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CRPF: सील व हस्ताक्षर वाली क्लासीफाइड जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाता था ASI, हुए कई चौंकाने वाले खुलासे
सार
केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' ने जासूसी मामले में अपने एएसआई मोतीराम जाट को बर्खास्त कर दिया है। सीआरपीएफ नियमों के साथ भारत के संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोपी को 21 मई से बर्खास्त किया गया है।
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सीआरपीएफ
- फोटो : ANI
विस्तार
सीआरपीएफ का सहायक उप निरीक्षक, मोती राम जाट, फिलहाल 6 जून तक एनआईए की हिरासत में है। एनआईए द्वारा आरोपी से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी के मुताबिक, मोती राम, सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील क्लासीफाइड इन्फोर्मेशन, पाकिस्तान पहुंचाता था। पाकिस्तान के खुफिया अधिकारी (पीआईओ), उस वक्त मोती राम को ज्यादा पैसा देते थे, अगर राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित वर्गीकृत जानकारी वाले दस्तावेज पर सील व हस्ताक्षर होते थे। इसके अलावा, फोटो/वीडियो के ज्यादा दाम मिलते थे।
बता दें कि केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' ने इस मामले में अपने एएसआई मोतीराम जाट को बर्खास्त कर दिया है। सीआरपीएफ नियमों के साथ भारत के संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोपी को 21 मई से बर्खास्त किया गया है। सीआरपीएफ के मुताबिक, प्रोटोकॉल के उल्लंघन के बाद सीआरपीएफ कर्मी को बर्खास्त किया गया है। यह मामला एनआईए को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में सीआरपीएफ कर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियों की निरंतर निगरानी के दौरान, एएसआई/जीडी रैंक के कर्मी से जुड़े स्थापित मानदंडों और प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला सामने आया था। इस मामले की प्रारंभिक जांच पड़ताल की गई। सीआरपीएफ ने इस मामले को गंभीर माना और आगे की जांच के लिए इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेज दिया था। आरोपी मोती राम को सीआरपीएफ नियमों के तहत सेवा से बर्खास्त भी कर दिया गया।
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे 6 जून तक जांच एजेंसी की हिरासत में भेजा है। सूत्रों के मुताबिक, मोतीराम जाट 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़े लोगों के संपर्क में था। आरोप है कि उसने कई तरह की संवेदनशील जानकारी, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी तक पहुंचाई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि आरोपी एएसआई, पाकिस्तान में किन लोगों के संपर्क में था। उसने किस तरह की जानकारी वहां तक पहुंचाई है। इसके बदले में उसे क्या मिला है। हालांकि जांच एजेंसी के पास ट्रांजेक्शन के ऐसे सबूत बताए गए हैं, जिनसे यह साबित हो सकता है कि सीमा पार से आरोपी के बैंक खाते में राशि आई है।
मोती राम, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में सीआरपीएफ की 116 बटालियन में तैनात था। दक्षिण कश्मीर के पर्यटन स्थल पर 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले से पांच दिन पहले उसे दिल्ली स्थानांतरित किया गया था। सूत्रों का कहना है कि आरोपी के पाकिस्तान में कई खुफिया अधिकारियों से संपर्क थे। उसे किसी एक व्यक्ति द्वारा पैसे नहीं भेजे जाते थे, बल्कि अलग-अलग लोगों के द्वारा आरोपी को धन प्राप्त होता था। सूत्रों ने बताया, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में तैनात रहा आरोपी, मोती राम, सोशल मीडिया के जरिए हनीट्रैप का शिकार हुआ था।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लोगों के जाल में फंसने के बाद मोती राम, वह सब करने लगा, जैसा उसे कहा जाता था। उसने सुरक्षा बलों के काफिले और तैनाती से जुड़े अहम सिग्नल व फोटोग्राफ भी पीआईओ तक पहुंचाए थे। आरोप है कि क्यूएटी की तैनाती और गश्त की जानकारी, ये सूचनाएं भी पड़ोसी मुल्क की खुफिया एजेंसी को दी गई। भारतीय खुफिया एजेंसी की टेबल पर साझा होने वाली क्लासीफाइड इन्फोर्मेशन को भी पीआईओ तक भेजा गया।
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बता दें कि केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' ने इस मामले में अपने एएसआई मोतीराम जाट को बर्खास्त कर दिया है। सीआरपीएफ नियमों के साथ भारत के संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोपी को 21 मई से बर्खास्त किया गया है। सीआरपीएफ के मुताबिक, प्रोटोकॉल के उल्लंघन के बाद सीआरपीएफ कर्मी को बर्खास्त किया गया है। यह मामला एनआईए को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में सीआरपीएफ कर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियों की निरंतर निगरानी के दौरान, एएसआई/जीडी रैंक के कर्मी से जुड़े स्थापित मानदंडों और प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला सामने आया था। इस मामले की प्रारंभिक जांच पड़ताल की गई। सीआरपीएफ ने इस मामले को गंभीर माना और आगे की जांच के लिए इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेज दिया था। आरोपी मोती राम को सीआरपीएफ नियमों के तहत सेवा से बर्खास्त भी कर दिया गया।
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे 6 जून तक जांच एजेंसी की हिरासत में भेजा है। सूत्रों के मुताबिक, मोतीराम जाट 2023 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़े लोगों के संपर्क में था। आरोप है कि उसने कई तरह की संवेदनशील जानकारी, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी तक पहुंचाई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि आरोपी एएसआई, पाकिस्तान में किन लोगों के संपर्क में था। उसने किस तरह की जानकारी वहां तक पहुंचाई है। इसके बदले में उसे क्या मिला है। हालांकि जांच एजेंसी के पास ट्रांजेक्शन के ऐसे सबूत बताए गए हैं, जिनसे यह साबित हो सकता है कि सीमा पार से आरोपी के बैंक खाते में राशि आई है।
मोती राम, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में सीआरपीएफ की 116 बटालियन में तैनात था। दक्षिण कश्मीर के पर्यटन स्थल पर 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले से पांच दिन पहले उसे दिल्ली स्थानांतरित किया गया था। सूत्रों का कहना है कि आरोपी के पाकिस्तान में कई खुफिया अधिकारियों से संपर्क थे। उसे किसी एक व्यक्ति द्वारा पैसे नहीं भेजे जाते थे, बल्कि अलग-अलग लोगों के द्वारा आरोपी को धन प्राप्त होता था। सूत्रों ने बताया, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में तैनात रहा आरोपी, मोती राम, सोशल मीडिया के जरिए हनीट्रैप का शिकार हुआ था।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लोगों के जाल में फंसने के बाद मोती राम, वह सब करने लगा, जैसा उसे कहा जाता था। उसने सुरक्षा बलों के काफिले और तैनाती से जुड़े अहम सिग्नल व फोटोग्राफ भी पीआईओ तक पहुंचाए थे। आरोप है कि क्यूएटी की तैनाती और गश्त की जानकारी, ये सूचनाएं भी पड़ोसी मुल्क की खुफिया एजेंसी को दी गई। भारतीय खुफिया एजेंसी की टेबल पर साझा होने वाली क्लासीफाइड इन्फोर्मेशन को भी पीआईओ तक भेजा गया।