Tripura: त्रिपुरा में आदिवासी परिषद चुनावों के मतगणना जारी, 173 उम्मीदवारों का भाग्य होगा तय
त्रिपुरा में आदिवासी परिषद चुनावों के लिए मतगणना जारी है। इसमें 173 उम्मीदवारों का भाग्य तय होगा।
विस्तार
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के महत्वपूर्ण चुनावों के लिए राज्य के सभी आठ जिलों में आज मतगणना हुई। इस दौरान सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने विधानसभा के बाद राज्य के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) में पूर्ण बहुमत हासिल करके राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस परिषद पर अपना नियंत्रण बरकरार रखा है।
टीएमपी ने 18 सीटें हासिल की
30 सदस्यीय टीटीएडीएडीसी में 28 निर्वाचित प्रतिनिधि और राज्य सरकार द्वारा मनोनीत दो सदस्य शामिल हैं। यह त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किलोमीटर भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से का प्रशासन करता है। पूर्व राजपरिवार के वंशज प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व वाली टीएमपी ने अब तक 18 सीटें हासिल कर ली हैं और चार अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है। भाजपा ने दो सीटें जीत ली हैं और चार अन्य सीटों पर आगे चल रही है।
सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे और कांग्रेस पार्टी, 2021 के टीटीएएडीसी चुनावों की तरह एक बार फिर अपना खाता खोलने में विफल रहे हैं। 2021 के टीटीएएडीसी चुनावों में भाजपा ने 11 सीटों पर चुनाव लड़ा और नौ सीटें जीतीं। वहींं, भाजपा समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी हुए और बाद में टीएमपी में शामिल हो गए। टीएमपी ने पिछले चुनावों (2021) में 18 सीटें जीती थीं और कई वर्षों के बाद सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे से परिषद का नियंत्रण छीन लिया था।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीटीएएडीसी में लगातार दो जीत के साथ, टीएमपी ने त्रिपुरा के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। संविधान की छठी अनुसूची के तहत 1985 में गठित टीटीएएडीसी राज्य के लगभग 68 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र पर सीमित अधिकार क्षेत्र रखती है। इन सीमाओं के बावजूद, यह एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय बनी हुई है, जो राजनीतिक महत्व में राज्य विधानसभा के बाद दूसरे स्थान पर है।
किस पार्टी ने कितनें सीट पर चुनाव लड़ा?
आदिवासी परिषद चुनावों में चुनावी मुकाबले में तीन राष्ट्रीय दल - सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), विपक्षी सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा और कांग्रेस के साथ-साथ दो प्रमुख क्षेत्रीय दल, टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) और त्रिपुरा का स्वदेशी जन मोर्चा (आईपीएफटी) शामिल हैं। कई छोटी पार्टियां और निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। एसईसी अधिकारियों के अनुसार, भाजपा, टीएमपी और वाम मोर्चा ने सभी 28 निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने 27 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि आईपीएफटी ने 24 निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार नामित किए। इसके अलावा, 38 निर्दलीय उम्मीदवार और छोटे दलों के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।
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भाजपा के साथ कौन सी पार्टी?
भाजपा की आदिवासी समुदाय से जुड़ी दो सहयोगी पार्टियां - टीएमपी और आईपीएफटी - टीटीएएडीसी चुनावों के लिए चुनावी गठबंधन बनाने में विफल रहने के बाद अलग-अलग चुनाव लड़ीं। 2021 से, भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस परिषद का संचालन कर रही है, जिसे त्रिपुरा में राज्य विधानसभा के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय माना जाता है।
त्रिपुरा राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आदिवासी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत जून 1985 में टीटीएएडीसी का गठन किया गया था। त्रिपुरा की 42 लाख आबादी में से लगभग एक तिहाई आदिवासी समुदाय हैं। 12 अप्रैल को हुए टीटीएएडीसी चुनावों में 9,62,697 पात्र मतदाताओं में से 83.52 प्रतिशत से अधिक ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इससे 173 उम्मीदवारों का भाग्य तय होगा।
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