Covid Vaccine for 15-18 Years: बच्चों की वैक्सीन पर डॉक्टरों की राय अलग-अलग, जानिए किन देशों ने अभी तक दी है मंजूरी
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण दुनिया भर के देशों ने कोविड -19 टीकाकरण कार्यक्रमों को विस्तार देना शुरू कर दिया है और इसमें छोटे बच्चों को शामिल किया जा रहा है।
विस्तार
डॉ. संजय राय इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगान से कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यह निर्णय लागू करने से पहले उन देशों के डाटा का विश्लेषण करना चाहिए था जो अपने यहां बच्चों का टीकाकरण शुरू कर चुके हैं।
क्या तर्क दिए गए हैं?
राय ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि वैक्सीन का उद्देश्य कोरोना संक्रमण या उसकी गंभीरता या मौतों को रोकना है। उन्होंने कहा, हमारे पास टीकों के बारे में जो जानकारी है, उसके मुताबिक वे संक्रमण को बड़ा नुकसान पहुंचाने में सक्षम नहीं हैं। कुछ देशों में बूस्टर शॉट मिलने के बाद भी लोग संक्रमित हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बच्चों में संक्रमण की गंभीरता बहुत कम है और आंकड़ों के अनुसार बच्चों में प्रति 10 लाख संक्रमण के मामलों में केवल दो मौत हो रही हैं। उनके मुताबिक बच्चों में टीकाकरण की शुरुआत करके दोनों ही उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पा रही है।
अक्तूबर में आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उसी महीने एक सीरो सर्वेक्षण से पता चला है कि अब तक लगभग 60 फीसदी बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। डॉ संजय राय के हवाले से इस रिपोर्ट में कहा गया कि इस बात को कोई अध्ययन नहीं है कि 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन बहुत फायदेमंद होगा। उनके मुताबिक बच्चों में बहुत ही हल्का संक्रमण होता है। कुछ बच्चों में, यह सामान्य सर्दी से हल्का होता है। टीके संक्रमण की गंभीरता को कम कर रहे हैं लेकिन संक्रमण को नहीं।
डॉक्टरों की राय बंटी
हालांकि भारत में इस मामले में डॉक्टरों की राय बंटी नजर आ रही है। कुछ डॉक्टर और विशेषज्ञ पीएम के इस फैसले को सही ठहरा रहे हैं। नेशनल टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजशन इन इंडिया (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ एन के अरोड़ा ने कहा कि 15-18 वर्ष की आयु के किशोरों को टीकाकरण अभियान में शामिल करने के कई लाभ हैं। डॉ अरोड़ा ने कहा है कि देश में पहले से ही बच्चों के लिए कोवाक्सिन है, परीक्षण में इसकी बहुत अच्छी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया मिली है।
वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए के डॉक्टर रवि मलिक ने कहा प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सही समय पर बच्चों के लिए वैक्सीन का एलान किया है। उनके मुताबिक देश में 41 फीसदी ऐसे लोगों की संख्या है जो 18 साल से कम उम्र के हैं और उन्हें वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगी है लेकिन अब वह भी सुरक्षा के घेरे में आ जाएंगे।
जबकि इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन या आईएपीएसएम की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीला गर्ग पहले साफतौर पर कह चुकी हैं कि सभी बच्चों को वैक्सीन नहीं दी जानी चाहिए। डॉ सुनीला गर्ग ने कहा था कि कोरोना वैक्सीन केवल उन बच्चों को दी जानी चाहिए जो गंभीर रुप से बीमार हैं।
भारत ही नहीं विदेशों में भी इस बात पर बहस हो चुकी है कि बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए वैक्सीन दी जानी चाहिए या नहीं? ब्रिटेन ज्वाइंट कमेटी ऑन वैक्सीनेशन एंड इम्यूनाइजेशन ने इसी साल सितंबर में कहा है कि बच्चों को वायरस का खतरा इतना कम है कि वैक्सीनेशन का बहुत ही मामूली फायदा होगा। समिति की सलाह थी कि उन बच्चों को कोविड वैक्सीन दी जाए जिन्हें हार्ट, लंग या लिवर की गंभीर दिक्कत है यानी जो बच्चे को-मॉर्बिडिटीज हैं। क्योंकि स्वस्थ बच्चों की तुलना में ऐसे बच्चों में कोविड का खतरा ज्यादा है।
ब्रिटेन में हर स्वस्थ्य बच्चों को वैक्सीन ना देने की सिफारिश इसलिए की गई क्योंकि फाइजर और माडर्ना टीके से दिल में सूजन, सीने में दर्द होना और धड़कन तेज होने जैसे दुष्प्रभाव सामने आ रहे थे। हालांकि अब ब्रिटेन में इस आयु वर्ग के सभी बच्चों को टीके लगाए जा रहे हैं।
क्या चुनाव के लिए हुआ फैसला?
तो क्या सरकार ने इस मामले में कुछ डॉक्टरों की राय को दरकिनार किया है और क्या यह फैसला पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किया गया है। जिन बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी उनका आयु समूह 15 से 18 वर्ष है। 18 वर्ष यानी वोट देने वाले नए मतदाता। इस बारे में कोई स्पष्ट बात करने को तैयार नहीं लेकिन कुछ डॉक्टरों का कहना है कि शायद इस मामले में जल्दबाजी की गई है।
ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण दुनिया के कई देशों ने छोटे बच्चों को शामिल करने के लिए अपने टीकाकरण कार्यक्रमों का विस्तार देना शुरू कर दिया है। नीचे उन देशों की सूची दी जा रही है जिन्होंने बच्चों के लिए टीकाकरण को मंजूरी दे दी है या विचार कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में तीन साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दो सिनोफार्म और एक सिनोवैक वैक्सीन को मंजूरी दी गई है।
चीन के झेजियांग प्रांत का लक्ष्य दिसंबर तक तीन से 11 साल के बच्चों का टीकाकरण पूरा करना है।
हांगकांग में, सिनोवैक के टीके की आयु सीमा नवंबर के अंत में घटाकर तीन कर दी गई थी।
जनवरी से सिंगापुर में पांच से 11 वर्ष की आयु के बच्चों को टीके लगाए जाने की योजना बन रही है।
मलेशिया भी आयु वर्ग के लिए फाइजर की टीका खरीदने की सोच रहा है।
ऑस्ट्रेलिया अगले साल जनवरी से छोटे बच्चों का टीकाकरण शुरू करेगा।
वियतनाम ने अक्तूबर के अंत में 16 और 17 वर्ष की आयु के किशोरों का टीकाकरण शुरू कर दिया है।
अर्जेंटीना में तीन साल से कम उम्र के बच्चों को सिनोफार्म के शॉट से टीका लगाया जा रहा है।
चिली और अल सल्वाडोर ने सितंबर से छह से 11 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया।
मेक्सिको ने घोषणा की कि वह 15 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू करेगा।
क्यूबा दो साल से कम उम्र के बच्चों को टीके लगा रहा है। देश का लक्ष्य दिसंबर तक अपनी 90 प्रतिशत आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण करना है।
यूरोपीय संघ के देशों ने इस साल दिसंबर से पांच से 11 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
एस्टोनिया, डेनमार्क, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, लिथुआनिया, स्पेन, स्वीडन और फिनलैंड 12 साल और उससे अधिक आयु के बच्चों के लिए शॉट्स की पेशकश कर रहे हैं।
जून में, स्विट्जरलैंड ने 12 से 15 साल के बच्चों को फाइजर वैक्सीन का टीका लगाने की मंजूरी दी। दो महीने बाद उसी आयु वर्ग के बच्चों के लिए मॉडर्न वैक्सीन को मंजूरी मिल गई।
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