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वाम से कांग्रेस का साथ छूटने पर भाजपा ने ली चुटकी, कहा- सपा की तरह वाम ने भी छोड़ा हाथ का साथ

Mon, 22 Jan 2018 08:18 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Mon, 22 Jan 2018 08:18 PM IST
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CPI(M) rules out alliance with Congress

वाम दल के जरिए कांग्रेस का साथ छोडऩे के ऐलान पर भाजपा ने चुटकी ली है। भाजपा आईटी विंग के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा है कि सीताराम येचूरी बेशक सीपीएम के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

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मगर पार्टी की सारी ताकत अब भी प्रकाश करात के पास है। मालवीय ने चुटकी लेते हुए दूसरे ट्वीट में लिखा है कि सपा की तरह वाम ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया है। दरअसल माकपा की केंद्रीय समिति ने यह निर्णय लिया है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में वह कांग्रेस के साथ कोई तालमेल नहीं करेगी। जिसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तंज कसा है।
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माकपा के इस फैसले के बाद त्रिपुरा में भी कांग्रेस और वाम के बीच होने वाले गठबंधन के कदम को झटका माना जा रहा है। यहां वाम दल के साथ भाजपा का सीधा मुकाबला है।
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माकपा की ओर से इस बात की कोशिश की जा रही थी कि कांग्रेस के साथ गठजोड़ कर अपने अभेद्य दुर्ग की रक्षा की जाय। वर्ष 1993 से सूबे के मुख्यमंत्री पद पर माणिक सरकार का कब्जा है। लेकिन इस दफे उनकी कुर्सी को खतरा दिख रहा है। येचूरी की ओर से कोशिश थी कि कांग्रेस से गठजोड़ कर त्रिपुरा में भाजपा के उदय पर ग्रहण लगा सके। 

कांग्रेस से गठजोड़ के हमेशा से विरोधी रहे हैं करात 

CPI(M) rules out alliance with Congress
Sitaram Yechury and Prakash Karat
वाम राजनीति में सिद्धांतो पर अडिग रहने के मामले में प्रकाश करात को बेहद सख्त माना जाता है। पार्टी के आधार में बेशक कमी होती रही है। मगर करात सिद्धांतों से समझौते के पक्षधर नहीं रहे।

जबकि येचूरी की नीति सम विचार धारा वाले दलों से गठजोड़ कर पार्टी का आधार बनाए रखने की रहती है। वैसे दोनों नेताओं करात और येचूरी के बीच जारी बर्चस्व की जंग को वाम दल में केरल और पश्चिम बंगाल के धड़े के बीच का संघर्ष भी माना जाता है। करात की पकड़ केरल के कॉडर पर मजबूत है।

तो येचूरी को बंगाल लॉबी की पसंद बताया जाता है। वर्तमान में माकपा की राजनीति में केरल धड़े का ही दबदबा है। यही वजह है कि येचूरी के महासचिव रहने के बावजूद भी करात गुट माकपा की केंद्रीय समिति की बैठक में अपना प्रस्ताव पारित कराने में सफल रहा है। इस प्रस्ताव के पारित होने को येचूरी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे पहले करात गुट से पार्टी संगठन के संविधान की दुहाई देते हुए येचूरी की राज्यसभा में एंट्री रोक चूका है। 

क्या हुआ माकपा केंद्रीय समिति बैठक में 
माकपा केंद्रीय समिति की बैठक में अंतिम दिन राजनीतिक मसौदे पर हुए मतदान में पूर्व महासचिव प्रकाश कारत गुट की ओर से पेश प्रस्तावों को हरी झंडी मिल गई।

महासचिव सीताराम येचुरी की ओर से पेश मसौदे में भाजपा के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस समेत तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों को साथ लेकर एक वाम लोकतांत्रिक मोर्चा बनाने की बात कही गई थी।

मगर येचूरी के मंसूबों पर तब पानी फिर गया जब उनका प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। और करात के जरिए प्रस्ताव को समर्थन मिल गया। इससे तय हो गया है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में वाम दल चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ कोई तालमेल नहीं करेगी। 
 

येचूरी ने दिखाए तेवर 

CPI(M) rules out alliance with Congress
बताया जा रहा है कि केंद्रीय समिति बैठक में अपने प्रस्ताव के अटकने के बाद येचूरी ने नाराजगी दिखाई है। वाम सूत्रों की मानें तो माकपा में एक बार फिर करात और येचूरी के बीच की सियासी जंग सतह पर आ गई है। इस सियासी जंग के जल्द थमने के आसार नहीं है। आने वाले दिनों में वाम दल के बीच से बगावत उभर सकती है। येचूरी के जरिए त्यागपत्र के पेशकश की भी चर्चायें हैं। 
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