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CRISIL: चुनावों में महिला वोटर को रिझाने के लिए शीर्ष 18 राज्य खर्चेंगे एक लाख करोड़; क्रिसिल रेटिंग का दावा
Fri, 27 Jun 2025 05:33 AM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 27 Jun 2025 05:33 AM IST
सार
रिपोर्ट में कहा, 2018-19 व 2023-24 के बीच सामाजिक क्षेत्र पर खर्च जीएसडीपी के 1.4-1.6 प्रतिशत के दायरे में हुआ करता था। पिछले वित्त वर्ष में यह बढ़कर दो प्रतिशत हो गया। 2025-26 में बढ़े हुए खर्च के परिणामस्वरूप राजस्व घाटा बढ़ेगा। इससे राज्यों को पूंजीगत खर्च करने में दिक्कतें आएंगी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : PTI
विस्तार
चुनावों से पहले विभिन्न तरह की रेवड़ी बांटने का सिलसिला जारी है। चालू वित्त वर्ष में चुनाव से पहले शीर्ष 18 राज्य महिलाओं की योजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च करेंगे। क्रिसिल रेटिंग ने रिपोर्ट में कहा, सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं पर राज्यों का खर्च 2025-26 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी के दो प्रतिशत के बराबर होगा। इससे पूंजीगत खर्च पर असर पड़ने की संभावना है।
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रिपोर्ट में कहा, 2018-19 व 2023-24 के बीच सामाजिक क्षेत्र पर खर्च जीएसडीपी के 1.4-1.6 प्रतिशत के दायरे में हुआ करता था। पिछले वित्त वर्ष में यह बढ़कर दो प्रतिशत हो गया। 2025-26 में बढ़े हुए खर्च के परिणामस्वरूप राजस्व घाटा बढ़ेगा। इससे राज्यों को पूंजीगत खर्च करने में दिक्कतें आएंगी। जो 18 राज्य शामिल हैं, उनकी सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 90 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। सामाजिक क्षेत्र के खर्च में पिछड़े वर्गों, महिलाओं, बच्चों और श्रमिकों के कल्याण के लिए राजस्व खर्च, साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन के रूप में कुछ जनसांख्यिकीय समूहों को सहायता शामिल है।
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कुल खर्च 2.3 लाख करोड़ रुपये
राज्यों में कुल खर्च 2.3 लाख करोड़ रुपये आएगा। इसमें से एक लाख करोड़ रुपये मुख्य रूप से चुनावी प्रतिबद्धताओं के रूप में महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ ट्रांसफर (डीबीटी) के लिए होंगे। इस तरह की योजनाओं से जिन राज्यों को चुनाव में सफलता मिलती है, उसके आधार पर दूसरे राज्य भी यही रेवड़ियां बांटना शुरू कर देते हैं।
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योजनाओं पर निगरानी की जरूरत
क्रिसिल ने कहा, इस तरह की आदतों पर आगे चलकर निगरानी की जरूरत होगी। कुछ वर्षों में कई प्रमुख राज्यों में जहां चुनाव हुए हैं, उन्होंने डीबीटी योजनाओं के लिए आवंटन शुरू किया है या बढ़ाया है। कुछ राज्य आगामी चुनावों में इसी तरह की योजना शुरू करने की तैयारी में हैं। 18 में से आधे राज्यों के खर्चों में वृद्धि होने की उम्मीद है।