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नीलगिरि हाथी गलियारे के 11 रिजार्ट सील करने का तमिलनाडु को न्यायालय का आदेश
भाषा, नई दिल्ली
Updated Thu, 09 Aug 2018 02:18 PM IST
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उच्चतम न्यायालय ने आज तमिलनाडु सरकार को आदेश दिया कि नीलगिरि के हाथी गलियारे पर कानूनों का उल्लंघन कर बनाये गये 11 रिजार्ट और होटल 48 घंटे के भीतर सील किये जाये। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस क्षेत्र में स्थित दूसरे होटल और रिजार्ट के मालिकों को 24 घंटे के भीतर अपने कागजात मंजूरी के लिये कलेक्टर के समक्ष पेश करें।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि कलेक्टर इन कागजात की जांच करेंगे और यदि वह इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि इनका निर्माण पूर्व अनुमति के बगैर किया गया है तो उन्हें भी 48 घंटे के भीतर बंद कर दिया जाना चाहिए।
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पीठ ने नीलगिरि के हाथी गलियारे पर इस तरह से निर्माण होने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि हाथी हमारी ‘‘राष्ट्रीय धरोहर’’ है। इस मामले की सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया था कि तमिलनाडु के नीलगिरि हाथी गलियारा क्षेत्र में अनेक होटल और रिजार्ट बन गये हैं जिनसे हाथियों के आवागमन में परेशानी होती है।
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पीठ ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु के इन क्षेत्रों में किसी प्रकार की निर्माण की गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। साथ ही पीठ ने नीलगिरि के कलेक्टर को इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने कलेक्टर से जानना चाहा था कि उन प्रतिष्ठानों की पहचान किस तरह की जायेगी कि उनका निर्माण कब और कैसे हुआ। वकील का कहना था कि तमिलनाडु में मानसून के मौसम में करीब 18,000 हाथी आये थे और न्यायालय को इन होटल तथा रिजार्ट की बिजली आपूर्ति बंद करने का निर्देश देना चाहिए।
कुछ रिजार्ट और होटल मालिकों ने भी इस संबंध में मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुये शीर्ष अदालत में अपील दायर कर रखी है। शीर्ष अदालत ने दुर्घटनाओं और दूसरे कारणों से हाथियों की मृत्यु की घटनाओं को कम करने के इरादे से पूरे देश में हाथी गलियारा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया था।। न्यायालय ने इस संबंध में केन्द्र को व्यावहारिक समाधान पेश करने का निर्देश दिया था।
केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया था कि देश के 22 राज्यों में हाथियों के लिये गलियारे हैं परंतु शीर्ष अदालत के निर्देश के बावजूद 13 राज्यों ने इस मामले में सरकार को जवाब नहीं दिया है।