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दागी नेता और राजनीति: जानें 5 साल पहले राहुल ने और 4 साल पहले नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था

Wed, 26 Sep 2018 03:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 26 Sep 2018 03:32 PM IST
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criminalisation of politics: what did Rahul gandhi and Narendra Modi said on Tainted leaders
राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी
सर्वोच्च न्यायालय ने आपराधिक छवि वाले नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि संसद को यह सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाना चाहिए कि आपराधिक मामलों का सामना करने वाले लोग राजनीति में प्रवेश न करें।
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अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव लड़ने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार को अपना आपराधिक रिकॉर्ड निर्वाचन आयोग को देना होगा। साथ ही सभी राजनीतिक दलों को ऐसे उम्मीदवारों की सूची और विस्तृत जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी।
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जानें पूरे मामला में कब क्या हुआ :

10 जुलाई 2013: सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर लगाई

उच्चतम न्यायालय ने पटना न्यायालय के उस आदेश पर मुहर लगा दी, जिसमें कहा गया था कि जो व्यक्ति वोट डालने लायक नहीं, वह चुनाव लड़ने के योग्य नहीं। इसके बाद यूपीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली। दो विधेयक भी राज्यसभा में पेश किए।
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27 सितंबर 2013: राहुल गांधी बोले- यह जन प्रतिनिधित्व अध्यादेश बकवास है

दिल्ली में कांग्रेस महासचिव अजय माकन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आ रहे हैं। राहुल वहां पहुंचे और उन्होंने जन प्रतिनिधित्व संशोधन अध्यादेश को फाड़कर फेंक दिया। इसके बाद राहुल बोले कि इस अध्यादेश पर मेरी राय है कि यह बकवास है। इसे फाड़ कर फेंक देना चाहिए।

21 अप्रैल 2014: मोदी बोले- सत्ता में आए तो राजनीति से अपराध खत्म होगा

उत्तर प्रदेश के हरदोई में साल 2014 में एक चुनावी रैली में नरेंद्र मोदी ने संकल्प लिया और एलान किया था कि यदि वह सत्ता में आए तो राजनीति और संसद से आपराधिक तत्वों का सफाया कर देंगे। मोदी ने कहा था कि 16 मई के बाद जब नई सरकार बनेगी तो मैं एक समिति बनाऊंगा।

1 नवंबर 2017: 1 साल में सुनवाई पूरी होने के लिए विशेष अदालतें बनीं

सर्वोच्चा न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों की एक साल में सुनवाई पूरी होने के लिए वह विशेष अदालतों का गठन करे। इस पर केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि इन मामलों के निपटारे के लिए 12 विशेष अदालतें बनाई जाएंगी।


28 अगस्त 2018: बहस पूरी, सरकार ने कहा- कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट में दागी नेताओं के मामले पर चल रही बहस पूरी हुई। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि राजनीति में शुचिता की मंशा रखना तारीफ के काबिल है, लेकिन कोर्ट को ऐसे मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।
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