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DHFL Case: आरोपी वधावन बंधुओं को राहत, कोर्ट ने सीबीआई रिमांड पर भेजने से किया इनकार
Sun, 31 Jul 2022 10:26 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 31 Jul 2022 10:26 PM IST
सार
स्पेशल जज विशाल गोगने ने शनिवार को सीबीआई द्वारा दायर आवेदन को तीन और दिनों के लिए पुलिस हिरासत में देने की मांग को इस आधार पर खारिज किया कि मामले में आगे हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है।
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डीएचएफएल के प्रमोटर कपिल वधावन
- फोटो : social media
विस्तार
दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने सीबीआई द्वारा दायर उस रिमांड आवेदन को खारिज कर दिया है जिसमें आरोपी कपिल वधावन और धीरज राजेश वधावन के लिए और रिमांड की मांग की गई थी।
स्पेशल जज विशाल गोगने ने शनिवार को सीबीआई द्वारा दायर आवेदन को तीन और दिनों के लिए पुलिस हिरासत में देने की मांग को इस आधार पर खारिज किया कि मामले में आगे हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने उन्हें 5 अगस्त 2022 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया, ताकि मेसर्स दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के 34,000 करोड़ के घोटाले में आगे की जांच की जा सके। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि सीबीआई के आकलन में नई सूचनाएं साझा की गई हैं। संपत्तियों की तलासी और हेलीकॉप्टर व अन्य बरामदगी के साथ ही मुकौटा कंपनियों की जांच की जरूरत है।
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सीबीआई के मुताबिक, दोनों आरोपी एनपीए की 34,000 करोड़ रुपये की राशि में से 29,000 करोड़ रुपये को डायवर्ड करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इनका कुल ऋण 42,000 करोड़ रुपये है।
वधावन बंधुओं ने धोखाधड़ी से अपनी ही कंपनी को दिया ऋण : सीबीआई
सीबीआई ने कोर्ट में दावा किया कि आरोपी वधावन बंधुओं ने दोखाधड़ी से अपने ही स्वामित्व वाली कंपनियों और डेवलपर्स को ही गुप्त रूप से ऋण दिया। इन लोगों ने यह दिखाया कि ऐसे ऋण रिटेल व्यक्तिगत कर्जदाताओं को दिए गए जबकि हकीकत में ये अस्तित्व में ही नहीं हैं।
सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि आरोपी वधावन बंधुओं से संबंधित कई कंपनियां हैं, जहां डीएचएफएल द्वारा ऋण डायवर्ट किया गया। आरोपी कपिल वधावन ने हिरासत के दौरान खुलासा किया कि उसने ब्रोकर एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड, मुंबई के जरिए धनलक्ष्मी बैंक, वल्लाश पॉलीप्लास्ट और वधावन ग्लोबल के 17.78 करोड़ रुपये के शेयर हासिल किए।
धोखाधड़ी से हासिल की गई राशि से हासिल किए शेयर : सीबीआई
सीबीआई ने कहा कि ऐसी वाजिब आशंका है कि ये शेयर, धोखाधड़ी की गई राशि की आय से अर्जित किए गए थे। इसलिए इस संबंध में जांच चल रही है। सीबीआई ने कहा कि जांच में यह भी पता चला है कि रिकॉर्ड्स में बेइमानी से हेरफेर किया गया और बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले संघ से मिले फंड को बेइमानी से निकाला जा सके।
सीबीआई ने कोर्ट के समक्ष अपने हलफनामे में कहा कि जांच के दौरान मिले डिजिटल डिवाइसों की समीक्षा की गई और यह महसूस किया गया कि डिजिटल डिवाइस में मौजूद आवाज की तुलना के लिए आरोपी धीरज वधावन की आवाज का सैंपल आवश्यक है।
29 जुलाई को आरोपी वधावन को एक स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में उनके आवाज का सैंपल लिया गया था। हालांकि उन्होंने अपनी आवाज का सैंपल देने से इन्कार कर दिया। जांच एजेंसी ने कहा कि आरोपी धीरज वधावन जांच के दौरान सहयोग नहीं कर रहे हैं।
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स्पेशल जज विशाल गोगने ने शनिवार को सीबीआई द्वारा दायर आवेदन को तीन और दिनों के लिए पुलिस हिरासत में देने की मांग को इस आधार पर खारिज किया कि मामले में आगे हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है।
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कोर्ट ने उन्हें 5 अगस्त 2022 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया, ताकि मेसर्स दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के 34,000 करोड़ के घोटाले में आगे की जांच की जा सके। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि सीबीआई के आकलन में नई सूचनाएं साझा की गई हैं। संपत्तियों की तलासी और हेलीकॉप्टर व अन्य बरामदगी के साथ ही मुकौटा कंपनियों की जांच की जरूरत है।
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सीबीआई के मुताबिक, दोनों आरोपी एनपीए की 34,000 करोड़ रुपये की राशि में से 29,000 करोड़ रुपये को डायवर्ड करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इनका कुल ऋण 42,000 करोड़ रुपये है।
वधावन बंधुओं ने धोखाधड़ी से अपनी ही कंपनी को दिया ऋण : सीबीआई
सीबीआई ने कोर्ट में दावा किया कि आरोपी वधावन बंधुओं ने दोखाधड़ी से अपने ही स्वामित्व वाली कंपनियों और डेवलपर्स को ही गुप्त रूप से ऋण दिया। इन लोगों ने यह दिखाया कि ऐसे ऋण रिटेल व्यक्तिगत कर्जदाताओं को दिए गए जबकि हकीकत में ये अस्तित्व में ही नहीं हैं।
सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि आरोपी वधावन बंधुओं से संबंधित कई कंपनियां हैं, जहां डीएचएफएल द्वारा ऋण डायवर्ट किया गया। आरोपी कपिल वधावन ने हिरासत के दौरान खुलासा किया कि उसने ब्रोकर एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड, मुंबई के जरिए धनलक्ष्मी बैंक, वल्लाश पॉलीप्लास्ट और वधावन ग्लोबल के 17.78 करोड़ रुपये के शेयर हासिल किए।
धोखाधड़ी से हासिल की गई राशि से हासिल किए शेयर : सीबीआई
सीबीआई ने कहा कि ऐसी वाजिब आशंका है कि ये शेयर, धोखाधड़ी की गई राशि की आय से अर्जित किए गए थे। इसलिए इस संबंध में जांच चल रही है। सीबीआई ने कहा कि जांच में यह भी पता चला है कि रिकॉर्ड्स में बेइमानी से हेरफेर किया गया और बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले संघ से मिले फंड को बेइमानी से निकाला जा सके।
सीबीआई ने कोर्ट के समक्ष अपने हलफनामे में कहा कि जांच के दौरान मिले डिजिटल डिवाइसों की समीक्षा की गई और यह महसूस किया गया कि डिजिटल डिवाइस में मौजूद आवाज की तुलना के लिए आरोपी धीरज वधावन की आवाज का सैंपल आवश्यक है।
29 जुलाई को आरोपी वधावन को एक स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में उनके आवाज का सैंपल लिया गया था। हालांकि उन्होंने अपनी आवाज का सैंपल देने से इन्कार कर दिया। जांच एजेंसी ने कहा कि आरोपी धीरज वधावन जांच के दौरान सहयोग नहीं कर रहे हैं।