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Mumbai: अदालत ने पूर्व मेयर के बेटे और फर्म को जारी किया समन, जाली दस्तावेजों को जमा करने का आरोप

Fri, 06 Jan 2023 10:53 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 06 Jan 2023 10:53 PM IST
सार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.ए.जोगलेकर ने डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) की दलीलों का संज्ञान लिया और तीन जनवरी को समन जारी किया। इसका विवरण शुक्रवार को उपलब्ध कराया गया।

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Court summons to ex-Mumbai mayors son firm others on submission of forged papers
court Order

विस्तार

मुंबई की एक अदालत ने पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर के बेटे, उनसे जुड़ी एक फर्म और तीन अन्य को कथित रूप से फर्जी दस्तावेज जमा करने और कंपनी अधिनियम के तहत दंडनीय ऐसे अपराधों के लिए समन जारी किया है। 

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए.ए.जोगलेकर ने डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) की दलीलों का संज्ञान लिया और तीन जनवरी को समन जारी किया। इसका विवरण शुक्रवार को उपलब्ध कराया गया। आरोपियों को छह फरवरी को कोर्ट के  समक्ष पेश होने को कहा गया है। 
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किश कॉरपोरेट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, उसके अतिरिक्त निदेशक साईप्रसाद पेडनेकर, निदेशक शैला गावस और प्रशांत गावस और एक अन्य अतिरिक्त निदेशक गिरीश रेवंकर के खिलाफ अदालत का समन भाजपा नेता किरीट सोमैया की 2020 की शिकायत पर आया है। साई प्रसाद पेडनेकर मुंबई की पूर्व मेयर किशोर पेडनेकर के बेटे हैं। 
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अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ मामला बनता है। कंपनी और उनके निदेशक कथित रूप से जाली और झूठे दस्तावेजों को प्रस्तुत करने और कंपनी अधिनियम के तहत दंडनीय ऐसे अन्य अपराधों के लिए अन्य अपराधों के लिए प्रथम दृष्टया जिम्मेदार हैं। आरोपियों ने दावा किया है कि राजनीतिक कारणों से मामला दर्ज किया गया है। 

भाजपा नेता सोमैया महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकर के घोर आलोचक रहे हैं। पूर्व मेयर पेडनेकर उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट की शिवसेना की प्रवक्ता हैं। 2020 में सोमैया ने डिप्टी आरओसी के पास एक शिकायत दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया था कि साईप्रसाद पेडनेकर और अन्य ने किश कॉर्पोरेट सर्विसेज को पंजीकृत करने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। 


अदालत में अपनी दलीलों में डिप्टी आरओसी ने कहा कि कारण बताओ नोटिस पर आरोपी का जवाब बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं था। कंपनी द्वारा कार्रवाई कंपनी अधिनियम की धारा 488 (झूठे बयान के लिए सजा) के उल्लंघन में थी। 

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