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Dopt: 23 लाख रुपये का कोर्स, जिसे करते हैं IAS-IPS-IFS व CSS अफसर, फौजी माहौल में होती है तैयारी

Sat, 16 Nov 2024 05:29 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 16 Nov 2024 05:29 PM IST
सार

डीओपीटी के मुताबिक, 65वां राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय कोर्स, जनवरी 2025 से शुरू होकर नवंबर 2025 तक चलेगा। केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों एवं सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और यूटी के प्रशासकों को भेजे पत्र में कहा गया है कि इस कोर्स की ट्यूशन फीस 2,70,000 रुपये तय की गई है।

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course worth Rs 23 lakh which is done by CSS and civil officers, preparation done in a military environment
सिविल सेवा अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार अपने आईएएस, आईपीएस, आईएफएस व सीएसएस अफसरों के लिए एक ऐसा कोर्स आयोजित करती है, जिसकी फीस मामूली नहीं होती। वरिष्ठ अधिकारियों को ही यह कोर्स करने का मौका मिलता है। इस कोर्स की सिखलाई के लिए अखिल भारतीय सेवा और सीएसएस अधिकारियों  को लगभग 23 लाख रुपये जमा कराने पड़ते हैं। हालांकि यह फीस संबंधित मंत्रालय या विभाग द्वारा भरी जाती है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में यह कोर्स कराया जाता है। राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, जिसे भारतीय सेना का उच्च शिक्षण संस्थान माना जाता है, यहां रक्षा और सिविल सेवा अधिकारी 47 सप्ताह का कोर्स करने के लिए आते हैं। 
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डीओपीटी के मुताबिक, 65वां राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय कोर्स, जनवरी 2025 से शुरू होकर नवंबर 2025 तक चलेगा। केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों एवं सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और यूटी के प्रशासकों को भेजे पत्र में कहा गया है कि इस कोर्स की ट्यूशन फीस 2,70,000 रुपये तय की गई है। इसके अलावा देश के आंतरिक हिस्सों और विदेशों के टूर प्रोग्राम के लिए 20 लाख रुपये जमा कराने पड़ते हैं। जिस अधिकारी का चयन इस कोर्स के लिए होता है, उसकी फीस संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश द्वारा वहन की जाती है। स्पांसर राज्य द्वारा कोर्स से संबंधित कई दूसरे खर्च भी उठाए किए जाते हैं। कोर्स के लिए चयनित प्रत्येक अधिकारी को संबंधित मंत्रालय या विभाग द्वारा करीब पांच-छह हजार रुपये बतौर एड हॉक अलाउंस दिए जाने की सुविधा मिलती है। कोर्स में शामिल होने वाले अधिकारियों को संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में ऑन ड्यूटी माना जाएगा। 
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अधिकारियों को यह कोर्स ज्वाइन करने से पहले राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के साथ एक करारनामे पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं। इसमें उसे लिखना होता है कि वे पांच वर्ष तक सरकारी नौकरी करेंगे और कोर्स की समाप्ति पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, एनएससीएस और सुरक्षा से संबंधित अन्य संगठनों में काम करने के लिए तैयार रहेंगे। इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी के पास कम से कम 14 साल का अनुभव होना चाहिए। शानदार प्रदर्शन के अलावा संबंधित अधिकारी को विजिलेंस से भी क्लीयरेंस मिलनी चाहिए। कोर्स के दौरान अधिकारियों को रक्षा रणनीति के हिसाब से आर्थिक, वैज्ञानिक, राजनीतिक और औद्योगिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। इतना ही नहीं, कोर्स में शामिल अधिकारियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा विषयों को लेकर रिसर्च करने का भरपूर अवसर मिलता है। 
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डीओपीटी ने इस बार एनडीसी कोर्स के लिए जो आवेदन पत्र तैयार किया है, उसमें कई बातें कही गई हैं। जो अधिकारी सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत आते हैं, उनके लिए केंद्र में दो वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य है। सीएफएस में जिनकी ट्रेनिंग खत्म होने में दो माह का समय बचा है, वे भी कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। कोर्स ज्वाइन करने से पहले संबंधित अधिकार को यह बताना होगा कि कोर्स का खर्च कौन वहन करेगा। इस बाबत मंत्रालय या विभाग को अंडरटेकिंग देनी पड़ेगी। कोर्स के बीच में अगर कोई अधिकारी, त्यागपत्र देता है या वीआरएस ले लेता है तो उसे कोर्स का पूरा खर्च जमा कराना पड़ेगा। इस कोर्स के लिए 30 नवंबर तक आवेदन करना होगा। कोर्स पूरा होने के बाद भी संबंधित अधिकारी को कई शर्ते पूरी करनी पड़ती हैं। जैसे वह अधिकारी, कोर्स पूरा करने के बाद तुरंत बाद 12 सप्ताह या इससे अधिक समय के ट्रेनिंग प्रोग्राम पर नहीं जाएगा। 
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