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विशेषज्ञ का दावा: मत डरिये...ऐसा कुछ नहीं होने वाला है कि अगली बार बच्चों पर ही कहर बरपाएगा कोरोना

Tue, 01 Jun 2021 02:23 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 01 Jun 2021 02:23 PM IST
सार

पीडियाट्रिक्स, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट और आईसीएमआर की टास्क फोर्स कमेटी नेगवैक (नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19) के चैयरमैन डॉक्टर एनके अरोड़ा बता रहे हैं कि बच्चों को कोविड संक्रमण हो जाए तो उसके लक्षण और इलाज कैसे किया जाना चाहिए? इस बाबत डॉ. अरोड़ा से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

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Covid task force chairman DR NK arora said, no finding and research shows that third wave of corona will impact on children
मास्क लगाए बच्ची। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

बच्चों को लेकर डरने की कोई जरूरत नहीं है। मीडिया रिपोर्ट में लगातार आ रहा है कि कोविड का अगला हमला बच्चों पर होगा। यह पूरी तरीके से गैर-वैज्ञानिक तथ्य है। क्योंकि न तो ऐसा कोई शोध हुआ है और न ही ऐसी कोई ऑब्जर्वेशन है। बावजूद इसके पूरे देश के बच्चों में और उनके परिवारवालों में खौफ बन गया है। कोविड की दूसरी लहर में देशभर में हर उम्र के हजारों बच्चे कोविड पॉजिटिव हुए हैं। पीडियाट्रिक्स, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट और आईसीएमआर की टास्क फोर्स कमेटी नेगवैक (नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19) के चैयरमैन डॉक्टर एनके अरोड़ा बता रहे हैं कि बच्चों को कोविड संक्रमण हो जाए तो उसके लक्षण और इलाज कैसे किया जाना चाहिए? इस बाबत डॉ. अरोड़ा से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

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प्रश्न- हाल ही में कई राज्यों से बड़ी संख्या में बच्चों में कोरोना संक्रमण के मामले देखे गए, आपको क्या लगता है दूसरी लहर में बच्चे अधिक संक्रमित हो रहे हैं?

बच्चे भी बड़ों की तरह ही कोविड संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं, हमारे नवीनतम सीरो सर्वेक्षण में भी यह पाया गया कि 25 फीसदी बच्चे कोविड 19 से प्रभावित पाए गए। यहां तक की दस साल से कम उम्र के बच्चों में भी अन्य उम्र के लोगों की तरह ही कोविड संक्रमण देखा गया। बीमारी के संदर्भ में राष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि कोविड की पहली लहर में तीन से चार फीसदी बच्चे कोविड संक्रमित हुए, जबकि दूसरी लहर में भी बच्चों के संक्रमित होने की दर लगभर पहले जैसी ही है। हालांकि दूसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने के कुल मामलों में बढ़ोतरी देखी गई, पहले के अपेक्षा इस बार बच्चों में कोरोना का संक्रमण अधिक देखा गया है।


प्रश्न- क्या इस बार बच्चों में कोविड संक्रमण अधिक गंभीर रूप से देखा जा रहा है?

कोविड संक्रमण होने के बाद अधिकतर बच्चों में हल्के लक्षण देखे जाते हैं या फिर वह लक्षणविहीन होते हैं। यदि किसी एक परिवार में एक या इससे अधिक सदस्य कोविड पॉजिटिव पाए जाते हैं, तो बच्चों के भी कोविड संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। अच्छी बात यह है कि इस तरह के मामलों में संक्रमित बच्चों की उम्र दस साल से कम देखी गई और उनमें कोविड के बहुत हल्के या एसिम्पटोमेटिक लक्षण जैसे साधारण जुकाम और डायरिया पाया गया। दिल की गंभीर बीमारी, डायबिटीज, अस्थमा और ऐसे बच्चे जो कैंसर या इम्यून सप्रेसेंट बीमारी से ग्रसित हैं उनके संक्रमण की गंभीर स्थिति होने का खतरा अधिक देखा गया। कोविड संक्रमण के जोखिम वाले बच्चों का माता पिता को अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में संक्रमण बड़ों को अपनी चपेट में ले रहा है, इसलिए कोरोना संक्रमण से प्रभावित होने वाले बच्चों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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प्रश्न: हर तरफ चर्चा है कि आने वाले दिनों में बच्चों पर कोरोना का सबसे ज्यादा कहर बरसने वाला है। क्या कोई ऐसी रिसर्च हुई है या कोई ऐसी आप लोगों की फाइंडिंग है।

न तो ऐसी कोई फाइंडिंग है और न ही ऐसी कोई रिसर्च है। तैयारियां हर कोई करता है। हम लोग भी हर उम्र के लोगों को बचाने की तैयारियां कर रहे हैं। लेकिन इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसा कुछ नहीं होने वाला है कि अगले कुछ दिनों में कोरोना कहर बरपाएगा। लोगों में किसी भी तरीके से इस बात को लेकर डरने या घबराने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। पहले और दूसरे चरण में भी बच्चों पर कोविड-19 का असर देखा गया है। इसलिए ऐसा नहीं है कि बच्चे इस बीमारी से अछूते हैं और आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा उन्हीं के ऊपर मुसीबत आने वाली है। इसलिए किसी भी अभिभावक को इस बात को लेकर डरने की आवश्यकता नहीं है। हां यह जरूर है कि जितना युवा और बुजुर्ग को इस बीमारी से बचाने की आवश्यकता है उतना ही बच्चों को भी बचाने की जरूरत है।

प्रश्न- यदि माता-पिता को कोविड का संक्रमण नहीं है, लेकिन बच्चे को संक्रमण हो गया है ऐसी स्थिति में बच्चों की देखभाल किस तरह की जानी चाहिए?

ऐसा उस स्थिति में ही संभव है, जबकि बच्चों को संक्रमण परिवार के अंदर से नहीं बल्कि कहीं बाहर से मिला हो। सबसे पहले परिवार के सभी सदस्यों को कोविड जांच करानी चाहिए। देखभाल करने वाले सदस्य को देखरेख के समय बचाव के सभी उपाय अपनाने चाहिए, दो मास्क, फेस शील्ड, ग्लब्स आदि का प्रयोग करना चाहिए। कोविड संक्रमित बच्चों की देखभाल एक चिकित्सक की सलाह के बाद बताई गई गाइडलाइन के अनुसार ही की जानी चाहिए। देखभाल करने वाले सदस्य और कोविड संक्रमित बच्चे को परिवार के अन्य सदस्यों से खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए।

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प्रश्न- कोविड संक्रमण के ऐसे भी मामले देखे गए हैं जिसमें नवजात शिशु की मां को भी संक्रमण हो गया, ऐसी स्थिति में शिशु को संक्रमण से केसे सुरक्षित रखा जा सकता है?

ऐसी स्थिति में घर के ऐसे सदस्य को बच्चे की देखभाल करनी चाहिए जो कोरोना पॉजिटिव नहीं है। हालांकि महिला को नवजात को स्तनपान अवश्य कराना चाहिए। यदि बच्चे की देखभाल करने के लिए अन्य कोई सदस्य उपलब्ध नहीं है तब भी मां डबल मास्क पहन कर नवजात को स्तनपान कराना चाहिए। स्तनपान के बाद अच्छी तरह अपने हाथ धोएं और आसपाास की जगह को सैनिटाइज करें, मां का दूध नवजात के बढ़ने और विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। कोरोना संक्रमित मां के दूध में भी कोरोना वायरस के प्रति एंटीबॉडीज पाई जाती हैं।

प्रश्न: हम बच्चों को कोविड से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

बड़े बच्चे कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन कर खुद को कोविड संक्रमण से सुरक्षित रख सकते हैं। हम दो साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क लगाने की सलाह नहीं देते हैं, इसलिए उन्हें घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है। लेकिन घर के अंदर रहते हुए भी उन्हें अन्य शारीरिक गतिविधि में व्यस्त रखना जरूरी है, क्योंकि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शुरू के पांच साल बेहद अहम होते हैं। घर के ऐसे सभी सदस्य जो 18 साल की उम्र से अधिक के हों वह कोरोना की वैक्सीन अवश्य लगवाएं, यदि संक्रमण से बड़े सुरक्षित होगें तो बच्चे भी सुरक्षित रहेगें। स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी वैक्सीन को सुरक्षित पाया गया है इसलिए स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी वैक्सीन लगवानी चाहिए।

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