यही है कोविड की तीसरी लहर: बोले विशेषज्ञ- अगले पंद्रह दिन हैं बहुत अहम, पिछली बार की तुलना में ज्यादा होंगे मरीज
नेशनल कोविड टास्क फोर्स टीम के प्रमुख सदस्य और देश में वैक्सीन लगाने वाली टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप के मुखिया प्रोफ़ेसर एनके अरोड़ा मानते हैं कि जिस तरीके से रोजाना इतने मामले सामने आ रहे हैं, वह आने वाले दिनों के हालात की ओर इशारा कर रहे हैं। प्रोफ़ेसर अरोड़ा के मुताबिक अगले 15 दिन बहुत अहम माने जा रहे हैं...
विस्तार
जिस तरीके से देश में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं, उससे अगले 15 दिन बहुत ही अहम माने जा रहे हैं। कोविड पॉजिटिव मामलों में ओमिक्रॉन के केस ज्यादा आ रहे हैं। यह तीसरी लहर जैसा ही है। नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्यूनाइजेशन के प्रमुख डॉक्टर एनके अरोड़ा का कहना है कि दूसरे देशों में तो मामले बहुत बढ़ रहे हैं। इसलिए बेहतर है कि लोग भी बचाव करें और सरकारों को भी सुझाव दिया गया है कि कंटेनमेंट जोन बनाकर लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए इंतजाम करें। क्योंकि अनुमान यही है कि इस बार कोविड के मामले बहुत बढ़ेंगे।
सजग और अलर्ट होने की जरूरत
कोविड की पहली और दूसरी लहर के दौरान विशेषज्ञों ने आकलन किया था कि अगर रोजाना चालीस हजार से ज्यादा कोविड के मामले सामने आते रहेंगे तो हालात कभी भी असामान्य हो सकते हैं। तीसरी लहर का अनुमान भी इसी तरह से लगाया जा रहा है। नेशनल कोविड टास्क फोर्स टीम के प्रमुख सदस्य और देश में वैक्सीन लगाने वाली टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप के मुखिया प्रोफ़ेसर एनके अरोड़ा मानते हैं कि जिस तरीके से रोजाना इतने मामले सामने आ रहे हैं, वह आने वाले दिनों के हालात की ओर इशारा कर रहे हैं। प्रोफ़ेसर अरोड़ा के मुताबिक अगले 15 दिन बहुत अहम माने जा रहे हैं। क्योंकि संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह बेहतर हालातों की ओर इशारा तो नहीं कर रही, लेकिन अभी भी लोगों को सजग और अलर्ट हो जाना चाहिए। क्योंकि संक्रमण की चेन को रोकना ही सबसे महत्वपूर्ण है। प्रोफेसर अरोड़ा कहते हैं कि बीते कुछ दिनों में जितनी तेजी से मामले बढ़े हैं और संक्रमण दर बढ़ती जा रही है निश्चित तौर पर यह तीसरी लहर जैसी ही है।
डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट से हो रही हैं मौतें
प्रोफ़ेसर अरोड़ा कहते हैं जिस तरीके से मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है वह तकनीकी आकलन के मुताबिक आने वाले कुछ दिनों में बहुत ज्यादा होने वाली है। उनका कहना है यह संख्या संभव है कि बीते दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा हो। हालांकि डॉक्टर अरोड़ा कहते हैं कि इस बारे में कुछ कहना मुश्किल है कि रोजाना मरीज कितने आएंगे, लेकिन हमें तैयारी रखनी होगी और हम लोग तैयार भी हैं। जिस तरीके से फ्रांस में ढाई से पौने तीन लाख मरीज रोज रिपोर्ट हो रहे हैं और अमेरिका में दस लाख मरीज। जबकि कुछ देश ऐसे हैं जहां पर पॉजिटिव मरीजों की संख्या थोड़ी कम भी है। इसलिए पूरी तरीके से आकलन कर पाना तो मुश्किल है, लेकिन वायरस के बदले हुए स्वरूप को अभी भी स्टडी किया जा रहा है। अभी तक की रिसर्च से तो यही पता चला है कि ओमिक्रॉन की संक्रामक दर ज्यादा है। यानी यह लोगों को ज्यादा और जल्दी गिरफ्त में लेता है। हालांकि अभी तक देश में होने वाली मौतें डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट से ही सबसे ज्यादा हो रही हैं।
संपूर्ण लॉकडाउन बेहतर विकल्प नहीं
डॉक्टर अरोड़ा कहते हैं कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन इलाकों में मामले ज्यादा आ रहे हैं वहां पर माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाएं। उनका कहना है कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन संक्रमण की दर को रोकने के लिए एक बेहतर विकल्प होता है। उन्होंने कहा कि दूसरी और पहली लहर के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा गया था और उसके परिणाम ही दिखे थे। डॉक्टर अरोड़ा का स्पष्ट रूप से कहना है कि संपूर्ण लॉकडाउन फिलहाल कोई बेहतर विकल्प नहीं है, लेकिन यह निश्चित है कि रात्रि कर्फ्यू और कंटेनमेंट जोन संक्रमण की दर को फैलने से न सिर्फ रोकते हैं, बल्कि बेहतर वैकल्पिक इंतजाम के तौर पर भी सामने आते हैं।
देश भर में अलर्ट जारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अस्पतालों में मरीजों के दाखिल होने की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। हालांकि यह संख्या डरावनी और भयावह नहीं है, लेकिन अस्पतालों में बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए पूरे देश भर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अभी भी अस्पतालों में मरीजों के दाखिल होने का प्रतिशत पांच से दस फ़ीसदी ही है लेकिन तैयारियों के मद्देनजर सारे इंतजामात किए जा चुके हैं। वैकल्पिक अस्पतालों के बंदोबस्त करने के लिए राज्यों को कह दिया गया है। कई राज्यों ने वैकल्पिक अस्पतालों के बंदोबस्त भी कर लिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की बनाई गई टीम रोजाना ना सिर्फ इसकी मॉनिटरिंग कर रही है, बल्कि राज्य और संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे रही है।