Coronavirus: बायोलॉजिकल ई और भारत बायोटेक के पास 25 करोड़ कोविड टीके का भंडार, आपूर्ति के लिए तैयार
बायोलॉजिकल ई के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. विक्रम पाराडकर ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का पालन करते हुए उनकी कंपनी ने कॉर्बेवैक्स की कुल 30 करोड़ खुराक का उत्पादन किया। मार्च 2022 में कंपनी ने सरकार को कोविड टीके की 10 करोड़ खुराक की आपूर्ति की थी।
विस्तार
हैदराबाद की दो प्रमुख वैक्सीन निर्माता कंपनियों बायोलॉजिकल ई लिमिटेड और भारत बायोटेक के पास कोविड-19 टीकों की लगभग 25 करोड़ खुराक का भंडार है। दोनों कंपनियां ऑर्डर मिलने पर टीके की आपूर्ति करने के लिए तैयार हैं। कंपनी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बायोलॉजिकल ई के पास कोविड टीके कॉर्बेवैक्स की 20 करोड़ खुराक है, जबकि भारत बायोटेक के पास कोवैक्सिन की पांच करोड़ खुराक का भंडार है।
बायोलॉजिकल ई के कार्यकारी उपाध्यक्ष (विनिर्माण) डॉ. विक्रम पाराडकर ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का पालन करते हुए उनकी कंपनी ने कॉर्बेवैक्स की कुल 30 करोड़ खुराक का उत्पादन किया। मार्च 2022 में कंपनी ने सरकार को कोविड टीके की 10 करोड़ खुराक की आपूर्ति की थी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में, हमारे पास लगभग 20 करोड़ (200 मिलियन) टीके उपलब्ध हैं और जब भी हमें ऑर्डर मिलते हैं, आपूर्ति के लिए तैयार हैं। इसके अलावा हमने एंटीजन के समान 20 करोड़ खुराक का निर्माण किया है, जो हमें कॉर्बेवैक्स के निर्माण को तेजी से बढ़ाने में मदद करेगा।
हर महीने 10 करोड़ टीके का निर्माण कर सकती है बायोलॉजिकल ई
बायोलॉजिकल ई ने अमेरिका के टेक्सास चिल्ड्रन हॉस्पिटल सेंटर फॉर वैक्सीन डेवलपमेंट और बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन (ह्यूस्टन) के सहयोग से कॉर्बेवैक्स टीके को विकसित किया है। डॉ. पाराडकर ने आगे कहा कि बायोलॉजिकल ई भविष्य में ऑर्डर मिलने के आठ सप्ताह के भीतर अतिरिक्त टीके की आपूर्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी निर्माण क्षमता के अनुसार हर महीने कॉर्बेवैक्स टीके की लगभग 10 करोड़ खुराक का निर्माण और आपूर्ति कर सकती है।
वहीं, भारत बायोटेक के सूत्रों ने कहा कि वैक्सीन निर्माता के पास कोवैक्सिन की पांच करोड़ से अधिक खुराक उपलब्ध हैं। साथ ही दवा पदार्थ के रूप में 20 करोड़ से अधिक खुराक है। उन्होंने कहा कि टीके की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त उत्पादन क्षमता भी उपलब्ध है।
कोवैक्सिन भारत का स्वदेशी कोविड टीका है। भारत बायोटेक ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के सहयोग से इसे विकसित किया है। इससे पहले सूत्रों ने कहा था कि मांग कम होने के कारण कोवैक्सिन का उत्पादन इस साल की शुरुआत में रोक दिया गया था।
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