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कोरोना के मुफ्त इलाज के लिए नहीं मांगा जा सकता है गरीबी का सबूत: बॉम्बे हाईकोर्ट

Sun, 28 Jun 2020 03:33 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 28 Jun 2020 03:33 AM IST
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Coronavirus in india, Bombay high court says, Proof of poverty cannot be sought for free treatment of covid19
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद वर्गों के कोरोना मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करते समय रियायती या मुफ्त इलाज कराने के लिए उनसे दस्तावेज की उम्मीद नहीं की जा सकती है। कोरोना का रियायती या मुफ्त इलाज कराने के लिए मरीजों से गरीबी का सुबूत नहीं मांगा जा सकता है। हाईकोर्ट ने मुंबई के बांद्रा स्थित झुग्गी पुनर्वास इमारत में रहने वाले सात लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

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जस्टिस रमेश धानुका और जस्टिस माधव जामदार की पीठ ने अस्पताल को 10 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया है। इन सात लोगों से 11 से 28 अप्रैल के बीच कोरोना के इलाज के लिए केजे सोमैया अस्पताल ने 12.5 लाख रुपये वसूल किए थे। अस्पताल के बिल का भुगतान करने के लिए इन लोगों को उधार लेना पड़ा था।
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याचिकाकर्ताओं के वकील विवेक शुक्ला ने अदालत को बताया कि मरीजों को भुगतान नहीं करने पर अस्पताल से छुट्टी नहीं देने की धमकी दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल ने पीपीई किट के लिए अतिरिक्त पैसे वसूल किए। यहां तक कि उन सेवाओं के लिए भी पैसे लिए गए जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया था।
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अदालत ने 13 जून को राज्य चैरिटी के आयुक्त को जांच करने का आदेश दिया था कि क्या अस्पताल ने 20 प्रतिशत बेड गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए आरक्षित रखे हैं या नहीं। क्या उन्हें रियायती दर या मुफ्त इलाज मुहैया कराया जा रहा है? जांच के बाद ज्वाइंट चैरिटी कमिश्नर ने पिछले सप्ताह अदालत को बताया था कि अस्पताल ने बेड आरक्षित रखे हैं, लेकिन लॉकडाउन लागू होने के समय से अब तक सिर्फ तीन गरीब या जरूरतमंद मरीजों का ही इलाज किया गया है।

अस्पताल के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता कमजोर वर्ग के नहीं हैं और यह साबित करने के लिए उन्होंने  गरीबी के कोई दस्तावेज पेश नहीं किए थे।

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