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गंगा किनारे बनेंगे हर्बल पौधों का कॉरिडोर, सात हजार प्रजातियों के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे
Tue, 14 Jul 2020 04:35 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Tue, 14 Jul 2020 04:35 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social media
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गंगा की धारा को अविरल करने और आत्म निर्भर भारत योजना के तहत जल्द ही गंगा के किनारे गंदगी के बजाए हर्बल और औषधीय पौधों से गुलजार होंगे। जुलाई के तीसरे सप्ताह में चार हजार करोड़ रुपये की सहायता से हर्बल कॉरिडोर के लिए पौधारोपण योजना शुरू होगी। इसमें 7000 प्रजातियों के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।
गंगा के किनारों को आर्थिक समृद्धि से जोड़ने के लिए बनी इस योजना में कृषि विकास मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (एनएमपीबी) के सहयोग से गंगा के किनारों को पर्यावरण विविधता, लोगों में जागरूकता और खेती के कामों में आधुनिकता के साथ जैविक खेती के साथ हर्बल कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा। इसके तहत पहले चरण में पांच राज्यों के 27 जिलों में 800 एकड़ में मेडिसिन प्लांट लगाए जाएंगे।
इसे दो साल में बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर को कवर करने का लक्ष्य रखा है। इस समय देश में औषधीय जड़ी-बूटियों की घरेलू मांग सालाना 2,00,000 मीट्रिक टन से अधिक खपत होने का अनुमान लगाया गया है। इससे किसानों को हर साल 5,000 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
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गंगा के किनारों को आर्थिक समृद्धि से जोड़ने के लिए बनी इस योजना में कृषि विकास मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (एनएमपीबी) के सहयोग से गंगा के किनारों को पर्यावरण विविधता, लोगों में जागरूकता और खेती के कामों में आधुनिकता के साथ जैविक खेती के साथ हर्बल कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा। इसके तहत पहले चरण में पांच राज्यों के 27 जिलों में 800 एकड़ में मेडिसिन प्लांट लगाए जाएंगे।
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इसे दो साल में बढ़ाकर 10 लाख हेक्टेयर को कवर करने का लक्ष्य रखा है। इस समय देश में औषधीय जड़ी-बूटियों की घरेलू मांग सालाना 2,00,000 मीट्रिक टन से अधिक खपत होने का अनुमान लगाया गया है। इससे किसानों को हर साल 5,000 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
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