Maharashtra: राकांपा नेता की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज, जानिए पूरा विवाद
ईडी ने कहा कि आवेदक ने गलत तरीके से दावा किया है। आवेदक दूसरों पर अपराध लगाने की कोशिश की कोशिश कर रहा है। लेकिन दोषारोपण से मामला खत्म नहीं होता। जस्टिस एम जी देशपांडे ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राकांपा नेता की याचिका खारिज की।
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मुंबई की एक अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री हसन मुश्रीफ की अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया है। राकांपा नेता और पूर्व मंत्री मुश्रीफ ने कहा आवेदन में कहा था कि जांच के नाम पर और धन शोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत बयान दर्ज कराने के नाम पर उन्हें ईडी द्वारा गिरफ्तारी की आशंका है। मुश्रीफ कोल्हापुर जिले के कागल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। साथ ही वह महा विकास अघाड़ी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री थे।
यह है पूरा मामला
ईडी का दावा है कि सर सेनापति संताजी घोरपड़े शुगर फैक्ट्री में मुश्रीफ के बेटे नविद, आबिद और साजिद निदेशक हैं। इसमें बिना किसी व्यापार के दो कंपनियों से करोड़ों रुपए आ रहे थे। मुश्रीफ ने वकीलों द्वारा जमानत याचिका में आरोप लगाया कि मामला भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शुरू किया था। जांच राजनीतिक रूप से प्रेरित है। जांच एजेंसी ने इस आरोप पर कहा कि मामले की जांच राजनीतिक रूप से प्रेरित नहीं है, बल्कि तथ्यों के आधार पर की जा रही है।
दोषारोपण से मामला खत्म नहीं होता
ईडी ने कहा कि आवेदक ने गलत तरीके से दावा किया है। आवेदक दूसरों पर मामले उड़ेलने की कोशिश की कोशिश कर रहा है। लेकिन दोषारोपण से मामला खत्म नहीं होता। जस्टिस एम जी देशपांडे ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राकांपा नेता की याचिका खारिज की। मुश्रीफ ने अपने खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले को खत्म करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का भी रुख किया है।