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Covid-19 : बुजुर्गों को नहीं युवाओं को कोरोना वैक्सीन देने जा रहा इंडोनेशिया, जानिए क्यों...

Wed, 06 Jan 2021 03:12 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 06 Jan 2021 03:12 PM IST
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Covid-19: younger People Get Vaccines First in Indonesia coronavirus
कोविड-19 टीकाकरण का पूर्वाभ्यास - फोटो : ANI

दुनिया भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। अमेरिका, रूस और ब्रिटेन समेत कई देशों में लोगों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए लोगों को कोविड वैक्सीन दी जा रही है।इंडोनेशिया में कोविड-19 वैक्सीन देने की तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन उसकी योजना बाकी देशों से थोड़ी अलग है। ज्यादातर देशों में वायरस की चपेट में आने के ज्यादा रिस्क वाले बुजुर्गों को वैक्सीन दी जा रही है। जबकि इंडोनेशिया ने काम करने वाले वयस्कों को पहले वैक्सीन दी जाएगी।

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अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश वैक्सीन देना शुरू कर चुके हैं। यहां बुजुर्गों को वैक्सीन पहले दी जा रही है, जिन्हें सांस संबंधी बीमारी होने का खतरा ज्यादा है। इंडोनेशिया में चीन की सिनोवैक बायोटेक की वैक्सीन देने की तैयारी की जा रही है। उसका कहना है कि अभी बुजुर्गों पर वैक्सीन के असर का पर्याप्त डेटा नहीं मिला है। देश में क्लिनिकल ट्रायल 18-59 साल के लोगों पर जारी है। अभी बुजुर्गों को वैक्सीन देने के बारे में देश के ड्रग रेग्युलेटर फैसला करेंगे। ब्रिटेन और अमेरिका में फाइजर की वैक्सीन दी जा रही है, जो सभी उम्र के लोगों पर असरदार है।
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इसके जरिए तेजी से हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही अर्थव्यवस्था को भी पटरी पर लाया जाएगा। इंडोनेशिया के इस कदम पर पूरी दुनिया की निगाहें भी टिकी हैं।
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वैक्सीन के लिए चीनी कंपनी से की डील
इंडोनेशिया ने चीनी कंपनी के साथ 12.5 करोड़ खुराकों की डील की है, जिसमें से 30 लाख खुराकें पहुंचाई जा चुकी हैं। फाइजर की वैक्सीन देश में तीसरी तिमाही में पहुंच सकती है जबकि ऑक्सफर्ड की वैक्सीन दूसरी तिमाही में। ऑस्ट्रेलियन नैशनल यूनिवर्सिटी के प्रफेसर पीटर कॉलिगनॉन का कहना है कि इंडोनेशिया के प्लान से बीमारी फैलने की रफ्तार धीमी हो सकती है लेकिन मृत्युदर पर ज्यादा असर की संभावना नहीं है।


काम करने को पहले दी जाएगी वैक्सीन
वहीं, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में यॉन्ग लू लिन स्कूल के प्रफेसर डेल फिशर का कहना है कि युवा वयस्क ज्यादा सक्रिय होते हैं, ज्यादा सामाजिक होते हैं और सफर भी ज्यादा करते हैं। ऐसे में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन को कम किया जा सकता है। वहीं, देश के स्वास्थ्य मंत्री बूडी गुनाडी का कहना है कि देश को हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने के लिए 18.15 करोड़ लोगों को वैक्सिनेट करना होगा। उसे 42.7 करोड़ खुराकें चाहिए होंगी। हालांकि, हर्ड इम्यूनिटी पर और रिसर्च की जरूरत अभी है।

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