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Hindi News ›   India News ›   CRPF action at New Delhi Railway station 15 commandants will keep an eye on force deployment in 15 districts

Delhi: नई दिल्ली स्टेशन पर मची भगदड़ के बाद CRPF का कदम, 15 जिलों में बल तैनाती पर नजर रखेंगे 15 कमांडेंट

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 17 Feb 2025 12:41 PM IST
सार

इससे पहले बल की मूवमेंट या तैनाती, सीआरपीएफ की नई दिल्ली रेंज के डीआईजी दफ्तर से होती थी। नॉर्दन सेक्टर के आईजी और बल के आईजी 'आपरेशन' इस तरह की प्रक्रिया में शामिल होते थे। हर जिले में अलग से कमांडेंट की तैनाती नहीं होती थी।

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CRPF action at New Delhi Railway station 15 commandants will keep an eye on force deployment in 15 districts
CRPF - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली के अगर किसी भी जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी में सीआरपीएफ/आरएएफ को तैनात किया जाता है तो उस स्थिति में जवानों की हर मूवमेंट एवं तैनाती पर नजर रखने के लिए 'पर्यवेक्षक' तैनात किए गए हैं। सीआरपीएफ के कमांडेंट स्तर के 15 अधिकारी, पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी संभालेंगे। ये कमांडेंट, 15 जिलों में दिल्ली पुलिस के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे। सीआरपीएफ द्वारा 16 फरवरी को जारी आदेशों में कहा गया है कि सभी कमांडेंट बिना कोई देरी किए अपना कार्यभार संभालेंगे।

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शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मच गई थी। इस घटना में कई लोगों की जान चली गई थी। अनेक लोग घायल भी हुए हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ की तैनाती में कुछ बदलाव की बात सामने आई। सीआरपीएफ ने आदेश जारी कर दिया कि वह दिल्ली के सभी जिलों में बल की तैनाती या मूवमेंट पर नजर रखने के लिए कमांडेंट नियुक्त करेगी। इस कड़ी में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में 194 वीं बटालियन के कमांडेंट को लगाया गया है। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में 103 वीं बटालियन के कमांडेंट तो वहीं साउथ डिस्ट्रिक्ट में 122 वीं बटालियन के कमांडेंट को लगाया गया है। पूर्वी डिस्ट्रिक्ट की जिम्मेदारी 31 वीं बटालियन के कमांडेंट को सौंपी गई है। नॉर्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में 139 वीं बटालियन के कमांडेंट तैनात रहेंगे। 89 वीं बटालियन के कमांडेंट को साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में लगाया गया है। 
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नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट के लिए 55 वीं बटालियन के कमांडेंट की ड्यूटी लगाई गई है। नॉर्थ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में 70 वीं बटालियन के कमांडेंट को लगाया गया है। वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में 5 वीं बटालियन के कमांडेंट को जिम्मेदारी दी गई है। शाहदरा जिले में 243 वीं बटालियन के कमांडेंट रहेंगे। साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में 200 वीं बटालियन के कमांडेंट तैनात किए गए हैं। रोहिणी जिले में 238 वीं बटालियन के कमांडेंट सीआरपीएफ/आएएफ की तैनाती और मूवमेंट पर नजर रखेंगे। बाहरी दिल्ली में 236 वीं बटालियन के कमांडेंट को लगाया गया है। बाहरी उत्तरी जिले में 27 वीं बटालियन के कमांडेंट को जिम्मेदारी दी गई है। द्वारका जिले में 88 'एम' बटालियन के कमांडेंट को तैनाती मिली है। 
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बता दें कि इससे पहले बल की मूवमेंट या तैनाती, सीआरपीएफ की नई दिल्ली रेंज के डीआईजी दफ्तर से होती थी। नॉर्दन सेक्टर के आईजी और बल के आईजी 'आपरेशन' इस तरह की प्रक्रिया में शामिल होते थे। हर जिले में अलग से कमांडेंट की तैनाती नहीं होती थी। सूत्रों का कहना है कि शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ के बाद यह कदम उठाया गया है। अगर कुछ दशक पहले की बात करें तो बल का एक सेक्शन जहां कहीं भी जाता था, उसका कमांडर हवलदार/जीडी रहता था। प्लाटून को सब इंस्पेक्टर कमांड करता था। 

उसके बाद सहायक कमांडेंट को आगे लाया गया। फिर यह नियम बना दिया गया कि प्लाटून जहां कहीं भी तैनात होगी, बतौर कंपनी कमांडर 'ओसी' यानी सहायक कमांडेंट साथ जाएगा। भले ही जवानों की नफरी जो भी रही हो। सूत्रों का कहना है कि बल में इस आदेश को भी चुपचाप स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद फिर एक कदम आगे बढ़ाया गया। ऑप्स एरिया में अगर कम्पनी मूवमेंट करती है तो उसके साथ डिप्टी कमांडेंट को भेजने की प्रथा शुरु हो गई। इस बदलाव का भी विरोध नहीं हुआ। यह परंपरा कुछ आगे बढ़ी।  

इसके बाद कहा गया कि ऑपरेशनल क्षेत्रों में यूनिट कमांडेंट भी फील्ड में निकलें। हालांकि यह पहल कुछ ही मामलों में छोड़कर बाकी फाइलों पर चलती हुई नजर आई। सभी अधिकारियों को कम्पनी निवास, एलयूपी और निर्धारित ऑप्स क्षेत्र में रहने का आदेश जारी किया गया। सूत्रों ने बताया, इसके बाद व्यवस्था में कई छिद्र देखने को मिले। रात्रि विश्राम में कथित तौर पर गोलमाल दिखने लगा। इस स्थिति में सबसे ज्यादा ड्यूटी सहायक कमांडेंट को देनी पड़ रही है। डिप्टी कमांडेंट, टूआईसी और कमांडेंट, कुछ हद तक राहत में देखे गए। 


कमांड स्ट्रक्चर में बदलावों का नतीजा यह हुआ कि अब सीओ के अलावा बाकी सभी अधिकारी ड्यूटी में भागदौड़ करते हुए नजर आए। फिर से आदेशों में बदलाव हुआ। कमांडेंट को उनके पद के विपरीत प्लाटून या एक कंपनी के साथ खड़ा किया गया। इस बार डीआईजी स्तर के अधिकारियों को राहत मिल गई। कुछ समय बाद डीआईजी को भी इसी लाइन पर लाने का प्रयास हुआ। अब कमांडेंट को लेकर आदेश पर आदेश आ रहे हैं। पिछले सप्ताह मणिपुर में सीआरपीएफ कैंप में जब एक जवान ने अपने साथियों पर फायरिंग कर दी थी। घायल हुए प्रत्येक जवान पर एक कमांडेंट को तैनात करने का आदेश जारी किया गया। विभिन्न यूनिटों से आठ कमांडेंट को तीन तीन घंटे के लिए अस्पताल में तैनात कर दिया गया। 24 घंटे में यह आदेश बदल गया। उसके बाद सहायक कमांडेंट को घायलों की देखभाल की जिम्मेदारी दे दी गई। 

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