पांच साल में पहली बार भारतीय बैंकों के कॉरपोरेट लोन डिफाल्ट में आई कमी : रिपोर्ट
- साल 2017 में इटली में 20.29 लाख करोड़ रुपये का बैड लोन रहा
- वर्तमान में भारतीय बैंकों पर है 10.25 लाख करोड़ रुपये का बैड लोन
- 2015-17 की अपेक्षा 2017-18 में करीब दोगुना बढ़ गया घरेलू कर्ज
- 3.75 लाख करोड़ रुपये था वित्त वर्ष 2016-17 में देश का कुल घरेलू कर्ज
- 6.74 लाख करोड़ रुपये हो गया कुल घरेलू कर्ज बढ़कर 2017-18 में
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विस्तार
घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में दावा किया है कि भारतीय बैंकों के कॉरपोरेट लोन डिफाल्ट में पांच साल बाद वित्त वर्ष 2018-19 की पहली छमाही में कमी देखी गई है। आरबीआई भी कॉरपोरेट लोन डिफाल्ट में आई इस कमी पर एक डाटा रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
मामले से जुड़े आरबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि मिंट स्ट्रीट मेमो नाम से तैयार की जा रही रिपोर्ट में यह खुलासा किया जाएगा कि पिछले साल 12 फरवरी को लागू किए गए नए और सख्त कानून की मदद से कॉरपोरेट डिफाल्ट में कमी लाने में मदद मिली है।
यह रिपोर्ट स्वतंत्र संस्था सेंटर फॉर एडवांस्ड फाइनेंशियल रिसर्च एंड लर्निंग की मदद से तैयार की जा रही है। इस बीच रेंटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2014, 15, 16, 17 और 18 की तुलना में 2018-19 की पहली छमाही में लोन डिफाल्ट का अनुपात सबसे कम है।
भारत में इटली के बाद सबसे ज्यादा बैड लोन
दुनिया में बैड लोन या एनपीए के मामले में भारत यूरोपीय देश इटली के बाद दूसरे स्थान पर है। इटली में जहां बैंकों के कुल कर्ज का 14.4 फीसदी हिस्सा बैड लोन या एनपीए हो गया है, वहीं भारत में यह अनुपात 11.6 फीसदी है। हालांकि, भारतीय परिपेक्ष्य में देखें तो यहां कुल एनपीए का 90 फीसदी हिस्सा सिर्फ सरकारी बैंकों पर आता है।
घरेलू कर्ज हुआ दोगुना
आरबीआई के हालिया आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में कॉरपोरेट लोन के डिफाल्ट होने से उन पर बैंकों का भरोसा कम हुआ और घरेलू कर्ज में तेजी आई। वित्त वर्ष 2016-17 की अपेक्षा 2017-18 में घरेलू कर्ज करीब दोगुना बढ़ गया है। इससे पहले के तीन वित्त वर्षों में घरेलू कर्ज बेहद मामूली स्तर से बढ़ा था लेकिन पिछले वित्त वर्ष में यह खुदरा कर्ज सबसे तेजी से बढ़ा
सबसे ज्यादा बढ़ा पर्सनल लोन
पिछले छह वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा तेजी पर्सनल लोन के मामलों में आई है। वित्त वर्ष 2013-14 में कुल पर्सनल लोन 2 लाख करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष 2018-19 में बढ़कर 5.58 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह, होम लोन का आंकड़ा 2013-14 के 5.39 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2018-19 में 10.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है। क्रेडिट कार्ड लोन में भी बड़ा इजाफा हुआ और यह 2013-14 के 24,860 करोड़ रुपये से बढ़कर 2018-19 में 85,300 करोड़ रुपये हो गया है।