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1984 का दंगा : अदालत ने आरोप सुनाया- सिखों को मारने वाली भीड़ में शामिल थे और नेतृत्व भी कर रहे थे सज्जन कुमार
Wed, 08 Dec 2021 06:12 AM IST
सुभाष कुमार
न्यूज डेस्क, अमर अजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर अजाला, नई दिल्ली
Published by: सुभाष कुमार
Updated Wed, 08 Dec 2021 06:12 AM IST
सार
श्रावस्ती विहार पुलिस थाने में दर्ज मामला राजनगर में सिख पिता-पुत्र सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुणदीप सिंह की हत्या का है। वकील हरप्रीत सिंह होरा ने बताया, अदालत ने दंगा, हत्या और डकैती के आरोप सुनाए हैं।
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सज्जन कुमार पर आरोप 16 दिसंबर की सुनवाई में औपचारिक रूप से तय होंगे।
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली की निचली अदालत ने माना है कि इसके पर्याप्त सुबूत हैं, जिनसे प्रथमदृष्ट्या साबित होता है कि सिखों को मारने, दंगा करने और डकैती डाल रही भीड़ में न केवल आरोपी सज्जन कुमार शामिल थे, बल्कि नेतृत्व भी कर रहे थे। कोर्ट ने 1984 के सिख दंगों से जुड़े एक मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार पर आरोप सुनाते हुए यह बात कही। यह आरोप 16 दिसंबर की सुनवाई में औपचारिक रूप से तय होंगे।
श्रावस्ती विहार पुलिस थाने में दर्ज मामला राजनगर में सिख पिता-पुत्र सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुणदीप सिंह की हत्या का है। उनके परिजन के वकील हरप्रीत सिंह होरा ने बताया, अदालत ने दंगा, हत्या और डकैती के आरोप सुनाए हैं। सुनवाई में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमके नागपाल ने कहा, प्रथमदृष्टया आरोप तय किए जा सकते हैं। औपचारिक रूप से आरोप 16 दिसंबर की सुनवाई में तय होंगे।
1994 में बंद हो चुका था मामला
होरा ने बताया कि मामला 1994 में बंद कर दिया था। इसकी वजह आरोपियों का न मिल पाना बताई थी। पर प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के बाद एसआईटी ने मामले को फिर से खोला था। ब्यूरो
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अदालत ने यह भी कहा
कोर्ट ने कहा, हमारा मत है कि प्रत्यक्षदर्शियों के मौखिक बयान व पुलिस जांच में मिले साक्ष्यों के अनुसार हजारों लोगों की गैर-कानूनी भीड़ जमा की गई थी। ये लोग हथियार ले कर आए थे। इनका उद्देश्य लूटमार, आगजनी और सिखों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना था।
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श्रावस्ती विहार पुलिस थाने में दर्ज मामला राजनगर में सिख पिता-पुत्र सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुणदीप सिंह की हत्या का है। उनके परिजन के वकील हरप्रीत सिंह होरा ने बताया, अदालत ने दंगा, हत्या और डकैती के आरोप सुनाए हैं। सुनवाई में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमके नागपाल ने कहा, प्रथमदृष्टया आरोप तय किए जा सकते हैं। औपचारिक रूप से आरोप 16 दिसंबर की सुनवाई में तय होंगे।
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1994 में बंद हो चुका था मामला
होरा ने बताया कि मामला 1994 में बंद कर दिया था। इसकी वजह आरोपियों का न मिल पाना बताई थी। पर प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के बाद एसआईटी ने मामले को फिर से खोला था। ब्यूरो
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अदालत ने यह भी कहा
कोर्ट ने कहा, हमारा मत है कि प्रत्यक्षदर्शियों के मौखिक बयान व पुलिस जांच में मिले साक्ष्यों के अनुसार हजारों लोगों की गैर-कानूनी भीड़ जमा की गई थी। ये लोग हथियार ले कर आए थे। इनका उद्देश्य लूटमार, आगजनी और सिखों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना था।