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CRPF: मणिपुर में उपद्रवियों से लड़ रहा सहायक कमांडेंट, उधर बिहार में अकेले मां-बाप के साथ हो रही लूटपाट
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विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की 99 आरएएफ बटालियन के सहायक कमांडेंट शशांक शेखर, मौजूदा समय में मणिपुर में तैनात हैं। एक तरफ बेटा उपद्रवियों से लड़ रहा है तो दूसरी ओर बिहार के मुजफ्फरपुर में अकेले रह रहे उनके मां बाप के साथ लूटपाट की वारदात होती है। महज 90 दिन में दो बार बदमाश उनके घर में घुस जाते हैं। इस घटना को लेकर बल के युवा अफसरों में रोष है।
उनका कहना है कि जून में शशांक शेखर के घर पर ऐसी ही घटना हुई थी। उसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि उस मामले में कुछ खास नहीं हुआ। अब तीन अगस्त को दोबारा से लूटपाट हो गई। सहायक कमांडेंट की मां, घर पर अकेली थी। उसके हाथ पैर बांधकर लूट को अंजाम दिया गया। इस तरह की घटनाओं के बीच उनका बेटा, देश सेवा में तैनात है। शशांक के साथी अफसरों का कहना है कि अगर बिहार पुलिस त्वरित और गहराई से मामले की जांच करती तो अब दोबारा से लूट की वारदात नहीं होती।
मोबाइल फोन ले गए और दो राउंड फायर किए
बता दें कि 3 सितंबर को 'सीआरपीएफ' की 99 आरएएफ बटालियन के सहायक कमांडेंट शशांक शेखर के मां बाप बिहार के मुजफ्फरपुर के आनंद नगर मोहल्ले 'गोबरसही' में रहते हैं। दोपहर के वक्त चार लुटेरे घर में घुसे। उस वक्त सहायक कमांडेंट की मां घर पर अकेली थी। हथियारबंद लुटेरों ने उन्हें पकड़ लिया। उनके मुंह पर कपड़ा बांधा गया। शशांक की मां के हाथ पैर भी बांध दिए गए।
लुटेरों ने उन्हें धमकी देकर पूछा कि कीमती सामान कहां पर रखा है। तभी उनके पड़ोसी को लुटेरों की भनक लग गई। उन्होंने शोर मचा दिया। वहां पर कुछ दूसरे लोग भी पहुंच गए। लोगों की संख्या बढ़ती देख लुटेरे वहां से भाग निकले। हालांकि उन्होंने जाते समय मोबाइल फोन उठा लिया और दो राउंड फायर किए। पुलिस को इस घटना की सीसीटीवी फुटेज मुहैया कराई गई है।
शशांक ने इस बाबत जिले के अफसरों से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। अपराधियों का हौसला इतना बुलंद था कि वे दोपहर के समय लूटपाट के लिए पहुंच गए। इससे पहले जून में भी उनके घर से लुटेरों ने सोने चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया था।
डीएम/एसएसपी को भेजा है व्यक्तिगत संदेश
सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट शशांक ने जून में भी पुलिस अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया था। उस वक्त वे आरएएफ हैदराबाद में तैनात थे। तब भी पांच छह जून की रात को उनके घर पर चोरों ने धावा बोला था। उस वक्त घर पर कोई नहीं था। शशांक के मां बाप उसके पास हैदराबाद आए हुए थे। तब भी पुलिस को घटना की सीसीटीवी फुटेज मुहैया कराई गई थी। सीआरपीएफ के कैडर अफसरों का कहना है कि इस तरह से कोई अधिकारी, देश सेवा कैसे कर पाएगा। किसी तरह की ठोस कार्रवाई न होते देख सहायक कमांडेंट ने जिले के डीएम/एसएसपी को व्यक्तिगत संदेश भेजा है। उसमें इस बात का जिक्र है कि पूर्व की हुई घटना को लेकर सही से पुलिस एक्शन न होने की वजह से अब ये सब हुआ है। यह बिहार पुलिस और प्रशासन की उदासीनता को प्रदर्शित करता है। जब केंद्रीय अर्धसैनिक बल के अधिकारी के साथ ऐसा हो रहा है तो आम जन, बिहार में सुरक्षा की क्या उम्मीद रख पाएगा।