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कोरोना: क्या है एंटीबॉडी कॉकटेल दवा? डॉ.गंगाखेड़कर बोले- म्यूटेशन रोकने में होगी मददगार

Mon, 31 May 2021 10:17 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 31 May 2021 10:17 AM IST
सार

 भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) के महामारी विज्ञान और संक्रामक रोग के पूर्व प्रमुख डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने कहा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल से कोविड-19 वायरस के म्यूटेशन की संभावनाएं नहीं हैं।

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Covid antibody cocktail unlikely to lead to mutations, rational use vital: Dr Gangakhedkar
भारत में कोरोना की नई दवा एंटीबॉडी कॉकटेल - फोटो : ANI

विस्तार

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच इन दिनों 'मोनोक्लोनल एंटीबॉडी' या 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दवा की चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का दावा है कि यह दवा कोरोना के खिलाफ लड़ाई में 'गेम चेंजर' हो सकती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) के महामारी विज्ञान और संक्रामक रोग के पूर्व प्रमुख डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर ने कहा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल से कोविड-19 वायरस के म्यूटेशन की संभावनाएं नहीं हैं।

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आईसीएमआर के पूर्व महामारी वैज्ञानिक डॉ. रमन आर. गंगाखेड़कर कहते हैं कि आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवा कोविड और उसके वैरिएंट्स के खिलाफ कितनी प्रभावी है। हालांकि, संभावना है कि इससे वायरस का म्यूटेशन नहीं होगा।
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गांगुली बोले- सभी कोरोना मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं
आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. निर्मल के. गांगुली ने कहा है कि एंटीबॉडी कॉकटेल का उपयोग सिर्फ गंभीर या जान की जोखिम वाले मरीजों के लिए ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चूंकि यह (मोनोक्लोनल एंटीबॉडी) एक अत्यधिक महंगा उत्पाद है, इसलिए सभी संक्रमित व्यक्तियों के लिए इसका उपयोग न करें।

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क्या है मोनोक्लोनल एंटीबॉडी? 

मोनोक्नोल एंटीबॉडी दवा दो दवाओं का मिश्रण है। इसलिए इसे एंटीबॉडी कॉकटेल दवा भी कहा जाता है। इसे दो दवाओं कासिरिविमाब और इम्देवीमाब के 600-600 एमजी का डोज मिलाकर तैयार किया जाता है। ये दवा काफी महंगी होती है। हाल ही में गुजरात की दवा कंपनी जायडस कैडिला ने ZRC-3308 के नाम से एंटीबॉडी कॉकटेल दवा बनाई है और इसके ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी मांगी है।

किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बहुत जरूरी होती है। एंटीबॉडी प्रोटीन होते हैं, जो किसी भी बीमारी से शरीर को बचाते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को किसी खास बीमारी से लड़ने के लिए लैब में तैयार किया जाता है। कासिरिविमाब और इम्देवीमाब को स्विट्जरलैंड की फार्मा कंपनी रोशे ने बनाया है, जो कोविड के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 के खिलाफ प्रोटीन बनाती है। ये दवा शरीर में कोरोनावायरस को फैलने से रोकती है।

एंटीबॉडी दवा अमेरिका से आई है। फिलहाल इस दवा का इस्तेमाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल और दिल्ली के फोर्टिस एस्कोर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट और अपोलो अस्पताल में किया जा रहा है। हाल ही में इस दवा से एक व्यक्ति भी ठीक हुआ है।

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