दुनिया भर में चुनावों पर पड़ा है कोविड-19 महामारी का असर, कैसे हो सुरक्षित मतदान
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया है। चुनाव भी इस महामारी से अछूते नहीं रहे हैं। साल 2020 में दुनिया भर में होने वाले सैकड़ों चुनावों पर इस महामारी का असर पड़ चुका है। एक ओर 60 से ज्यादा देश अपने यहां होने वाले चुनावों को टाल चुके हैं तो दूसरी ओर फ्रांस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने चुनाव आयोजित कराने का फैसला किया है।
इन देशों ने मतदान के दौरान मतदाता और चुनाव अधिकारी कोरोना संक्रमण से बचे रहें इसके लिए जरूरी कदम तो उठाए हैं। लेकिन चुनाव को आयोजित कराना ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लोगों का संपर्क में आना बहुत आम होता है। वहीं, जिस स्वास्थ्य संकट से दुनिया गुजर रही है, उसमें ये चुनौतियां बहुत गंभीर हो गई हैं। भारत के सबसे बड़े राज्यों में शुमार बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
बिहार चुनाव को स्थगित करने की भी मांग की गई थी। लेकिन, भारतीय चुनाव आयोग ने इससे साफ इनकार कर दिया था। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने चुनावों की तारीख का एलान भी कर दिया। इसके साथ ही चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण का प्रसार न हो इसके लिए कई दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और मास्क पहनने के साथ कई और नियम भी बताए गए हैं।
क्या चुनाव के दौरान बढ़े हैं कोरोना संक्रमण के मामले
अभी तक हमारे सामने जो आंकड़े हैं उनके आधार पर यह कहना थोड़ा कठिन है कि चुनाव के दौरान संक्रमण के मामले बढ़े ही हैं। कुछ देशों में चुनाव के कुछ सप्ताह के बाद कोविड-19 के नए मामलों में की संख्या में उछाल देखी गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे प्रतिबंधों में ढील और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए अन्य कार्य भी कारण हो सकते हैं।
बेलारूस में चुनाव के विरोध में कई प्रदर्शन हुए थे। सर्बिया में भी चुनाव के बाद कई विरोध प्रदर्शन हुए थे। सर्बिया पर आरोप है कि चुनावों को देखते हुए उसने अपने यहां के कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या कम बताई थी। दूसरी ओर दक्षिण कोरिया है, जिसके कोविड प्रबंधन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। अप्रैल में यहां चुनाव हुआ था, और इस संबंध में कोविड-19 का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मतदान स्थलों पर संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके लिए चुनाव अधिकारी सख्ती से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, मास्क अनिवार्य किया जाए, सैनिटाइजेशन का उचित प्रबंध किया जाए। इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स की वरिष्ठ शोधार्थी फर्नांडा ब्यूरिल कहती हैं कि मतदान के विभिन्न तरीकों को अपना कर भी खतरा कम किया जा सकता है।
विभिन्न देशों ने क्या स्वास्थ्य और सुरक्षा मानक अपनाए
- मास्क की अनिवार्यता : कई देशों ने मतदान के दौरान मतदाताओं के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया था। जब तक कोरोना की कोई वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक मास्क को संक्रमण से बचने का एक प्रभावी तरीका माना गया है।
- तापमान की जांच : दक्षिण कोरिया में अप्रैल में हुए चुनाव में करीब तीन करोड़ लोगों ने मतदान किया था। मतदान से पहले यहां सभी के तापमान की जांच की गई थी और उन्हें हैंड सैनिटाइजर उपलब्ध कराया गया था। जिनका तापमान सामान्य से ज्यादा मिला था उन्हें अलग से मतदान करने की सुविधा दी गई थी।
- सोशल डिस्टेंसिंग का पालन : मंगोलिया और सर्बिया जैसे देशों ने मतदाताओं के लिए एक मीटर की दूरी सुनिश्चित करने का नियम तय किया था। सोशल डिस्टेंसिंग को भी संक्रमण से बचाव का अहम माध्यम माना गया है।
- मतदान स्थलों का डिसइंफेक्शन : मतदान स्थलों को नियमित रूप से डिसइंफेक्ट करना संक्रमण के प्रसार को रोकने में प्रभावी साबित हो सकता है। पोलैंड में मतदान स्थलों पर हर एक घंटे में 10 मिनट के लिए वेंटिलेशन की व्यवस्था की गई थी। वहीं, डोमिनिकन रिपब्लिक में सतहों को और मार्कर्स को लगातार डिसइंफेक्ट करने का प्रावधान किया गया था।
- वस्तुएं साझा करने पर प्रतिबंध : फ्रांस की सरकार ने मतदान के दौरान लोगों से अपने पेन लाने की अपील की थी। सूरीनाम में चुनाव कर्मचारियों ने मतदाताओं के अंगुलियों को चिह्नित करने के लिए कॉटन स्वैब का इस्तेमाल किया था।
- मतदान के घंटों में बढ़त : मतदान के लिए मौजूद लोगों की संख्या को कम करके संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ देशों ने मतदान के समय को बढ़ाया तो कुछ ने पोलिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाई।
- मतदान के लिए विभिन्न विकल्प : मतदान के लिए कुछ देशों ने पारंपरिक मतदान के स्थान पर कुछ विकल्प भी पेश किए थे। ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य देशों ने डाक के माध्यम से मतदान को प्रोत्साहित किया था। अमेरिका में भी नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में डाक मतदान का प्रावधान किया गया है। एक रास्ता ऑनलाइन वोटिंग का भी है लेकिन विशेषज्ञ इसे सुरक्षित नहीं मानते हैं।