प्रयास किया। बाद में यह मामला बल मुख्यालय तक पहुंचा था। इस बाबत संबंधित अधिकारी और जूनियर अफसरों से उनका पक्ष जाना गया था। सूत्रों ने बताया कि जूनियर अधिकारी कथित भ्रष्टाचार के मामलों में कमांडेंट का साथ नहीं दे रहे थे, इसलिए उनकी एपीएआर में प्रतिकूल टिप्पणियां कर दी गई। उक्त कमांडेंट जब 133वीं बटालियन में थे, तो वहां पर लाखों रुपये के पांच पीएफ हट गायब होने का मामला सामने आया था। उसकी जांच चल रही है। मुंडेरा मंडी में लाखों रुपये के टेंडर में अनियमित्ताएं बरतने की बात सामने आई। मुख्यालय के सूत्र बताते हैं कि इस मामले में अफसरों की मिलीभगत से स्पलिट टेंडर उठते थे। वजह, मामले को डीआईजी की परचेज पॉवर के तहत निपटाना था। कई टेंडर ऐसे भी पास हुए हैं, जिनमें सप्लायर को उसके हिस्से का पैसा दे कर बाकी का सारा काम जवानों से कराया जाता था। निर्माण कार्य में दूसरे कई तरीके से अनियमित्तताएं होने के आरोप लगे हैं।
विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूत्र बताते हैं कि मुंडेरा मंडी और आशियाना में जितना भी कार्य हुआ है, अगर उसकी जांच होती है तो कई बातों से पर्दा उठ सकता है। चूंकि 93वीं बटालियन के पास हाई कोर्ट की सुरक्षा भी है, ऐसे में वहां लाखों रुपये का सामान खरीदा गया है। कुछ ऐसा सामान भी बताया गया है, जिसकी खरीद और जमीन पर उसकी मौजूदगी, इन दोनों बातों में पटरी नहीं बैठती। मैस के लाभ को लेकर भी कुछ सवाल उठे हैं। कमांडेंट का 1,500 रुपये का रिवार्ड, खास लोगों को दिया गया। सूत्रों ने बताया कि कथित तौर पर उन कार्मिकों से कैश में पैसा वापस लिया जाता था, जिन्हें रिवार्ड मिलता था। वह पैसा घूम कर किसी के पास चला जाता था। जम्मू में तैनाती के दौरान भी एक घोटाला सामने आया था। वहां एक शिकायत करने वाले निरीक्षक को पागल घोषित करने का प्रयास हुआ। वह निरीक्षक अभी यूपी की एक बटालियन में तैनात है। लाइन कमेटी रिपोर्ट के तहत सामान की खरीद नहीं होने पर सवाल उठे हैं। बटालियन का पुराना सामान, जिन्हें कंडम घोषित किया गया है, उसका उपयोग मरम्मत में किया गया, जबकि बिल नए सामान का लगा दिया गया। 2021 में एल्यूमिनियम स्लाइडर की खरीददारी को लेकर भी सवाल उठे थे।
अभी तक रिलीव नहीं हुए कमांडेंट
सीबीआई की रेड के बाद उक्त कमांडेंट का तबादला सीआईएटी चित्तूर कर दिया गया था। उसके बाद पांडे ने निजी अस्पताल से कुछ दिनों का बेड रेस्ट ले लिया। कहा, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। खास बात ये है कि इलाहबाद में सीआरपीएफ का कंपोजिट अस्पताल है, रामपुर में भी है, लेकिन कमांडेंट ने वहां के डाक्टर को नहीं दिखाया। वे लखनऊ के चंदन अस्पताल में पहुंच गए। चूंकि उनका तबादला हो चुका था, इसलिए उन्हें रिलीव करने के आदेश जारी हो गए। बाकी अधिकारी, किसी सरकारी डॉक्टर या बल के अस्पताल से अपने स्वास्थ्य की जांच कराते हैं। 20 मार्च से उन्हें 93वीं बटालियन की स्ट्रेंथ से आउट कर दिया गया है। कमांडेंट का चार्ज टूआईसी देवेंद्र पाल सिंह के पास रहेगा। जैसे ही नीरज पांडे ठीक होंगे, तो वह चार्ज हैंडओवर करेंगे। सूत्रों का कहना है कि इससे जांच कार्य प्रभावित हो सकता है।