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Covid-19: अखबार आवश्यक सेवाओं का हिस्सा, इसके वितरण में व्यवधान गैरकानूनी

Sat, 04 Apr 2020 03:36 AM IST
Rajeev Rai अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 04 Apr 2020 03:36 AM IST
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Covid19 Newspapers are a part of essential things Banning the circulation is illegal says Legal Expert
भारतीय अखबार - फोटो : social media

कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए अखबारों के वितरण पर रोक लगाने या व्यवधान पहुंचाने पर कानूनी जानकार काफी क्षुब्ध हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि अखबारों के वितरण में रुकावट पहुंचाना पूरी तरह गैरकानूनी और असंवैधानिक है। सोशल मीडिया के इस दौर में जहां खबरों की सच्चाई पता लगाना मुश्किल है वहीं अखबार ही ऐसा माध्यम है जिसपर लोग भरोसा करते है और उसका बेसब्री से इंतजार करते हैं।

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कोरोना राहत कोष में एक करोड़ रुपए का दान देने वाले वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी का कहना है कि अखबार आवश्यक सेवाओं का हिस्सा है लिहाजा अखबार को बांटने से न तो रोका जाना चाहिए और ना ही रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि अखबार का कोरोना से कोई संबंध नहीं है। हालिया अध्ययनों में भी यह सामने आया है कि अखबार से कोरोना के संक्रमण की बात गलत है। हालांकि द्विवेदी ने यह जरूर कहा कि अधिक से अधिक वितरण के तौर-तरीकों को लेकर नियम बनाए जा सकते हैं लेकिन किसी भी हालत में अखबार के वितरण को नहीं रोका जा सकता। ऐसा करना न केवल गैरकानूनी है बल्कि असंवैधानिक भी है।
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस वीएन खरे का कहना है कि अखबार आवश्यक सेवाओं के दायरे में आता है। इसके वितरण पर रोक लगाना या व्यवधान पहुंचाना गैरकानूनी है। जस्टिस खरे का कहना है कि अखबार के जरिए लोगों तक सटीक एवं सही जानकारी पहुंचती है। कोरोना जैसी बीमारी के बारे में लोगों तक सही जानकारी पहुंचनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अखबारों में पक्ष एवं विपक्ष का नजरिया होता है। ऐसे में अखबार के वितरण को रोकना या व्यवधान पहुंचाना पूरी तरह से गलत है। अखबार को अपनी जिंदगी का हिस्सा मानने वाले पूर्व चीफ जस्टिस खरे ने यह भी कहा कि अखबार वितरक अखबार बांट रहा है न कि वायरस बांट रहा है। अधिक से अधिक अखबार बांटने वालों का नियमित रूप से टेस्ट किया जा सकता है लेकिन किसी भी स्थिति में अखबार को रोकना गलत है। 
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दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर एस सोढ़ी का कहना है कि अखबारों के वितरण पर रोक या व्यवधान पहुंचाना गैरकानूनी है। उन्होंने अखबार को आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में बताते हुए कहा कि जानकारी पाना हमारा मौलिक अधिकार है ऐसे में हमें मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया सकता।

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