चेन्नई के डॉक्टरों ने एशिया में पहली बार कोरोना संक्रमित रोगी के फेफड़े प्रत्यारोपित किए
कोविड-19 की वजह से खराब हो गए फेफड़ों का एशिया में पहली बार चेन्नई के डॉक्टरों ने सफल प्रत्यारोपण किया है। चेन्नई स्थित मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल एमजीएम हेल्थकेयर ने एक कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज के दोनों ओर के फेफड़ों का प्रत्यारोपण करने का दावा किया है। अस्पताल के सर्जनों ने संक्रमित मरीज पर एक द्विपक्षीय (डबल लंग) प्रत्यारोपण किया, जो दिल्ली से लाया गया था।
इन फेफड़ों का दाता एक 34 वर्षीय व्यक्ति था, जिसे दिमाग के अंदर रक्तस्राव से पीड़ित होने के बाद गुरुवार को अपोलो ग्लेनेगल्स ग्लोबल अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। वह अपने दिल, लिवर (जिगर) और त्वचा को भी शहर के अस्पतालों में अन्य प्राप्तकर्ताओं को दान करने के लिए सहमत हुआ था।
एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के निदेशक डॉ. केआर बालाकृष्णन ने दोनों ओर के फेफड़े के प्रत्यारोपण का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि यह एक सराहनीय कदम था। मरीज के दोनों फेफड़ों का प्रत्यारोपण 27 अगस्त को किया गया। एमजीएम हेल्थकेयर ने बताया कि 'ट्रांसप्लांट के बाद मरीज अच्छा है और वह अभी आईसीयू में है। उसके प्रत्यारोपित किए गए फेफड़े अच्छे से काम कर रहे हैं।'
एमजीएम हेल्थकेयर के अनुसार, मरीज का कोरोना परीक्षण आठ जुलाई को पॉजिटिव आया था और उसके फेफड़ों का केवल एक छोटा हिस्सा ही काम कर रहा था। हालत बिगड़ने पर उसे जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया। बाद में उसे 20 जुलाई को गाजियाबाद के एमजीएम हेल्थकेयर से एयरलिफ्ट करके चेन्नई ले जाया गया।
कई और लोगों को मिले दानदाता के अंग
34 वर्षीय व्यक्ति द्वारा दान किए गए अन्य अंग अलग-अलग अस्पतालों को मिले। ग्लोबल अस्पताल चेन्नई ने जिगर को रखा, शहर के विभिन्न अस्पतालों में हृदय, फेफड़े, गुर्दे और त्वचा दान किए गए। उनके हाथ मुंबई की एक युवती मोनिका मोरे को लगाए गए, जो कृत्रिम हाथों का उपयोग कर रही थीं और अब दोनों हाथों की जोड़ी के ऑपरेशन के सफल होने पर वह असली हाथों की जोड़ी पा जाएंगी।